Old Testament
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एज्रा 6:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“राजा कुस्रू के पहले वर्ष में उसी कुस्रू राजा ने यह आज्ञा दी, कि परमेश्वर के भवन के विषय जो यरूशलेम में है, अर्थात् वह भवन जिसमें बलिदान किए जाते थे, वह बनाया जाए और उसकी नींव दृढ़ता से डाली जाए, उसकी ऊँचाई और चौड़ाई साठ-साठ हाथ की हो;
एज्रा 6:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 6:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 इतिहास 36:22 (HINIRV) »
फारस के राजा कुस्रू के पहले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को उभारा कि जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था, वह पूरा हो। इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया, और इस आशय की चिट्ठियाँ लिखवाई:

प्रकाशितवाक्य 21:16 (HINIRV) »
वह नगर वर्गाकार बसा हुआ था और उसकी लम्बाई, चौड़ाई के बराबर थी, और उसने उस गज से नगर को नापा, तो साढ़े सात सौ कोस का निकला: उसकी लम्बाई, और चौड़ाई, और ऊँचाई बराबर थी।

व्यवस्थाविवरण 12:11 (HINIRV) »
और तुम निडर रहने पाओ, तब जो स्थान तुम्हारा परमेश्वर यहोवा अपने नाम का निवास ठहराने के लिये चुन ले उसी में तुम अपने होमबलि, और मेलबलि, और दशमांश, और उठाई हुई भेटें, और मन्नतों की सब उत्तम-उत्तम वस्तुएँ जो तुम यहोवा के लिये संकल्प करोगे, अर्थात् जितनी वस्तुओं की आज्ञा मैं तुमको सुनाता हूँ उन सभी को वहीं ले जाया करना।
एज्रा 6:3 — तत्कालिक संदर्भ और संदेश
हमारे पाठ में राजा कुस्रू के शासनकाल के पहले वर्ष की बात आई है, जब एतिहासिक स्मारकों के पुनर्निर्माण की योजना पुनर्जीवित हुई। यहां कुस्रू ने निर्देश दिए कि परमेश्वर के भवन, जो यरूशलेम में है, उसे बनाकर उसकी नींव डाली जाए। उसके अनुसार भवन की ऊँचाई-चौड़ाई भी ठहराई गई: साठ हाथ की गहराई-चौड़ाई। यह आदेश मंदिर के मानक और स्थायित्व को महत्त्व देता है, ताकि परमेश्वर के घर का दृश्य और संरचनात्मक महत्त्व दोनों स्पष्ट रहे।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ सेleit
इस verse में ईश्वर के प्रति कुस्रू की नीति और परमेश्वर के भवन के लिए सरकार का समर्थन दिखता है। यह दर्शाता है कि ईश्वर के विषय के लिए एक संरचना और योजना आवश्यक है—उचित उद्देश्य के साथ एक व्यवस्थित उन्नयन और धार्मिक जीवन के लिए स्थिर आधार। यह विश्वास की दृढ़ता की मांग नहीं करती, बल्कि स्पष्ट निर्देशों के साथ चलने का आह्वान करती है ताकि पूजा एक सुव्यवस्थित और सम्मानजनक रूप ले सके।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
• भवन: यहाँ "परमेश्वर के भवन" से आस्था की सार्वजनिक अभिव्यक्ति मानी जाती है—यानी वह स्थान जहाँ लोग परमेश्वर के साथ जुड़ते और बलिदान देते थे।
• नींव दृढ़ता से डाली जाए: एक दृढ़ संरचना का प्रतीक के रूप में यह बताती है कि भक्ति और व्यवस्था दोनों को ठोस आधार चाहिए।
संबंधित पवित्र पाठ
• हिब्रियों के मंदिर निर्माण से जुड़ी अन्य प्रेरक घटनाएँ—हर बार जब परमेश्वर के घर की योजना बनती है, वह व्यवस्था और शासन के साथ संतुलन बनाती है।
• प्रेरितों के काल में भी चर्च-निर्माण और संगठन के बारे में निर्देश मिलते हैं, कि कैसे विश्वास समुदाय के लिए संरचना और प्रेरणा साथ-साथ चलें।
• पुराने नियम के समय की पूजा-स्थलों के रख-रखाव से कुछ दृश्य समानताएँ दिखती हैं कि पूजा स्थिरता और क्रम मांगती है।
वर्तमान-जीवन में अनुप्रयोग
2-3 cross-references और उनका संक्षिप्त जोڑ
• एक सार्वजनिक पूजा-स्थल के महत्व पर जोर देती अन्य आयतें: ऐसा स्थान जहाँ लोग परमेश्वर के सामने एकरूपता से आकर उनकी महत्ता को मन-मानस से स्वीकार करते हैं।
• पाठ के चरित्र से जुड़ी प्रेरणा: व्यवस्थित निर्मिति और निर्देशों के पालन से समुदाय में एकता और सम्मान बढ़ता है।
संक्षेप निष्कर्ष
एज्रा 6:3 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के भवन के निर्माण के लिए ठोस नींव और स्पष्ट माप-निर्देश आवश्यक हैं। यह एक ऐसी व्यवस्था की ओर संकेत है जिसमें पूजा, शासन और समुदाय एक साथ आगे बढ़ते हैं—ताकि परमेश्वर का नाम महिमा पाए और उसका घर वास्तविक रूप से समिति के जीवन का केंद्र बने।
उद्धृत उल्लेख (यदि उपलब्ध हो): Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समानांतर विचारों के छोटे उद्धरण आवश्यक होने पर, हमारे पाठ में वे इस संदेश को ऐसी शब्दावली में संभालते हैं जो उद्देश्यपूर्ण है।