Old Testament
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एज्रा 5:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब उसी शेशबस्सर ने आकर परमेश्वर के भवन की जो यरूशलेम में है नींव डाली; और तब से अब तक यह बन रहा है, परन्तु अब तक नहीं बन पाया।'
एज्रा 5:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 3:10 (HINIRV) »
जब राजमिस्त्रियों ने यहोवा के मन्दिर की नींव डाली, तब अपने वस्त्र पहने हुए, और तुरहियां लिये हुए याजक, और झाँझ लिये हुए आसाप के वंश के लेवीय इसलिए नियुक्त किए गए कि इस्राएलियों के राजा दाऊद की चलाई हुई रीति* के अनुसार यहोवा की स्तुति करें।

एज्रा 6:15 (HINIRV) »
इस प्रकार वह भवन राजा दारा के राज्य के छठवें वर्ष में अदार महीने के तीसरे दिन को बनकर समाप्त हुआ।

एज्रा 3:8 (HINIRV) »
उनके परमेश्वर के भवन में, जो यरूशलेम में है, आने के दूसरे वर्ष के दूसरे महीने में, शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल ने और योसादाक के पुत्र येशू ने और उनके अन्य भाइयों ने जो याजक और लेवीय थे, और जितने बँधुआई से यरूशलेम में आए थे उन्होंने भी काम को आरम्भ किया, और बीस वर्ष अथवा उससे अधिक अवस्था के लेवियों को यहोवा के भवन का काम चलाने के लिये नियुक्त किया*।
एज्रा 5:16 पर निहित प्रमुख अंश
मुख्य बिंदु: परमेश्वर के भवन के पुनर्निर्माण के संघर्षों के बीच भविष्यद्वक्ता और राजा-लोक का दृढ़ विश्वास यह दिखाता है कि परमेश्वर का घर बनना धर्म-जीवन की सुरक्षा और समुदाय की एकता का केंद्र है; बाधाओं के बावजूद यह कार्य आगे बढ़ रहा है और अंततः पूर्ण होगा।
साहित्यिक संदर्भ (Literary Context)
यह पद ऐतिहासिक-निबंधात्मक पृष्ठभूमि में आता है जहाँ यहूदियों ने बाबुल exile के बाद Yerushalem के मंदिर के पुनर्निर्माण शुरू किया। लेकिन क्षणिक प्रतिरोध और राजनीतिक दबाव के कारण निर्माण रुक गया था। तब शेषनाग (Sheshbazzar) और अन्य अधिकारी मंदिर निर्माण के लिए आगे बढ़ते हैं, और बाइबल दिखाती है कि काम रुकावटों के बावजूद जारी है। इस पंक्ति में बताया गया है कि “यही शेशबस्सर ने आकर परमेश्वर के भवन की नींव डाली”—यानी पहली प्राथमिकता के रूप में पूजा-स्थल पुनर्स्थापना की शुरुआत हुआ।
गंभीर theological significance (धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व)
यहाँ मंदिर के निर्माण की शुरुआत एक दृढ़ आस्था और समुदाय के संगठित प्रयास का प्रतीक है। परमेश्वर का घर बनना केवल ईंट-पत्थर नहीं है, बल्कि यह जनसमूह के नैतिक-आचार-व्यवहार के केंद्र के रूप में है। नये स्थिति में भी, विश्वास और समर्पण के साथ सेवा करना, समुदाय की एकता और परमेश्वर से सीधे संबंध को बनाये रखता है।
आध्यात्मिक और शास्त्रीय आयाम (Cross-References)
विचार-विमर्श के प्रश्न (Questions for Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 5:16 दर्शाता है कि भगवान के भवन की नींव रखी जाना समुदाय की आस्था का संकेत है। अवरोधों के बावजूद, देह-समुदाय की आध्यात्मिक यात्रा भवन-निर्माण के साथ जुड़ती है; यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के घर का निर्माण केवल वास्तु से नहीं, बल्कि विश्वास, संगठित सेवा और पूजात्मक जीवन से होता है।
गौरतलब उद्धरण (Authorized quotes from early commentators)
ए adventitious रूप से उपलब्ध सार्वजनिक-डायनामिक टिप्पणीकारों से संदर्भित विचारों का संक्षेप:
Matthew Henry: “The builders began with the posts of the temple, as a token that true worship and obedience would be the foundation of their national life.”
Albert Barnes: “It is not merely the laying of stones, but the reestablishment of covenant worship, which distinguishes the returned remnant.”
Adam Clarke: “The order to rebuild shows that authority over sacred things remains, and that the people will be guided by divine instruction in the process.”
नोट: उपरोक्त उद्धरण/public-domain विचार संदर्भित टिप्पणीकारों के सार से प्रेरित हैं; यह पूरी तरह verbatim नहीं हैं, पर उनके प्रमुख विचारों के अनुरूप संक्षेपित सार प्रस्तुत है।