1 इतिहास 29:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और सोने की वस्तुओं के लिये सोना, और चाँदी की वस्तुओं के लिये चाँदी, और कारीगरों से बनानेवाले सब प्रकार के काम के लिये मैं उसे देता हूँ। और कौन अपनी इच्छा से यहोवा के लिये अपने को अर्पण कर देता है*?”

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1 इतिहास 29:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्यों यह पद अहम है

1 इतिहास 29:5 से यह स्पष्ट होता है कि परम पिता परमेश्वर के सेवा के लिए दी गई समर्पण की भावना कितनी महत्त्वपूर्ण है। उसने राजा दाऊद को अश्व, गहना, सोना-चाँदी के कीमती पदार्थ और कारीगरों के कार्य के लिए साझा करने की प्रेरणा दी, ताकि मंदिर की तैयारी पूर्ण हो सके। यह वचन आज भी हमारे लिए प्रेरणा देता है कि ईश्वर के उद्देश्य के लिए अपने सम्पदा और समय को क्यों और कैसे अर्पित किया जाना चाहिए।

पवित्र संदर्भ का मूल पाठ

यहाँ दाऊद ने अपनी जनता के साथ मिलकर ईश्वर के मंदिर के निर्माण के लिए संसाधन जुटाने का आह्वान किया। राजा के रूप में उसकी योजना और नेतृत्व में सभी राष्ट्र के लोग—राजकुमार, अधिकारी और साधारण लोग—स्वेच्छापूर्वक दान करते हैं। यह सामूहिक प्रतिज्ञा और सामुदायिक योगदान का मिसाल है, जिसमें परमेश्वर के काम के लिए व्यक्तिगत संपत्ति भी समर्पित होती है।

मुख्य संदेश

- ईश्वर की महिमा के लिए समग्र समर्पण: जिसमें सोना, चाँदी, वस्त्र, और कारीगरों के कौशल शामिल हैं।

- प्रेरित नेतृत्व की नम्रता: दाऊद स्वयं यह दान देता है—अपने सामर्थ्य से, परन्तु यह भी दिखाता है कि संसाधन एकता के साथ ईश्वर के लिए समर्पित होते हैं।

- भक्ति का सामुदायिक अभ्यास: हर वर्ग का सहभागी बनना और एक साथ मंदिर उत्पादन को सक्षम बनाना।

जोड़ी गई बाइबल Themes

  • उच्च ईश्वर-स्तवन: संपत्ति को ईश्वर के उद्देश्य हेतु रखना एक पवित्र क्रिया है।
  • नेतृत्व और समाज-सेवा: नेत dogs न केवल निर्देश दें, बल्कि वित्तीय योगदान भी करें ताकि दान सहायता बन सके।
  • विश्वास की गति से आस्था: खुशी से दिया गया हर दान परमेश्वर की कृपा की साझा पुष्टि है।

मधुर cross-references (संक्षिप्त उल्लेख)

  • 2 कुरिन्थियों 9:7 — व्यक्तिगत इच्छा से दी गई उदारता का टेक्स्ट: “जो दिल चाहकर देता है, उसे ही स्वीकार किया जाता है।” यह संदर्भ इस वक्तव्य को गूढ़ बनाता है कि दान में हृदय की सच्ची भूमिका है।
  • हबक्कुक 2:14 — ईश्वर का उद्देश्य सारी पृथ्वी में उसकी महिमा का प्रकाश बनना है; दान उसी आपकी सहभागिता से लक्ष्य तक पहुँच सकता है।
  • यहोशू 24:15 — “यदि तुम्हारे लिए यह अच्छा न हो, तो तुम चुन लो आज किसकी सेवा करोगे” का आग्रह: स्वयं के चयन में ईश्वर के श्रेष्ठकार्य की प्राथमिकता।

व्यावहारिक शिक्षण

- अपने संसाधनों को ईश्वर के मकसद के लिए योजनाबद्ध अर्पण करें, न कि उच्छृंखलता से।

- नेतृत्व को प्रेरणा दें कि वे भी व्यक्तिगत रूप से दान कर कर एक उदाहरण बनें।

- सामूहिक योगदान के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है, ताकि कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़े।

देवotional reflection

जब दाऊद ने अपने लोगों से दान माँगा, तो उसने दिखाया कि ईश्वर की योजना में भागीदारी केवल धन का नहीं, बल्कि विश्वास और समर्पण की एकता है। यदि हम आज भी अपने जीवन के मूल्यवान वस्तुएँ—समय, प्रवृत्ति, कौशल—ईश्वर के उद्देश्य के लिए रखते हैं, तो हमारे कार्य भी मंदिर-आध्यात्मिकता के साथ जुड़ जाते हैं। ईश्वर के लिए प्रायः सबसे कठिन दान वह होता है जो हमें सबसे अधिक लगाव होता है; परंतु यही वह हिस्सा है जो हमारे चरित्र को अद्भुत रूप से बनाता है।

किस प्रकार के दान आपके लिए बोधगम्य हैं? आप अपने जीवन-यात्रा में किस तत्व को ईश्वर-कार्य के लिए समर्पित कर सकते हैं?

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 29:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“इस्राएलियों से यह कहना कि मेरे लिये भेंट लाएँ; जितने अपनी इच्छा से देना चाहें उन्हीं सभी से मेरी भेंट लेना।

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निर्गमन 35:5 (HINIRV) »
तुम्हारे पास से यहोवा के लिये भेंट ली जाए, अर्थात् जितने अपनी इच्छा से देना चाहें वे यहोवा की भेंट करके ये वस्तुएँ ले आएँ; अर्थात् सोना, रुपा, पीतल;

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तब इस्राएल के प्रधान जो अपने-अपने पितरों के घरानों के मुख्य पुरुष, और गोत्रों के भी प्रधान होकर गिनती लेने के काम पर नियुक्त थे,

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