Old Testament
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एज्रा 5:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परमेश्वर के भवन के जो सोने और चाँदी के पात्र नबूकदनेस्सर यरूशलेम के मन्दिर में से निकलवाकर बाबेल के मन्दिर में ले गया था, उनको राजा कुस्रू ने बाबेल के मन्दिर में से निकलवाकर शेशबस्सर नामक एक पुरुष को जिसे उसने अधिपति ठहरा दिया था, सौंप दिया।
एज्रा 5:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 5:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 6:5 (HINIRV) »
परमेश्वर के भवन के जो सोने और चाँदी के पात्र नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम के मन्दिर में से निकलवाकर बाबेल को पहुँचा दिए थे वह लौटाकर यरूशलेम के मन्दिर में अपने-अपने स्थान पर पहुँचाए जाएँ, और तू उन्हें परमेश्वर के भवन में रख देना।”

एज्रा 5:16 (HINIRV) »
तब उसी शेशबस्सर ने आकर परमेश्वर के भवन की जो यरूशलेम में है नींव डाली; और तब से अब तक यह बन रहा है, परन्तु अब तक नहीं बन पाया।'

प्रेरितों के काम 13:12 (HINIRV) »
तब हाकिम ने जो कुछ हुआ था, देखकर और प्रभु के उपदेश से चकित होकर विश्वास किया।
एज्रा 5:14 पर टिप्पणी: लौटती धरोहरें और परमेश्वर की योजना
मुख्य विचार: परमेश्वर के मंदिर के सोने-चाँदी के पात्रों को विदेश के मंदिरों में रखने की घटनाएँ इतिहास में एक निर्णायक चरण हैं—जब नबूकुदनेस्सर ने इज़राइलियों का कठोर दमन किया और बाइबल के अनुसार, कुस्रू के आदेश से देवदासीय स्मारकों की सत्ता बदली गई; पर इससे परमेश्वर का उद्देश्य स्थिर रहता है: लौटना, उद्धार और विश्वास के पुनर्निर्माण की तैयारी। एज्रा 5:14 में नज़र आता है कि बाबुल के मन्दिर से निकाले गए सुंदर पात्र अब फिर से एक योजना के अनुरूप नये स्थान पर पहुँचते हैं, ताकि यह क्रमिक पुनर्निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बन सके।
कथात्मक संदर्भ
एज्रा 1–6 के कालखंड में वापस जाने के प्रयास और यहूदियों के पुनर्निर्माण की तैयारी एक बार फिर स्पष्ट होती है। जब राजा कुस्रू ने यहूदियों को लौटने की अनुमति दी, तब उन्होंने मंदिर के वैभवशाली ठहरे पात्रों को बाबुल से बुलवाने की वार्ता और योजना के साथ आगे बढ़ाया। एज्रा 5:14 उसी क्रम का एक भाग है जिसमें मन्दिर की समस्त संपत्ति की सुरक्षा और वैयक्तिक-सम्पत्ति का सही क्रम बनाये रखने की चर्चा है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
इस वचन में दिख रहा है कि परमेश्वर की पवित्रता और उसका महत्त्व केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म-संस्थाओं के पुनर्निर्माण और व्यवहारिक आचरण से जुड़ा है। सोने-चाँदी के पात्रों का स्थानांतरण प्रत्यक्ष ऐतिहासिक घटना है, पर इसका नैतिक संदेश है: परमेश्वर की देह-स्थल और उसकी पूजा का पुनर्निर्माण दुनिया के सत्ता-संस्थान से ऊपर है; विश्वासियों को लौटना और सम्मानपूर्वक आराधना के स्थापित ढांचे को पुनर्जीवित करना है।
हिंदी के प्रसिद्ध निबंधों से संक्षेप निष्कर्ष
यहाँ कुछ प्रचलित पंक्तियाँ और उनसे प्रेरित विचार एक साथ संजोए जाते हैं, ताकि पाठक समझ सके कि कैसे इतिहासिक घटना एक सुदृढ़ आध्यात्मिक संदेश बनती है।
Matthew Henry के समानार्थी विचार: मंदिर-संरचना और पूजन-आचार को फिर से स्थापित करना परमेश्वर के उद्देश्य का अंग है; सत्ता-परिवर्तन भी ऐसे प्रयत्नों में एक साधन है, जिससे धार्मिक पुनर्गठन संभव हो।
Albert Barnes के अनुसार: इस घटना में यह दर्शाया गया है कि अधिकारी-प्रभुवर्ग के निर्णय भी परमेश्वर की योजना के अनुरूप चलते हैं, और यहूदियों की व्यवस्थित वापसी में एक ठोस संरचना प्रदान करते हैं।
Adam Clarke के उल्लेखित विचार: वस्तुओं की नयी जगह निर्धारित करना, पूजा-पद्धति और मंदिर-संरचना के पुनर्निर्माण के साथ जुड़ा है; यह दर्शाता है कि देवस्थान की पवित्रता के लिए क्रम और व्यवस्था आवश्यक है।
Cross-reference और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
इन संदर्भों से ज्ञात होता है कि सामाजिक-धार्मिक परिवर्तनें आंतरिक विश्वास और बाहरी व्यवस्था दोनों की पुनर्स्थापन पर केंद्रित रहते हैं।
प्रभाव और प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 5:14 एक स्मरण है कि परमेश्वर की योजना विश्वस्तर पर चलती है—कठिन समय और सत्ता परिवर्तन के बीच भी वह अपने चुने हुए लोगों को पुनः एक सूत्र में बाँधते हैं। मंदिर के पात्रों का पुनःस्थापना इस नयी शुरुआत की ओर संकेत है, जहां उद्धार और विश्वास का क्रम फिर से स्थापित होता है।