Old Testament
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एज्रा 6:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परमेश्वर के भवन के जो सोने और चाँदी के पात्र नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम के मन्दिर में से निकलवाकर बाबेल को पहुँचा दिए थे वह लौटाकर यरूशलेम के मन्दिर में अपने-अपने स्थान पर पहुँचाए जाएँ, और तू उन्हें परमेश्वर के भवन में रख देना।”
एज्रा 6:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 6:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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दानिय्येल 5:2 (HINIRV) »
दाखमधु पीते-पीते बेलशस्सर ने आज्ञा दी, कि सोने-चाँदी के जो पात्र मेरे पिता नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम के मन्दिर में से निकाले थे, उन्हें ले आओ कि राजा अपने प्रधानों, और रानियों और रखेलों समेत उनमें से पीए।

एज्रा 5:14 (HINIRV) »
परमेश्वर के भवन के जो सोने और चाँदी के पात्र नबूकदनेस्सर यरूशलेम के मन्दिर में से निकलवाकर बाबेल के मन्दिर में ले गया था, उनको राजा कुस्रू ने बाबेल के मन्दिर में से निकलवाकर शेशबस्सर नामक एक पुरुष को जिसे उसने अधिपति ठहरा दिया था, सौंप दिया।

2 राजाओं 25:14 (HINIRV) »
हाँडियों, फावड़ियों, चिमटों, धूपदानों और पीतल के सब पात्रों को भी जिनसे सेवा टहल होती थी, वे ले गए।
एज्रा 6:5 — प्राचीन वस्तुओं की वापसी और परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण का भाग
यह पद उस समय से जुड़ा है जब बाबेल के निर्वासन के बाद यरूशलेम के मंदिर का स्वरूप पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही थी। नबूक्द्नेसर द्वारा मंदिर से निकाले गए सोने-चाँदी के पात्रों को वापिस लाने और उनके उचित स्थान पर रखने की आज्ञा से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की पवित्रता और भव्यता के साथ-साथ उसकी व्यवस्था-स्थापना का पुनर्निर्माण भी एक साथ आगे बढ़ रहा है। इस दृश्य में बंधनों से मुक्त होकर ईश्वर की सेवा को पुनः व्यवस्थित करने की दृढ़ इच्छा पर बल दिया गया है।
हर पाठ का केंद्र: मंदिर के सौंदर्य और पावनता की पुनःस्थापना
कथा बताती है कि जब मन्दिर के बहाल करने के लिए दायित्व निर्धारित होते हैं, तब नबूकद्नेसर द्वारा वापस किए गए ऐतिहासिक आभूषणों को सही स्थान पर रखने की आज्ञा मिलती है। यह एक प्रकार की प्रतिबद्धता है कि परमेश्वर के भवन की महिमा किसी भी समय भुली नहीं जानी चाहिए, और यह कि दरबार की भक्ति में पुराने सम्मानित तत्व एक बार फिर उभरे और ठहर जाएँ।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- परमेश्वर के भवन के सामान को सुरक्षित और उचित स्थान पर रखना, यह संकेत देता है कि भक्ति और समर्पण का क्रम शुद्ध राखा गया है।
- प्रभु की सेवा में लौटना, वापस लौटे हुए ऊपरी वस्तुओं के साथ, यह दर्शाता है कि परमेश्वर की आवश्यकता और महिमा हर समय पहले आती है।
अनुकूलन और संदर्भ संबंध
यह उल्लेखनीय है कि अन्य कथा-पथ भी यह दिखाते हैं कि वे चीज़ें जो समर्पण के प्रतीक थीं, वे पुनः उपयोग के योग्य बनती हैं—मंदिर की व्यवस्था को स्थिर रखने के लिए।
कई साथ-प्रभु संदर्भ (cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि भव्यता केवल भौतिक धरोहर नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप जीवन-योजनाओं की पुनःस्थापना भी है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संरचना-सार
इस verse के साथ यह संदेश साफ दिखता है कि देव worship के साथ-साथ उसका वासतविक पद-स्थापना, संस्थापन और पवित्रता की पुनर्स्थापना आरंभ हो चुकी है। पुराने पदार्थों की वापसी से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के भवन की महिमा सदैव स्थिर रहे—सिर्फ संरचना नहीं, बल्कि विश्वास का क्रम भी मजबूत होता है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (उद्धृत पाठ)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्स के भीतर के सन्निकट विचारों के अनुसार, मंदिर-पूर्ति की व्यवस्था में पवित्रता और क्रम को बनाए रखना ही वास्तविक आध्यात्मिक अभ्यास है। नीचे संक्षेप में संदर्भित विचार शामिल हैं:
- Henry के अनुसार, पवित्र भवन में लौटने वाले प्यारे पदार्थों का स्थान ईश्वर के साथ संघ की पुष्टि है।
- Barnes इस क्रम को “आत्मिक स्मरण-आइटम” मानते हैं, जो कि परमेश्वर की सेवा के लिए आवश्यक समर्पण और सम्मान का संकेत है।
- Clarke यह दिखाते हैं कि भौतिक वस्तुओं की पुनःस्थापना से यह दृढ़ होता है कि घर-परिवार और समुदाय के लिए परमेश्वर के मंदिर की व्यवस्था कितनी महत्त्वपूर्ण है।
ये विचार क्रमशः इस verses के फूहड़ अर्थ को स्पर्श करते हैं: पवित्रता, क्रम और पुनःप्राप्ति का संयुक्त महत्व।