Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 3:1 1 राजाओं 3:2 1 राजाओं 3:3 1 राजाओं 3:4 1 राजाओं 3:5 1 राजाओं 3:6 1 राजाओं 3:7 1 राजाओं 3:8 1 राजाओं 3:9 1 राजाओं 3:10 1 राजाओं 3:11 1 राजाओं 3:12 1 राजाओं 3:13 1 राजाओं 3:14 1 राजाओं 3:15 1 राजाओं 3:16 1 राजाओं 3:17 1 राजाओं 3:18 1 राजाओं 3:19 1 राजाओं 3:20 1 राजाओं 3:21 1 राजाओं 3:22 1 राजाओं 3:23 1 राजाओं 3:24 1 राजाओं 3:25 1 राजाओं 3:26 1 राजाओं 3:27 1 राजाओं 3:28



या पाठ का तात्पर्य
1 राजाओं 3:13 का मतलब है कि परमेश्वर दाऊद के पुत्र श्लोमొन को वह उन्नति और अनुग्रह देता है जिसकी उसने कोई अघोषित माँग नहीं की थी—यानी न धन, न महिमा, बल्कि उससे आगे शासन की विशिष्टता और जीवन भर की सुरक्षा। परमेश्वर ने उसे वह सब कुछ भी दे दिया जो किसी राजा के लिए संभव हो सकता है, और ऐसा इसलिए कि उसका शासन अन्य शासकों से भरपूर गहराई और न्याय के साथ संचालित हो।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
योनेक्लस 3:५–14 के तहत श्लोमोन ने परमेश्वर से बुद्धिमत्ता माँगी, न धन-यश नहीं। परमेश्वर ने उसकी इच्छा स्वीकार करते हुए कहा कि वह उसे बुद्धिमत्ता दूँगा—परंतु साथ ही उसे धन, महिमा और शासन का आशीर्वाद भी देगा, ताकि उसका शासन संसार के लिए नमूना बने। इस वाक्य में परमेश्वर की कृपा और श्लोमोन की नम्र माँग की सम्मिलित सराहना है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संबद्ध अंश (Cross-references)
सूक्ष्म विचार (प्रमाणित टिप्पणी से प्रेरित)**
जॉन ध्रुव समाहित टिप्पणीकारों के अनुसार, यह वाक्य संकेत देता है कि परमेश्वर मनुष्य के अंदर प्रेरणाओं को दर्शाते हुए उसे ऐसे मार्ग दिखाते हैं जिनमें ज्ञान, विवेक और न्याय मिलते हैं। हार्ड-हिट शब्दों के बिना भी, यह वचन हमारे लिए है कि परमेश्वर के लक्ष्य में विनम्रता और गुरु-दर्शन प्रमुख हो।
एक छोटे से विचार का सार
टेकअवे (सार)
परमेश्वर श्लोमोन को असीम आशीष देना चाहता था—पर उसकी केन्द्रित माँग बुद्धिमत्ता पर थी। इसका संदेश हमारे लिए है कि जीवन के सत्य निर्णयों के लिए परमेश्वर से ज्ञान माँगना चाहिए, और जो कुछ मिला हो, उसे नम्रता और न्याय के साथ उपयोग करना चाहिए।
धार्मिक उद्धरण (संक्षेप)
महत्वपूर्ण पंक्ति: “जो तू ने नहीं माँगा, वह भी मैं तुझे यहाँ तक देता हूँ, कि तेरे जीवन भर कोई राजा तेरे तुल्य न होगा।”