1 इतिहास 29:29 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

आदि से अन्त तक राजा दाऊद के सब कामों का वृत्तान्त,

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1 इतिहास 29:29 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 29:29 पर आधारभूत व्याख्या

पद 29:29 में इतिहास का वह भाग दिया गया है जहाँ दाऊद राजा के दशकों के अनेक कर्मों का संक्षेप और वृत्तान्त प्रस्तुत होता है। पाठ का उद्देश्य यह दिखाना है कि दाऊद के शासनकाल के विशिष्ट घटनाक्रम, उनके राज-कर्म, और उनके मार्ग के परिणाम एक साथ एक समग्र चित्र बनाते हैं। यह verse दाऊद के नेतृत्व के संपूर्ण इतिहास की एक पुख्ता परत है जो उसकी वीरता, दया, नीति और परमेश्वर के साथ उसके संबन्ध को रेखांकित करती है।

केंद्रीय अर्थ

यह वचन दाऊद के जीवन के सभी प्रमुख कार्यों का सार देता है—उसके शासन के दौरान जो घटनाएँ घटित रहीं, वे उसकी उपलब्धियों और अनुभवों के साथ इतिहास में दर्ज हैं। यह संकेत देता है कि परमेश्वर के साथ एक दृढ़ संबंध और समाज के लिए साहसिक निर्णय, इन सबका योगदात्री दाऊद रहा।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • वक्त-समय के परीक्षण और श्रद्धा: दाऊद ने कठिनाइयों में भी परमेश्वर को स्मरण रखा और उसका मार्गदर्शन पाया।
  • नेतृत्व और उत्तरदायित्व: विभिन्न सामरिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक फैसलों में दाऊद का नेतृत्व स्पष्ट है।
  • धार्मिक स्मारक और प्रभु के साथ संवद्धता: राजसी कृत्यों के साथ परमेश्वर की इच्छा का सम्मान उसका ध्येय रहा।

संबंधित पाठ

– इतिहास 1:28–31 में दाऊद के शाषण-काल के प्रमुख घटनाक्रम मिलते हैं; यह वही धारा है जो उनके शासन की कुल मिलाकर तस्वीर बनाती है।

– आगे के अध्यायों में राजा का सेवार्थ विराट कार्य और परमेश्वर के वचन के प्रति समर्पण और भी उद्घाटित होता है।

व्यावहारिक विचार

हमारे दिन-प्रतिदिन के अनुभवों में भी प्रेरणा प्राप्त होती है कि नेतृत्व कैसे परमेश्वर के मार्ग पर टिके रहते हुए समाज के कल्याण के लिए प्रयास करें। कठिन समय में भी ईश्वर के मार्ग पर भरोसा बनाए रखना, और अपने कार्यों में सत्य और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है।

संक्षिप्त समापन

1 इतिहास 29:29 दाऊद के समपूर्ण राजकार्य की एक समेकित झलक प्रस्तुत करता है—एक ऐसा जीवन जिसके अंदर वीरता, नम्रता, और परमेश्वर के साथ स्थिर निष्ठा मिलती है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि महान कार्य भी परमेश्वर की कृपा और सही मार्गदर्शन के बिना अधूरा रहते हैं।

Cross-references

संदर्भ 1: सम्वत्सर/सूत्रधर्मी संकेतों के साथ — 2 समूएल 5–7 में दाऊद के युवा दिनों से लेकर राजग्रहण तक का विस्तृत विवरण मिलता है, जो 1 इतिहास 29:29 के व्यापक संदर्भ बनते हैं।

संदर्भ 2: 1 राजा 2:3-4 — दाऊद की आख़िरी आह्वान और वचन, जो उसके कर्तव्यों और परमेश्वर के प्रतिज्ञा-पालन को पुष्ट करते हैं।

महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): यदि उपलब्ध हों तो ठीक वही शब्द जिनका संक्षेप यहाँ समाहित है, नीचे दिए अनुच्छेदों में उद्धृत किए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर यह वचनीक भाग हमें यह बताता है कि दाऊद के सम्राट्‍य की सभी प्रमुख घटनाओं का समागम एक प्रेरक इतिहास है—जहां सफलता और विफलता दोनों के बीच परमेश्वर के नेतृत्व की आवश्यकता स्पष्ट रहती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 29:29 समानांतर पद और संबंधित वचन

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(पूर्वकाल में तो इस्राएल में जब कोई परमेश्‍वर से प्रश्न करने जाता तब ऐसा कहता था, “चलो, हम दर्शी के पास चलें;” क्योंकि जो आजकल नबी कहलाता है वह पूर्वकाल में दर्शी कहलाता था।)

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1 शमूएल 22:5 (HINIRV) »
फिर गाद नामक एक नबी ने दाऊद से कहा, “इस गढ़ में मत रह; चल, यहूदा के देश में जा।” और दाऊद चलकर हेरेत के जंगल में गया।

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तब राजा नातान नामक भविष्यद्वक्ता* से कहने लगा, “देख, मैं तो देवदार के बने हुए घर में रहता हूँ, परन्तु परमेश्‍वर का सन्दूक तम्बू में रहता है।”

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