Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 इतिहास 1 1 इतिहास 2 1 इतिहास 3 1 इतिहास 4 1 इतिहास 5 1 इतिहास 6 1 इतिहास 7 1 इतिहास 8 1 इतिहास 9 1 इतिहास 10 1 इतिहास 11 1 इतिहास 12 1 इतिहास 13 1 इतिहास 14 1 इतिहास 15 1 इतिहास 16 1 इतिहास 17 1 इतिहास 18 1 इतिहास 19 1 इतिहास 20 1 इतिहास 21 1 इतिहास 22 1 इतिहास 23 1 इतिहास 24 1 इतिहास 25 1 इतिहास 26 1 इतिहास 27 1 इतिहास 28 1 इतिहास 29Verse
1 इतिहास 29:1 1 इतिहास 29:2 1 इतिहास 29:3 1 इतिहास 29:4 1 इतिहास 29:5 1 इतिहास 29:6 1 इतिहास 29:7 1 इतिहास 29:8 1 इतिहास 29:9 1 इतिहास 29:10 1 इतिहास 29:11 1 इतिहास 29:12 1 इतिहास 29:13 1 इतिहास 29:14 1 इतिहास 29:15 1 इतिहास 29:16 1 इतिहास 29:17 1 इतिहास 29:18 1 इतिहास 29:19 1 इतिहास 29:20 1 इतिहास 29:21 1 इतिहास 29:22 1 इतिहास 29:23 1 इतिहास 29:24 1 इतिहास 29:25 1 इतिहास 29:26 1 इतिहास 29:27 1 इतिहास 29:28 1 इतिहास 29:29 1 इतिहास 29:30



पद का तात्पर्य और उसका takim सेटिंग (Immediate Setting)
यह पद अभिलेखीय पृष्ठभूमि में है जहाँ परमेश्वर ने दाऊद से उसके शासनकाल तथा उसकी उपलब्धियों का वृत्तान्त लिखवाने के लिए निर्देश दिया है। 1 इतिहास 29:30 में शम्भर-उद्धृत पुस्तकों के संदर्भ से संकेत मिलता है कि शमूएल दर्शी, नातान नबी और गाद दर्शी की पुस्तकों में इस्राएल के राज्य-यात्रा, पराक्रम और देश-देश के राज्यों के वैभव का विस्तृत लेखा-जोखा दर्ज है। यह सन्देश एक समाज-इतिहास का संकलन है जो परमेश्वर की योजना के भीतर राष्ट्र के इतिहास को संरक्षित करता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
यह प्रवचन दर्शाता है कि परमेश्वर इतिहास के कर्ता-धर्ता हैं और राजा के राजकीय इतिहास भी उनका लेखा-जोखा बनते हैं। दाऊद का निर्देश है कि जो कुछ भी हुआ, वह प्रभु की योजना और उद्धार-कार्य के प्रमाण रूप में वर्णित होना चाहिए। इससे यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर न केवल घटनाओं को संचालित करते हैं बल्कि उन घटनाओं का उद्देश्य भी रचते हैं—ताकि लोग यह समझ सकें कि सत्ता, युद्ध-पराक्रम और राज्य-योजनाएं ईश्वर के अधीन हैं। भगवान का ऐतबार है कि उनके लोगों का जीवन और उनकी उपलब्धियाँ उनके नाम के लिए होनी चाहिए।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्ट व्याख्या
संबद्ध प्रसंग (Cross-references) – छोटे निष्कर्ष
- 2 इतिहास 1–9 अध्यायों में दाऊद के शासन के विस्तार-क्रम और व्यवस्था-प्रिय योजनाओं का सार मिलता है, जो स्थानीय और विश्वव्यापी संदर्भ में परमेश्वर के राज को दर्शाते हैं।
- नीतिवचन 21:1 में कहा गया है कि “राज्यों के मन्त्रिमण्डलों का निर्णय परमेश्वर के हाथ में है”—यह इस पाठ के दर्शन से समर्थित है कि सत्ता ईश्वर के कॉन्ट्रोल में है।
- दानיאל 2:20–22 के आशीर्वाद से जुड़ा विचार कि परमेश्वर कटिबद्ध रूप से इतिहास-घटनों को क्रमबद्ध करता है, ताकि उसके नाम की महिमा बनी रहे।
अतीत से वर्तमान तक: आज के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
- स्मरण रखें कि हमारे जीवन की बड़ी घटनाएँ भी परमेश्वर की योजना के भाग हो सकती हैं। परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, विश्वास यही सिखाता है कि हम विनम्रता और आज्ञा-पालन के साथ ईश्वर के उद्देश्य को मानें।
- अपनी सामर्थ्य और कठिनाइयों में भी हम यह स्मरण रखें कि सत्ता और सफलता से बढ़कर ईश्वर के उद्देश्य हैं; इसलिए हम अपने प्रयत्नों को उसके नाम के लिए समर्पित करें।
संयुक्त सारांश: यह पद एक गूढ़ ऐतिहासिक रिकॉर्ड की आवश्यकता को बताता है कि शासन-यात्राओं, राज्य-पराक्रम और विविध देशों के इतिहास का समेकित वर्णन परमेश्वर की योजना के प्रकाश में रखना चाहिए। शमूएल दर्शी, नातान नबी और गाद दर्शी की पुस्तकों में यह विवरण है, ताकि परमेश्वर की महिमा और उसकी सत्कार-योजना स्पष्ट रहे।
उद्धरण-नियम: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उपलब्ध प्रतिलिपि-उद्धरण अगर मिलें, उन्हें नीचे दिये गए स्पष्ट उद्धरण-रेखाओं में रखा गया है: “…”