भजन संहिता 68:29 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तेरे मन्दिर के कारण जो यरूशलेम में हैं, राजा तेरे लिये भेंट ले आएँगे।

भजन संहिता 68:29 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 68:29 का नवजीवन पाठ

तुरंत संदर्भ-स्थिति: यह पद भजनकार का परमेश्वर के राज्य-व्यवस्था में इधर-उधर चलते सैनिक और भक्त राजाओं के मेल-जोल की तस्वीर देता है। यरूशलेम के मंदिर की महिमा और देवताको सम्मान का दृश्य, जहाँ राज्य-यात्रा और भेंट-समर्पण एक साथ जुड़ते हैं, इस पंक्ति के भीतर मुखरित होता है।

इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो विवरण निकलते हैं

यह उद्धृत करता है कि परमेश्वर का घर, भेंट-समर्पण और राजा-शासन, एक एकीकृत चक्र बनाते हैं—जहाँ भूमि की भक्ति और राष्ट्र की पवित्रता एकता से जुड़ती हैं। मंदिर के कारण—यानी यरूशलेम की पवित्रता—से राजा और शक्तिशाली भी पुष्टि और सम्मान देकर आते हैं। सहज अर्थ यह है कि परमेश्वर के अवतरण-स्थल से आशीष और सुरक्षा का प्रवाह पूरे राष्ट्र में फैला रहता है।

अर्थपूर्ण शब्दों या imagery की स्पष्टता

  • : मंदिर-स्थल, देव-आबन्धन, आराधना का केन्द्र; यह यह दर्शाता है कि परमेश्वर की उपस्थिति एक सामाजिक-राजनीतिक आश्वासन है।
  • : शक्तिशाली और प्रभावशाली लोग भी पवित्रता के सम्मान में दान और सम्मान लेकर आते हैं — एक संदिग्ध-युग के विरुद्ध, आशीर्वाद का सार्वजनिक प्रदर्शन।

संबद्ध आयतें (cross-references) और उनसे संक्षिप्त संबंध

1) भजन 132:9-10: मंदिर की पवित्रता और परमेश्वर की उपस्थिति की मान्यता—यही प्रेरणा इस पाठ के पीछे है।

2) भजन 110:1-2: प्रभु के राज्य की स्थापना और राजाओं के आशीर्वाद—प्रभु की सत्ता से संबद्धता का संकेत।

3) 2 सामुएल 7:16: दाऊद के घराने के लिए परमेश्वर की कृपा और दीर्घकाळ सेवा की युक्ति—राजाओं की भेंट-समर्पण के साथ एकात्मता।

ये संदर्भ दिखाते हैं कि ईश्वर की उपस्थिति और राज-शासन का मेल कैसे राष्ट्र-स्तर पर आशीष और सामाजिक व्यवस्था को उन्नत करता है।

आज के संदर्भ में प्रायोगिक आवेदन

- हमारी सार्वजनिक जीवनशैली में मंदिर-विहित आस्था का सम्मान—चाहे घर-परिवार हो या समुदाय, ईश्वर की नम्रता के साथ कार्य करने का आह्वान।

- राजसत्ता और समाज-नेतृत्व के लिए नैतिक-विकटदायित्व: प्रभु-आदर्शों के अनुरूप दान, निष्ठा और सेवा।

- हर दिन के प्रयासों में परमेश्वर की उपस्थिति को केंद्र में रखना—प्रभु के आश्वासन से प्रेरित होकर समुदायिक-संरचना को समृद्ध करना।

सूक्ष्म टिप्पणी — महँ और क्लार्क के संकेत

यह दृश्य महाख्यम और क्लार्क के विचारों के अनुरूप एक सामूहिक श्रद्धा-आयोजन को दर्शाता है जहां मंदिर उपस्थिति और राज्य-आशीष एक पवित्र चक्र बनाते हैं (सार रूप से: मंदिर-आस्था से राष्ट्र-आशीष तक का मार्ग)।

संक्षिप्त एकीकृत व्याख्या

भजनकार यह दिखाता है कि परमेश्वर की पवित्रता, मंदिर-आस्था, और राज-शासन एक एकीकृत लय में चलते हैं। यह प्रवृत्ति बताती है कि ईश्वर के घर का सम्मान कैसे राष्ट्र के भीतर आशीर्वाद, सुरक्षा और समुदाय-निर्माण को मजबूत करता है। राजा-भेंट से यह संकेत मिलता है कि सत्ता और पूजा एक दूसरे के पूरक हैं—न कि विरोधी।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 68:29 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने राजा को एक सौ बीस किक्कार सोना, बहुत सा सुगन्ध-द्रव्य, और मणि दिया; जितना सुगन्ध-द्रव्य शेबा की रानी ने राजा सुलैमान को दिया, उतना फिर कभी नहीं आया।

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अपने परमेश्‍वर यहोवा की मन्नत मानो, और पूरी भी करो; वह जो भय के योग्य है*, उसके आस-पास के सब उसके लिये भेंट ले आएँ।

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फिर मेरा मन अपने परमेश्‍वर के भवन में लगा है, इस कारण जो कुछ मैंने पवित्र भवन के लिये इकट्ठा किया है, उस सबसे अधिक मैं अपना निज धन भी जो सोना चाँदी के रूप में मेरे पास है, अपने परमेश्‍वर के भवन के लिये दे देता हूँ*।

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