1 इतिहास 29:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर मेरा मन अपने परमेश्‍वर के भवन में लगा है, इस कारण जो कुछ मैंने पवित्र भवन के लिये इकट्ठा किया है, उस सबसे अधिक मैं अपना निज धन भी जो सोना चाँदी के रूप में मेरे पास है, अपने परमेश्‍वर के भवन के लिये दे देता हूँ*।

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1 इतिहास 29:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य विचार

यह पद बताता है कि दाऊद का मन परमेश्वर के भवन—यानी मंदिर—के निर्माण के लिए संकल्पित है और वह अपनी संपत्ति में से जितना संभव हो सके सब कुछ उसे अर्पित कर देता है। यह उसकी गहरी भक्ति, सामर्थ्य और निष्ठा का प्रमाण है; वह अपनी निजी वैभव और संसाधनों को भी परमेश्वर के कार्य के लिए दे रहा है, यह दर्शाता है कि परमेश्वर के उद्देश्य को अपनी योजनाओं से ऊपर माना जाना चाहिए।

साहित्यिक संदर्भ

यह वाक्य इतिहास-पूर्व की वह कथा पूरी करता है जहाँ दाऊद ने राज्य के उन्नयन और केन्द्रीय मंदिर की योजना की आधारशिला रखी है। अध्याय 29 के बीच दृश्यों में, लोग दाऊद की प्रेरणा से प्रेरित होकर सामुदायिक दान करते हैं। दाऊद का उद्घोष एक प्रेरक उदाहरण है कि धार्मिक परियोजनाओं के लिए आत्म-स्वार्थ छोड़कर सहयोग करना चाहिए।

धर्मशास्त्रीय महत्व

  • विश्वास की पुष्टि: दाऊद अपने धन के साथ अपनी आस्था को भी अर्पित करता है—धन और विश्वास एक साथ दिखते हैं।
  • समुदायिक नेतृत्व का मॉडल: राजा के रूप में धन-बुद्धि के साथ जोकर नहीं, बल्कि भक्तिभाव से योगदान देना—एक दृढ़ समर्पण।
  • देह-प्रकृति बनाम आध्यात्मिक कार्य: व्यक्तिगत संपत्ति का त्याग मंदिर सेवा के लिए पहले स्थान पर रखा गया है, यह मूल्य-विकास को दर्शाता है।

पवित्रशास्त्रीय कड़ियाँ और उनके अर्थ

1) संदर्भ: परमेश्वर के भवन के लिए दान का सिद्धांत—यह मंदिर की केंद्रीयता और परमेश्वर-प्रतिष्ठा के लिए वित्तीय योगदान की कीमत बताता है।

2) संदर्भ: सामर्थ्य के साथ आस्था का मिश्रण—दाऊद ने अपनी धन-संपत्ति को कार्य में डालकर दिखाया कि आस्था बिना व्यवहार के अधूरी रहती है।

अन्वय और क्रॉस-रेफरेंसेस

  • 2 समुुएल 7:18-22—राजा की भक्ति और परमेश्वर के साथ गहरा संबंध स्थापित होता है; धन का अर्पण आशीर्वाद के साथ जुड़ता है।
  • 1 इतिहास 28:9—समझदारी से परमेश्वर को खोजना और उसके मार्ग पर चलना; मंदिर निर्माण की योजनाओं में दाऊद का योगदान एक भागीदारी का नमूना है।
  • 2 क्रांतियाँ 8:18—उत्तम ध्येय के लिए संसाधन समर्पण का वातावरण बनता है; सामुदायिक योगदान से सेवा गहरी होती है।

इन संदर्भों में प्रत्येक पाठ यह दिखाता है कि पदार्थ के साथ आस्था भी प्रभावित होनी चाहिए और परमेश्वर के उद्देश्य के लिए बलिदान एक पवित्र प्रक्रिया है।

विचार-परमुख प्रश्न

  • हम अपने संसाधनों को किस दृष्टि से देखते हैं—परमेश्वर के भवन के लिए या अपनी निजी योजनाओं के लिए?
  • क्या हमारा योगदान भक्ति के साथ, निष्ठा और सेवावृति के साथ निकलता है?
  • किन्हीं ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ हम अपनी संपत्ति या समय के हिस्से को परमेश्वर के कार्य में लगा सकते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

1 इतिहास 29:3 में दाऊद का मन परमेश्वर के भवन के निर्माण में लगा हुआ है और वह अपने निज धन को भी समर्पित कर देता है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि वास्तविक भक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उत्साह और समर्पण के साथ कृत्यों में भी प्रकट होती है। जब हम परमेश्वर के उद्देश्य को अपनी प्राकृतिक संपत्ति से ऊपर मानते हैं, तब वह कार्य बृहत्तर के लिए संभव बन पाते हैं और समुदाय में आत्मिक उत्साह बढ़ता है।

एग्ज़ाम्पल्स/पूर्व-पाठ-उद्धरण (सूत्र-वाक्य)

मथ्यू Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेइन टिप्पणीकारों के अनुसार, दाऊद का यह बलिदान एक प्रेरणा देता है कि राजा-प्रभुवर्ग भी परमेश्वर की महिमा में अपनी संपत्ति का योगदान करें, ताकि मंदिर—या ईश्वर-कार्य—का उद्देश्य सफल हो सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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और गिनती से बाहर देवदार के पेड़ इकट्ठे किए; क्योंकि सीदोन और सोर के लोग दाऊद के पास बहुत से देवदार के पेड़ लाए थे।

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सुन, मैंने अपने क्लेश के समय यहोवा के भवन के लिये एक लाख किक्कार सोना, और दस लाख किक्कार चाँदी, और पीतल और लोहा इतना इकट्ठा किया है, कि बहुतायत के कारण तौल से बाहर है; और लकड़ी और पत्थर मैंने इकट्ठे किए हैं, और तू उनको बढ़ा सकेगा।

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