1 इतिहास 29:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यहोवा ने सुलैमान को सब इस्राएल के देखते बहुत बढ़ाया, और उसे ऐसा राजकीय ऐश्वर्य दिया, जैसा उससे पहले इस्राएल के किसी राजा का न हुआ था।

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1 इतिहास 29:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का बयान

1 इतिहास 29:25 में कहा गया है कि परमेश्वर ने सुलैमान को इस्राएल के सामने अत्यंत महिमा दी और उसे ऐसा राजकीय ऐश्वर्य दिया जो पहले किसी राजा को नहीं मिला था।

संदर्भ-विवेचना

यह पाठ दाऊद के शासनकाल के बाद सुलैमान के राजारोहण की प्रसंगवश बात करता है। परमेश्वर ने राजा के रूप में सुलैमान की पहचान को मान्यता दी और यह ऐश्वर्य इस्राएल के भविष्य के लिए एक चिह्न के तौर पर प्रस्तुत हुआ कि परमेश्वर की कृपा संतुलित शासन, चरित्र और धर्म-निष्ठा के माध्यम से मिलती है। यह वचन, दाऊद के उद्देश्य और ईश्वरीय प्रबंध के बीच गहरे संबंध को उजागर करता है।

interpretive observations

  • ईश्वर की कृपा का प्रमाण: यह अलौकिक बढ़ोतरी परमेश्वर की कृपा का प्रतिफल है, न कि केवल मानवीय योग्यता का परिणाम।
  • राजसी ऐश्वर्य का उद्देश्य: यह शक्ति और सम्पदा इस्राएल के लिए एक प्रेरणा-स्तर है कि वे परमेश्वर के राज-नियमों के अनुरूप रहें।
  • नया चरण, नई चुनौतियाँ: ऐश्वर्य के साथ जिम्मेदारियाँ भी बढ़ती हैं; सुलैमान कोwisdom और न्याय के साथ शासन करना था।

छोटे थीमेटिक बिंदु

  1. ईश्वर-प्रियash के कारण वाली समृद्धि
  2. राज्य का प्रशिक्षण और दायित्व
  3. धार्मिक-निष्ठा बनाम राजनीतिक अधिकार

अनुशंसा पाठ (cross-reference के साथ)

1) प्रेरित ऐश्वर्य के साथ न्याय का संयोजन—नीतियों के अनुसार शासन की महत्ता का संकेत देता है; 2) परमेश्वर की कृपा को स्मरण रखना—राज्याभिषेक के समय दाऊद की नीति और सुलैमान के लिए आशीर्वाद का स्रोत; 3) राजाओं के लिए ज्ञान की माँग—राज्य की स्थिरता के लिए सद्भावना और ज्ञान आवश्यक है।

महत्वपूर्ण भाष्य-उद्धरण (पारंपरिक टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संदर्भ)

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने órdenes के अनुसार इस प्रकार के ऐश्वर्य को परमेश्वर की कृपा और दायित्वों के साथ जोड़ा है। उनके विचारों के सारांश इस प्रकार हैं: - Henry के अनुसार यह ऐश्वर्य देव-स्वीकृति का प्रतिफल है और राजा को धार्मिक-निष्ठा बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है। - Barnes इसे राज्य-निर्णयों में ईश्वरीय मार्गदर्शन की पुष्टि मानते हैं। - Clarke इसे एक चिह्न मानते हैं कि जब राजा परम भगवान के मानक पर चले, तब उसकी सत्ता प्रबल होती है। यह भाग हमें इन टिप्पणियों के संक्षिप्त संकेत देते हैं, परन्तु पूर्ण उद्धरण पाठ में नहीं दिए जाते हैं।

व्यावहारिक takeaway

व्यावहारिक रूप से बतिया जाए तो हमारे जीवन-दान भी उसी ढंग से हैं: प्रभु के आशीर्वाद तब सार्थक होते हैं जब हम उसे अपने कार्यों में नैतिकता, न्याय और करुणा के साथ लागू करें। सफलताएँ ईश्वर की कृपा से आती हैं, और उसका उद्देश्य हमारे भीतर सच्चा विनम्रता, धर्म-निष्ठा और सेवा-भाव बनाए रखना है।

संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंस

- 2 समर्ध 7:14: यदि My लोग; प्रभु को खोजेंगे। (व्याख्या संकेत: आशीर्वाद तब मिलते हैं जब धर्म और नम्रता साथ हों।)

- नहम 9:7-8: परमेश्वर की कर्तव्य-निष्ठा और कृपा के साथ राजा के चयन का महत्व।

- दानियेल 2:21: परमेश्वर जो बदलाव और सत्ता देता है, वही शासन के हर काल में नियंतरण करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 29:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 इतिहास 1:1 (HINIRV) »
दाऊद का पुत्र सुलैमान राज्य में स्थिर हो गया, और उसका परमेश्‍वर यहोवा उसके संग रहा और उसको बहुत ही बढ़ाया।

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फिर जो तूने नहीं माँगा, अर्थात् धन और महिमा, वह भी मैं तुझे यहाँ तक देता हूँ, कि तेरे जीवन भर कोई राजा तेरे तुल्य न होगा।

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इस कारण बुद्धि और ज्ञान तुझे दिया जाता है। मैं तुझे इतनी धन सम्पत्ति और ऐश्वर्य भी दूँगा*, जितना न तो तुझसे पहले किसी राजा को मिला और न तेरे बाद किसी राजा को मिलेगा।”

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