Old Testament
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एज्रा 6:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर पहले महीने के चौदहवें दिन को बँधुआई से आए हुए लोगों ने फसह माना।
एज्रा 6:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 6:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 12:6 (HINIRV) »
और इस महीने के चौदहवें दिन तक उसे रख छोड़ना, और उस दिन सूर्यास्त के समय इस्राएल की सारी मण्डली के लोग उसे बलि करें।

यहोशू 5:10 (HINIRV) »
सो इस्राएली गिलगाल में डेरे डाले रहे, और उन्होंने यरीहो के पास के अराबा में पूर्णमासी की संध्या के समय फसह माना।

2 इतिहास 30:1 (HINIRV) »
फिर हिजकिय्याह ने सारे इस्राएल और यहूदा में कहला भेजा, और एप्रैम और मनश्शे के पास इस आशय के पत्र लिख भेजे, कि तुम यरूशलेम को यहोवा के भवन में इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिये फसह मनाने को आओ।
एज्रा 6:19 का तत्काल पृथक् संदर्भ
फिर पहले महीने के चौदहवें दिन को बँधुआई से आए हुए लोगों ने फसह माना। यह घटना Ezra 6 के क्रम के भीतर उत्तर-धर्मग्रंथ के साथ पुनर्निर्माण और धार्मिक जीवन की पुनरस्थापना का भाग है। बंधुआई से लौटने के बाद यह पहला बड़ा धार्मिक अवसर था जिसमें यहूदियों ने ईश्वर के निर्देशानुसार फसह का उत्सव मनाया।
ईश्वर और विश्वास के प्रति टेक
यह वाक्य दर्शाता है कि ईश्वर के सामने समुदाय का समर्पण भरोसे और विधिप्रणाली के साथ ही संभव है। फसह मनाने का कारण सिर्फ इतिहास की सम्झना नहीं, बल्कि ईश्वर की दया, उद्धार और चपल-जीवन में उनके-radius-नियम का मानना था। यहूदियों ने पुनर्संयोजन के समय भी पवित्र विधान के अनुसार आचरण किया, जो यह संकेत देता है कि विश्वास का जीवन निरंतर अनुशासन और ईश्वर-नियमत पालन में बनता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छविों की स्पष्टता
संबंधित शास्त्र संदर्भ
जो संदर्भ इस पाठ से सम्बन्धित हैं, वे वर्तमान संदर्भ में फसह के महत्व और लौटे हुए समुदाय की धार्मिक पुनर्स्थापना को समझाते हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि फसह केवल स्मृति नहीं, बल्कि ईश्वर की नयी करार-जीवन में भागीदारी है, और लौटे हुए लोग इस आह्वान को मानकर आध्यात्मिक जीवन की नई दिशा पकड़ते हैं।
पूर्व-अनुमोदन से आधुनिक अनुप्रयोग
अभी के समय में भी ईश्वर के उद्धार योजनाओं के साथ हमारी व्यक्तिगत आस्था और सामूहिक समुदाय की पवित्रजीवन-निर्माण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इस वचन से हमें यह सीख मिलती है कि धैर्यपूर्वक लौटना, विश्वास के नियमों को मानना और समुदाय के साथ रीत्या-यज्ञ करना ईश्वर के साथ दृढ़ संपर्क बनाए रखने का तरीका है। यदि हम अपने जीवन के नये चरण में ईश्वर के निर्देशों को स्वीकार कर, नैतिकता और करुणा के साथ व्यवहार करें, तो हमारी रिहाई और आशीष के रास्ते साफ होते हैं।
एक संक्षिप्त एकीकृत सार
फसह के चिह्न के साथ लौटे हुए लोगों ने पहले महीने के चौदहवें दिन ईश्वर की कसमें पूरी कर फसह मनाया—यह आस्था, अनुशासन और समुदायिक पुनर्संयोजन का सम्मिश्रण है। यह पाठ सिखाता है कि उद्धार के अनुभव के साथ विश्वास के नियमों का पालन जीवन को नया आकाश देता है, और पुराने बंधनों से मुक्ति मिलने पर भी पवित्रता के मार्ग पर सक्रिय हिस्सेदारी आवश्यक है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (संकेतित पंक्तियाँ): Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समानानुपात विचारों से, मूल संदेश यही है कि ईश्वर की रक्षा और उद्धार के साथ साथ धार्मिक व्यवस्था का पालन, समुदाय के लिए नई शुरुआत का मार्ग खोलता है।