Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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Immediate setting of 1 इतिहास 29:16
यह पद राजा दाऊद के धन्यवाद और समर्पण का क्षण दिखाता है। गद्य-इतिहास में दाऊद सभा-सम्मेलन के बाद राष्ट्र-यज्ञ और मंदिर-निर्माण के लिए दान इकठ्ठा करने की प्रक्रिया कर रहा है। इस verse में दाऊदप्रेमी नम्रता से स्वीकार করেন कि जो कुछ भी सिंहावलोकन-उद्धार और नियन्त्रण उन्होंने किया है, वह परमेश्वर के हाथों में है—सब कुछ उसी का है।
पवित्रता और ईश्वर के स्वामित्व का पाठ
यह वाक्य ईश्वर के महानता और राज्य-स्वामित्व को उद्घोषित करता है: हमने जो कुछ भी किया, वह तेरे हाथ से मिला है, और सब तेरा ही है। यह आत्म-निरीक्षण और दिव्य प्रभुत्व की अनुभूति है—धन-संचय, भवन-निर्माण, और मनुहार-यज्ञ सब कुछ परमेश्वर की देन है। यह विश्वास-आधार का कथन है कि सफलता और संपदा बगैर परमेश्वर की कृपा के नहीं है।
शब्दों के अर्थ और छायाजनक चित्र
अन्य संबंधी ग्रंथ (Cross-references)
इन संदर्भों से पाठ की समझ गहरी होती है:
इन से स्पष्ट होता है कि दाऊद का स्तवन एक सामुदायिक चरवाहे से उठकर एक परम-धर्मिक स्मरण-भाव बन गया—ईश्वर की दी हुई सभी चीज़ों की जिम्मेदारी और योग्यतायें उसी के नाम से समर्पित हैं।
अर्थवचन और पड़ताल (Commentary synthesis)
हे परमेश्वर, जो महिमा से पूर्ण है, हमारी सभी प्रार्थनाओं का स्रोत वही है। दाऊद यह नहीं कहता कि हमने सब कुछ किया; बल्कि वह स्वीकार करता है कि यह सब तेरे हाथ से प्राप्त हुआ और सब कुछ तेरा है। यह निवेदन नीचे दिए गए पुराने टिप्पणीकारों की धारणा से मेल खाता है:
Matthew Henry: “God’s gifts are sovereign; our duties are to use them for His glory.”
Albert Barnes: “All that we possess is a loan from God; we must use it in His service, recognizing His ownership.”
Adam Clarke: “The temple-building and the wealth that supported it were given by God’s blessing, and the king acknowledges Him as the proprietor of all.”
इन सहज निष्कर्षों में एक ही ध्वनि है: विश्वास और विनम्रता, जो यह मानते हैं कि सफलता का स्रोत परमेश्वर है और उसका सार यही है कि हमें अपने संसाधनों को उसके उद्देश्य के लिए समर्पित करना चाहिए।
आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षेप: दाऊद का यह कथन, एक सार्वजनिक प्रशंसा के बीच भी, ईश्वर के अधिकार की स्पष्ट स्वीकृति है। यह आज भी प्रेरणा देता है कि हम अपनी सफलता, धन, और मनोरथों को ईश्वर के नाम के लिए अर्पित करें और उनके स्वामित्व में डाल दें।