1 इतिहास 29:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब दाऊद ने सारी सभा के सम्मुख यहोवा का धन्यवाद किया, और दाऊद ने कहा, “हे यहोवा! हे हमारे मूल पुरुष इस्राएल के परमेश्‍वर! अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू धन्य है।

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1 इतिहास 29:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

आयत का तात्पर्य और संदर्भ

1 इतिहास 29:10 में दाऊद सभा के बीच यहोवा की प्रशंसा करता है और proclamation देता है कि यहोवा अनादिकाल से अनन्तकाल तक धन्य है। यह अध्याय तब है जब गांव-घर और देश के लोग एक साथ समर्पण-समारोह कर रहे होते हैं, और दाऊद उन लोगों के सामने परमेश्वर की महानता और faithfully संचलन का सम्मान व्यक्त करते हैं।

ईश्वर के प्रति यह विश्वास: पाठ से जो उजागर होता है

- वह यह कि परमेश्वर ही जीवन की आधारशिला हैं, और मानव इतिहास की दिशा उन्हीं के अनुरूप चलती है। दाऊद यहोवा को “हमारे मूल पुरुष इस्राएल के परमेश्वर” कहकर उसे समर्पण और प्रेरणा का स्रोत मानते हैं।

- अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू धन्य है—यह उद्घोष परमेश्वर के शाश्वत ईश्वरत्व, अविनाशी प्रसाद और सिंहावलोकन की स्थिरता को व्यक्त करता है। वक्ता की यह बुलाहट विश्वास के स्थायित्व की गवाही है कि परमेश्वर हर समय, हर परिस्थिति में समान रूप से महान है।

महत्वपूर्ण शब्दों और धारणाओं की स्पष्टता

- धन्य: केवल आशीर्वाद नहीं, बल्कि परमेश्वर के पवित्र नाम और गुणों के उच्चाटन का संकेत है; उसकी पवित्रता, सामर्थ्य और अनंतता का अभिवादन।

- अनादिकाल से अनन्तकाल तक: परमेश्वर के समय के परे, इतिहास से पहले और कल के बाद भी वही रहते हैं; वह परिवर्तनशून्य है।

अन्य बाइबिल संदर्भ और उनके अर्थ

- दाऊद का आभार और परमेश्वर के गुणों की घोषणा भिन्न पुस्तकों में भी मिलती है, जैसा कि कई स्थानों पर अभिवादन और स्तुति मिलती है कि परमेश्वर हमारे जीवन के केंद्र में हैं।

- यीशु के नए वचन में भी ऐसी स्तुतियाँ मिलती हैं जहाँ परमेश्वर के राज्य और उसकी आज्ञाओं की महत्ता व्यक्त होती है—यही आत्म-निर्भरता और विश्वास का आधार है।

आज के संदर्भ में आवेदन

  • समर्पण-समारोह में लोग परमेश्वर की महिमा उच्चारण करें और जीवन के हर आयाम में उसकी अनंतता पर आस्था प्रगट करें।
  • आभार व्यक्त करते समय यह समझें कि परमेश्वर ही हमारे इतिहास के केंद्र में हैं, ताकि भय, अस्थिरता या असफलताओं के बीच भी हमारा हृदय स्थिर रहे।

संदर्भ-समेकन

यह मार्गदर्शक बात बताती है—परमेश्वर के साथ हमारा रिश्ता इतिहास-परंपरा और समुदाय के साथ जुड़ा है। दाऊद की भाषा में यह एक सामूहिक स्मरण है कि परमेश्वर ही हमारी शक्ति और जीवन का स्रोत है।

संक्षिप्त समापन

1 इतिहास 29:10 में दाऊद की यहोवा-प्रशंसा एक प्रेरक पोस्टर है कि विश्वास और आध्यात्मिक समर्पण से समुदाय और व्यक्तित्व दोनों प्रामाणिक रूप से ऊँचे होते हैं। भगवान धन्य हैं—आज भी वही प्रकट और प्रचंड हैं।

उद्धरण संकेत: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान्य विचारधारा के प्रकाशन-उद्धरण कुछ स्थितियों में मिलते हैं—परंतु इस प्रस्तुति में सीधे पूर्ण वाक्यों या अनुवाद-उद्धरण का पुनरुत्पादन नहीं किया गया है; केवल उनकी सामान्य शिक्षात्मक धारणा से प्रेरित सार संज्ञा जोड़ी गई है।

क्रॉस-रेफरेंसेस

- स्तुति और आभार के महत्व पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण: भजन 100; भजन 103—परमेश्वर की दया और पवित्रता का गीत। यह से यह पुष्टि मिलती है कि आभार का गीत समुदाय को एकजुट करता है।

- परमेश्वर की शाश्वतता का सत्य: यशायाह 40:28; मरकुस 13:32—यह बताता है कि परमेश्वर समय से परे हैं और हमारा भरोसा उसी अनंत सत्ता पर टिकना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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और वे ऊँचे शब्द से कहते थे, “वध किया हुआ मेम्‍ना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और स्तुति के योग्य है*।” (प्रका. 5:9)

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