1 इतिहास 29:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब पितरों के घरानों के प्रधानों और इस्राएल के गोत्रों के हाकिमों और सहस्‍त्रपतियों और शतपतियों और राजा के काम के अधिकारियों ने अपनी-अपनी इच्छा से,

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1 इतिहास 29:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 29:6 — पितरों के घरानों के प्रधानों के साथ अपनी इच्छा

मुख्य विचार: इस पाठ में इस्राएल के कर-सम्पादन और दान-कार्य के दृढ़ आत्मविश्वास को दिखाया गया है, जब दाऊद ने ईश्वर के लिए विशाल निर्माण-कार्य और राज्य-कार्य के लिए समाज की संलग्नता का आह्वान किया। राजसी नेतृत्व के तहत परमेश्वर की योजनाओं के समर्थन में प्रत्येककर्मी–घराने, गढ़ों के प्रमुख, और कुल वंश के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। यह समर्पण और समुदायिक जिम्मेदारी का उदाहरण है।

साहित्यिक संदर्भ (पाठ-वाचन के संदर्भ में)

पद का भाव दाऊद के कर्म-सम्पादन से जुड़ा है, जब उसने निर्धारित दान और nasa-कार्य के लिए लोगों की इच्छा और साहस को एक साथ जोड़ा। यह न सिर्फ आर्थिक उदारता है, बल्कि समुदाय की एकता और नेतृत्व का दृढ़ संकेत है कि पवित्र उद्देश्य के लिए विविध घरानों का सम्मिलन संभव है। मूल पाठ में “अपनी इच्छा से” कहना इन सदस्यদের उत्साह और सहमति को दर्शाता है, जो दाऊद के शासनकाल की पुण्य-प्रेरित उपलब्धि के लिए आगे आये।

धार्मिक-आडम्बर से ऊपर: theological significance

इस वचन में संकल्प और समर्पण का महत्व स्पष्ट है। एक राष्ट्र के निर्माण में नेताओं, प्रमुखों, और वृद्ध-पूर्वजों का सहयोग दिखता है—जो परमेश्वर के घर के उद्देश्य में एकजुट होते हैं। यह दाऊद के नेतृत्व की एकता-उन्मुख शैली का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें राजसी शक्ति और धार्मिक ध्येय एक साथ चलते हैं। इससे यह भी प्रेरणा मिलती है कि सत्ता के साथ जवाबदेही और पवित्र उद्देश्य का संयोजन कैसे व्यवहारिक बना रहता है।

पवित्र शास्त्र के अन्य संदर्भों के साथ संबंध

  • यह पाठ समुदाय-निर्माण की योजना से जुड़ा है—यद्यपि दिया गया दान एक वित्तीय-तत्व है, परन्तु यह धार्मिक-समाज की भागीदारी को भी बढ़ाता है (उद्धार, मंदिर निर्माण आदि के लिए योगदान)।
  • आत्म-समर्पण और नेतृत्व के प्रति विश्वास एकात्मता बनाकर चलता है—जो अन्य स्थानों पर धर्म-यज्ञ और पूजास्थल के निर्माण के समय सामने आता है।
  • राज-प्रशासन के समन्वय में परिशोधन और सदाचार की अपेक्षा—जो दाऊद के आह्वान से परिलक्षित होती है।

सोच-विचार के लिए प्रश्न

  • क्या मेरा योगदान समुदाय के लक्ष्य के लिए दया और उदारता से है?
  • नेतृत्व और जिम्मेदारी में मैं किस तरह सहयोग और सहभागिता दिखाता/दिखाती हूँ?
  • परमेश्वर के उद्देश्य के लिए एक सामान्य लक्ष्य कैसे और किन-किन संसाधनों के संग जुड़ सकता है?

Cross-references (संक्षेप में, बिना पूर्ण पद विवरण)

  • प्रोत्साहन के लिए समुदायिक योगदान: मंदिर-निर्माण के साथ जुड़े अन्य संदर्भ—यह दर्शाते हैं कि समाज के हर वर्ग का भागीदारी से ही कार्य सफल होता है।
  • नेतृत्व और जवाबदेही: राज-और धार्मिक नेतृत्व के बीच संतुलन की चर्चा में देखिए कि किस प्रकार समुदाय का समर्थन आवश्यक है।
  • उत्साहपूर्ण सहमति के महत्व: उत्साह और सहमति से प्रेरित निर्णय परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप आगे बढ़ते हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष: 1 इतिहास 29:6 में दिखता है कि देश-निर्माण का समृद्ध युग कौशल-सम्पन्न नेतृत्व, घरानों के प्रधानों की सहभागिता, और हर पवित्र उद्देश्य के लिए सामूहिक योगदान पर टिका है। यह एकीकृत समुदाय के द्वारा परमेश्वर के घर और राज्य-कार्य की सफलता का मॉडल बन जाता है।

आचार्यों के संकेत (संक्षेप में)

मैथ्यू हैनरी, अगरब Barnes, और Adam Clarke से संक्षेप उद्धरण जैसी स्पष्ट पंक्तियाँ उपलब्ध न होने पर भी उनके सामान्य दृष्टिकोण से यह दिखता है कि: महान उद्देश्य के लिए सभी स्तरों का सहकार्य आवश्यक है; और पवित्र उद्देश्य में भागीदारी स्वयं आशीर्वाद बनती है। यदि किसी पाठ में उनके सीधे शब्द मिलते हैं, तो वे सतर्कता के साथ उद्धृत किए जाएंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 29:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस्राएलियों की गिनती, अर्थात् पितरों के घरानों के मुख्य-मुख्य पुरुषों और सहस्‍त्रपतियों और शतपतियों और उनके सरदारों की गिनती जो वर्ष भर के महीने-महीने उपस्थित होने और छुट्टी पानेवाले दलों के थे और सब विषयों में राजा की सेवा टहल करते थे, एक-एक दल में चौबीस हजार थे।

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फिर अदीएल का पुत्र अज्मावेत राज भण्डारों का अधिकारी था, और देहात और नगरों और गाँवों और गढ़ों के भण्डारों का अधिकारी उज्जियाह का पुत्र यहोनातान था।

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जाति-जाति तेरे पास प्रकाश के लिये और राजा तेरे आरोहण के प्रताप की ओर आएँगे। (प्रका. 21:24)

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