Old Testament
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पद–पद संदर्भ का परिवेश
1 इतिहास 29:11 में दाऊद राजा के पुत्रों के सामने ये शब्द आते हैं जब वह ईश्वर के लिए उत्सव मना रहा है, और अपने सिंहासन के लिए आवश्यक दान-समर्पण को सम्हाल रहा है। वह सभा-सम्भाषण में ईश्वर को महिमा देता है और यह प्रकट करता है कि सरकार, वैभव और मजबूत शक्ति सभी उसी से हैं। यह अंश नीतिवचन नहीं, बल्कि एक दूल्हे-राजा की माथा टेक कर द attestation है कि परमेश्वर ही सत्ता का आधार है।
ईश्वर के स्वरूप तथा विश्वास का उद्घाटन
यह टेक्स्ट स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के लिए महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव आदर और सत्ता की पूरी सीमाओं में उसका अधिकारी है। आकाश और पृथ्वी उसी की शासन-सीमा का द्योतक हैं; जहाँ संसार की सारी शक्तियाँ एक ही छत के नीचे आती हैं, वही ईश्वर है। दाऊद यह मानकर देता है कि राज्य उसी का है, और वह सभी से ऊपर महान ठहरा है। यह विश्वास एक शाश्वत, सार्वभौमिक तत्त्व का अभिवादन है—कि ईश्वर सत्ता के स्रोत, मान, और समृद्धि का केंद्र है।
महत्वपूर्ण शब्द एवं imagery
- महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव: ये पांच descriptors ईश्वर की महान व सबसे ऊँची गुणधर्म हैं जो उसकी चरित्र-शक्ति, गुण और प्रशंसा को एक ही स्थान पर समेटते हैं।
- आकाश और पृथ्वी: यह समस्त सृष्टि का प्रतिनिधित्व है, एक समर्पित स्वीकृति कि परमेश्वर के अधीन ही दोनों लोक हैं।
- राज्य तेरा है: दाऊद की घोड़ी से निकलकर आता हुआ यह उद्घोष ईश्वर की सार्वभौमिक अधिकारिता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।
संदर्भित और निकट संबद्ध पाठ
1) प्रकाशित-वचन (प्रकाशन): प्राका. 5:12–13 में भी प्रार्थनात्मक और पूजात्मक स्वरूप मिलता है जिसमें सभी ज्ञान और राशि-उत्पादन ईश्वर के लिए है—“मसीह के गुणगान” के साथ समापन। यह संकेत देता है कि आकाश का स्वर्गीय साम्राज्य भी वही है।
2) 2 इतिहास 20:6 में युधिष्ठर के समय भी ऐसे ही विश्वास का उद्घोष मिलता है कि दया और शक्ति प्रभु के हाथ में है।
3) दानियाल 2:20-21 में परमेश्वर की सत्ता और परिवर्तन-प्रज्ञता का उल्लेख है कि वह राजाओं को उठाता-बैठाता है और उनकी योजनाओं को उसी के अनुसार चलाता है।
पौष्टिक टिप्पणी—मूल संदेश का समेकन
यह पद एक worshipful confession है: परमेश्वर के प्रति पूर्ण निर्भरता और उसकी सार्वभौमिक सत्ता की स्वीकृति। दाऊद राजा के रूप में अपने योगदान—भरोसे के साथ स्वयं के वैभव को भी ईश्वर के सामने समर्पित करना—इस बात को दर्शाता है कि नेतागण अपनी सामर्थ्य और संसाधनों को भी ईश्वर के उद्देश्य के लिए अभिषेक करें।
आज के लिए अनुप्रयोग
महत्वपूर्ण उद्धरण (एतिहासिक दार्शनिक सलाह)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के शब्दों की शुद्ध उद्धरण चाहते हैं, तो ध्यान दें कि नीचे छोटे-छोटे सार-संदेश निजी उद्धरण के रूप में उपयोग किए गए हैं:
Henry से: “The Lord God is glorious in his strength” (महिमा और सामर्थ्य परमेश्वर में ही है)—यह वर्णन इसी प्रकार के विचार को पुष्ट करता है।
Albert Barnes से: “All things are thine, and thine is the kingdom” (सब तुम्हारे हैं, और राज्य तुम्हारा है)—ईश्वर की एकात्मक सत्ता का स्पष्ट संकेत।
Adam Clarke से: “All that is in heaven and earth is under him” (आकाश-स्थल में जो कुछ भी है, वह उसके अधीन है)—सार-सार यही विचार प्रस्तुत करता है।
कुल मिलाकर यह पद परमेश्वर की महत्ता, सत्ता और कृपा के संग एक गहन दुआ-स्वर का हिस्सा है जिसे आज भी विश्वासी ईश्वर की महिमा का केंद्र समझते हैं।