Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 6:4 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 6:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसमें तीन रद्दे भारी-भारी पत्थरों के हों, और एक परत नई लकड़ी की हो; और इनकी लागत राजभवन में से दी जाए*।
एज्रा 6:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एज्रा 6:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 6:36 (HINIRV) »
उसने भीतरवाले आँगन के घेरे को गढ़े हुए पत्थरों के तीन रद्दे, और एक परत देवदार की कड़ियाँ लगाकर बनाया।

एज्रा 7:20 (HINIRV) »
इनसे अधिक जो कुछ तुझे अपने परमेश्वर के भवन के लिये आवश्यक जानकर देना पड़े, वह राज खजाने में से दे देना।

एज्रा 6:4 का संदर्भ और भावार्थ
यहोवा के templo के पुनर्निर्माण के क्रम में यहादेश हम देखते हैं कि राजा दाश्ते-भरने वाले कार्यों के लिए नियोजन और वित्तीय व्यवस्था कैसे चलती है। इस Verse में तीन रद्दे भारी पत्थर और एक परत नई लकड़ी दी जाने की व्यवस्था बताई गई है, ताकि भवन निर्माण के लिए राजभवन से लागत मिल सके। यह कदम यह दर्शाता है कि परमेश्वर के घर का पुनःस्थापना साम्राज्य के साधनों से नहीं, बल्कि राज्यीय प्रावधानों और निष्पक्ष स्रोतों से संचालित होता है, जिससे निर्माण ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ पूरा हो सके।
केंद्रीय अर्थ
कथन कहता है कि temple के लिए आवश्यक सामग्री– भारी पत्थर और नई लकड़ी– राजभवन से लागत के साथ उपलब्ध कराई जाए। यह स्पष्ट करता है कि एक चुस्त, विधिपरक योजना के साथ पवित्र कार्य को संसारिक संसाधनों से समर्थित किया गया; न तो कोई व्यक्तिगत लाभ, न ही छल-छीछोरी, बल्कि सार्वजनिक कारण के लिए धन खर्च किया गया।
मुख्य थीम
अनुकरणीय cross-references (संक्षेप में)
- हथा-पुराने नियम में धार्मिक भवनों के निर्माण के लिए राज्यीय सहयोग का उल्लेख मिलता है, जो पवित्र कार्य के लिए संसाधनों के उचित आवंटन को दर्शाता है।
- एक अन्य संदर्भ में वस्तुएं और सामग्री एकत्र करने की प्रक्रिया स्पष्ट होती है कि कौन से स्रोत पवित्र कार्य के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
- परमेश्वर के मंदिर की महत्ता और सामर्थ्य के अनुसार, समाज के हर वर्ग की भागीदारी पवित्र कार्य के लिए आवश्यक मानी जाती है।
प्रत्येक संदर्भ से जुड़ाव
- इस verse के साथ जुड़कर आप देखेंगे कि कैसे प्रबंधित ढंग से संसाधन जुटाने से उत्साह बढ़ता है और परियोजना सम्पूर्णता के साथ आगे बढ़ती है।
व्यावहारिक विचार
यह देखने की प्रेरणा देती है कि पवित्र उद्देश्य के लिए संसाधन कितनी पारदर्शिता और सुनियोजित तरीके से चाहिए होते हैं। यदि आप किसी बड़ी परियोजना पर काम कर रहे हों, तो स्पष्ट लागत-निर्धारण, उचित स्रोत और सार्वजनिक जवाबदेही बनाए रखना चाहिए।
संक्षिप्त समापन
एज्रा 6:4 यह बताता है कि परमेश्वर के मंदिर की मरम्मत और पुनःनिर्माण एक संगठित, पारदर्शी वित्तीय योजना पर निर्भर है, जिसमें राजकीय सहयोग और पवित्र उद्देश्य एक साथ आते हैं। इसका संदेश है: विधिपरक संरचना और निष्पक्ष वितरण से ही महान कार्य सफल होते हैं।
मैथ्यू हेनरी, एडम क्लार्क आदि से संकलित संक्षेपण
यहाँ संदेह मुक्त रूप में प्रसिद्ध विद्याओं के विचारों का समेकन यह बताता है कि temple के निर्माण के लिए प्रयुक्त सामग्री और धन का निष्पक्ष, समाज-समायोजित स्रोत जरूरी है। अगर आप किसी अनुभाग-विशिष्ट उद्धरण का उल्लेख चाहते हैं, तो नीचे इतिहास-उद्धरणों का उल्लेख करते समय केवल सार-भाव निकलेंगे।
उद्धृत अंश (जहाँ उपलब्ध): "God's house must be funded in a way that honors Him and serves the common good" जैसी सन्निहित धारणा प्रस्तुत करने वाले महंत-वार्तालाप के अनुरूप - यह स्पष्ट है कि व्यवस्था-निष्ठा और सार्वजनिक योगदान पवित्र कार्य की सफलता के लिए अनिवार्य है।