Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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1 इतिहास 29:13 (HINIRV) – आसपास का संदर्भ और टिप्पणी
यह वाक्य दिव्यस्तुति के एक क्षण का हिस्सा है, जहां राजा दाऊद ने राजा-स्वर्ग के सामने सब कुछ देकर परमेश्वर की महानता के कारण उनके नाम की स्तुति की। यह संदर्भ उनके सामुदायिक दान-समारोह के समय आता है, जब लोग अपने खजाने और संसाधनों को परमेश्वर के लिए समर्पित कर रहे थे। इस पंक्ति में दाऊद अपने सभी प्रजा के साथ एकात्म भाव से परमेश्वर का आभार व्यक्त करते हैं और उनके महिमामय नाम की स्तुति करते हैं।
इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या परिलक्षित होता है
यह उद्धरण स्पष्ट करता है कि विश्वास एक जीवित, प्रतिक्रिया-उन्मुख रिश्ता है—जो मन से किया गया आभार और स्तुति से प्रकट होता है। परमेश्वर के प्रति आभार व्यक्त करना केवल व्यक्तिगत राहत के लिए नहीं, बल्कि समुदाय के साथ उसकी महिमा के उद्देश्य से किया जाता है। परमेश्वर के महिमायुक्त नाम की स्तुति, उसकी त्रुटिहीन पवित्रता और सामर्थ्य की मान्यता को दर्शाती है।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की सरल स्पष्टता
संकेतित अन्य आयतें (क्रॉस-रेफरेंस)
एकात्मता हेतु निम्न आयतें संगत संकेत देती हैं:
इन क्रॉस-रेफरेंस से यह समझ आता है कि भगवान के नाम की महिमा मानव आस्था और समुदायिक समर्पण के केंद्र में है।
वर्तमान-जीवन में उपयोग
आज के विश्वासियों के लिए यह वाक्य प्रेरित करता है कि हर प्रकार के आभार को एक सामूहिक और श्रद्धायुक्त स्वभाव से व्यक्त किया जाए। अपने कर्तव्य, संसाधन, और अवसरों को परमेश्वर के लिए समर्पण करते समय, हम उसकी महिमा पर केन्द्रित रहें। स्तुति और धन्यवाद— - व्यक्तिगत प्रार्थना में गहराई से उतरें, - परिवार और समाज के साथ मिलकर परमेश्वर की महानता को उजागर करें, - विश्वसनीय ढंग से अपने जीवन को उसकी पवित्रता के अनुरूप ढालें।
एजेंसी टिप्पणी (एक unified सार)
यह वाक्य दाऊद और उसके नेताओं की आस्था के साथ एक विनम्र समर्पण का चित्रण करता है: परमेश्वर की महिमायुक्त नाम के सामने सब कुछ छोटा पड़ जाता है। यह बताता है कि ईश्वर के साथ सम्बन्ध केवल विश्वास की घोषणा नहीं, बल्कि संकेत—कर्म, दान-समर्पण और जीवन के दैनिक आचरण में—स्तुति के द्वारा स्पष्ट होता है।
संक्षेपित संदर्भ-आउटकम
- परमेश्वर के नाम की स्तुति आभार के साथ जुड़ी है।
- समूह-उत्साह से परमेश्वर की महिमा प्रकट होती है।
- आज के विश्वासियों के लिए आभार एवं समर्पण का आह्वान स्पष्ट है।
नोट: इस पंक्ति पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरण नीचे-मंज़ूर exactly उद्धृत नहीं हैं, पर उनके विचारों के आधारं पर समेकित सार प्रस्तुत किया गया है।