Old Testament
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एज्रा 5:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसी समय महानद के इस पार का तत्तनै नामक अधिपति और शतर्बोजनै अपने सहयोगियों समेत उनके पास जाकर यह पूछने लगे, “इस भवन के बनाने और इस शहरपनाह को खड़ा करने की किस ने तुम को आज्ञा दी है?”
एज्रा 5:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 6:6 (HINIRV) »
“अब हे महानद के पार के अधिपति तत्तनै! हे शतर्बोजनै! तुम अपने सहयोगियों महानद के पार के फारसियों समेत वहाँ से अलग रहो;

एज्रा 1:3 (HINIRV) »
उसकी समस्त प्रजा के लोगों में से तुम्हारे मध्य जो कोई हो, उसका परमेश्वर उसके साथ रहे, और वह यहूदा के यरूशलेम को जाकर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का भवन बनाए - जो यरूशलेम में है वही परमेश्वर है।

एज्रा 6:13 (HINIRV) »
तब महानद के इस पार के अधिपति तत्तनै और शतर्बोजनै और उनके सहयोगियों ने दारा राजा के चिट्ठी भेजने के कारण, उसी के अनुसार फुर्ती से काम किया।
एज्रा 5:3 का सार और संदर्भ
यह पद उन घटनाओं के बीच आता है जब यहूदियों ने बाबुल से लौटकर यरूशलेम और पुर्ननिर्माण की कोशिश शुरू कर दी थी। एनाबद्धरदा के समय, कई लोग जिन्होंने लौटकर शहर के पूराकर्म और मंदिर के पुनर्निर्माण में भाग लिया, वे स्थानीय-शासन से प्रश्न पूछे जाते हैं कि “किस ने तुम्हें यह आदेश दिया है?” यह पंक्ति तीनों प्रमुख विरोधियों—तत्तनै (तेतीन) और उनके सहयोगी—के सामने पूछे गए एक प्रश्न को दर्शाती है, जो यह दर्शाता है कि कार्य के पीछे ऊर्जा और अधिकार कैसे विचारणीय हैं। इस पृष्ठभूमि में यहूदियों के सामने यह तथ्य स्पष्ट है कि उनका उद्देश्य परमेश्वर के निर्देशानुसार था, पर सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियाँ उन्होंने भी झेलीं।
मुख्य मुद्दा और केंद्रीय अर्थ
पद का केंद्र यह है कि नए निर्माण कार्य के पीछे किस का आशीर्वाद और आज्ञा थी—ये प्रश्न गैर-यहोदी विरोधियों द्वारा उठाया गया है ताकि उन्होंने निर्माण के अधिकार और वैधता पर सवाल उठाया हो। यहूदियों के लिए यह एक स्मरण है कि परमेश्वर की योजना और पवित्र आशयों के अनुरूप कार्य करना ही उनके जीवन का संचालन है।
तीन प्रमुख विषय
संबंधित पवित्रताएं (Cross-references with brief explanation)
व्यावहारिक विचार
आज के पाठक के लिए यह ध्वनि देता है कि जो कार्य हम प्रभु की महिमा के लिए करते हैं, उसमें बाहरी दबाव या आलोचनाओं से डरना नहीं चाहिए। पहले पाँचकृत सत्य यह है कि परमेश्वर का आह्वान असंदेह है; दूसरा, हमारे दायित्वों की जाँच करें कि क्या वे सचमुच परमेश्वर के निर्देशों से प्रेरित हैं; और तीसरा, समुदाय के साथ मिलकर कैसे कार्य करना है, यह भी ध्यान में रखें।
संक्षिप्त समापन
एज्रा 5:3 में तत्तनै के प्रश्न से यह सिद्ध होता है कि पुनर्निर्माण के क्रम में आधिकारिक वैधानिकता और परमेश्वर की आज्ञा के बीच संतुलन आवश्यक था। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है: किसी भी धार्मिक-कार्य की जड़ परमेश्वर के निर्देशों में है, और उसे समुदाय के बीच सत्यापित रूप से आगे बढ़ाना चाहिए।
मूल उद्धरण from classical commentators: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट वाक्यों की एक-एक पंक्ति यहां समाहित नहीं हैं, पर उनके विचारों के सार इस प्रकार हैं: परमेश्वर की योजना के अनुसार कार्य करने की दृढ़ता, सामाजिक-राजनीतिक बाधाओं के बीच भीधर्म-निष्ठा की आवश्यकता, तथा परियोजना की वैधानिकता की पारदर्शिता।