Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 3:1 1 राजाओं 3:2 1 राजाओं 3:3 1 राजाओं 3:4 1 राजाओं 3:5 1 राजाओं 3:6 1 राजाओं 3:7 1 राजाओं 3:8 1 राजाओं 3:9 1 राजाओं 3:10 1 राजाओं 3:11 1 राजाओं 3:12 1 राजाओं 3:13 1 राजाओं 3:14 1 राजाओं 3:15 1 राजाओं 3:16 1 राजाओं 3:17 1 राजाओं 3:18 1 राजाओं 3:19 1 राजाओं 3:20 1 राजाओं 3:21 1 राजाओं 3:22 1 राजाओं 3:23 1 राजाओं 3:24 1 राजाओं 3:25 1 राजाओं 3:26 1 राजाओं 3:27 1 राजाओं 3:28



कथन का सीधा अर्थ
1 राजाओं 3:15 में कहा गया है कि सुलैमान जाग उठा, समझा कि वह यह स्वप्न था, फिर यरूशलेम गया, ठिकाना—यहोवा की वाचा के संदूक के सामने—होमबलि और मेलबलि चढ़ाए और अपने पुरे कर्मचारी समूह के लिए भोज किया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना सुलैमान के दायित्व स्वीकार करने और उसकी बुद्धिमानी के चरणों के बाद का है। दाऊद की मृत्यु के बाद सुलैमान राजा बना; लोगों ने उसे परमेश्वर की इच्छा के अनुसार न्याय और शासन के लिए चुना। यह प्रसंग उसी समय का है जब उन्होंने यहोवा के सामने आचरण के महत्त्व को अनुभव किया और रानी-परंपराओं के पीछे नहीं, परमेश्वर की कृपा के आगे नम्रता दिखाने का चयन किया।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संयुक्त विचारधारा: पुराने नियम के अनुभव
इस अनुभाग में तीन प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के सार-भित्ति विचार सम्मिलित हैं:
मथ्यू हेन्री: “यह दिखाता है कि राजा ने परमेश्वर के साथ अपनी कर्तव्य-निष्ठा को पुष्ट किया।”
आल्बर्ट बार्न्स: “धार्मिक आचरण और राजसी सत्ता का संतुलन—बलिदान के साथ भक्ति की प्राथमिकता।”
एडम क्लार्क: “स्वप्न के प्रत्यक्ष संकेत पर भी आस्था की दृढ़ता और धर्म-निष्ठा की अभिव्यक्ति।”
क्रॉस-रेफरेंस (संदर्भ-संबंध)
1) 2 स्मुस 7:18-29 — दाऊद की परंपरा और परमेश्वर की वाचा की गहराई; यह दिखाता है कि राजा के लिए विनम्रता और परमेश्वर की योजना को मानना कितना आवश्यक है।
2) निर्ग 29:38-42 — बलिदान और सभागृह-आह्वान के बीच समर्पण की प्रक्रिया; यह दर्शाता है कि समुदाय के लिए परमेश्वर के साथ सामंजस्य कैसे स्थापित होता है।
3) अभि 13:15 — राजा के नेतृत्व में सत्य और धार्मिक आचरण का मूल्यांकन; बलिदान केवल outward धर्म नहीं, बल्कि हृदय का समर्पण भी है।
संक्षिप्त व्यवहारिकTakeaway
इस पद से सीख मिलती है कि राजसी शक्ति भी परमेश्वर के सामने विनम्रता और समर्पण से ही सत्य ठहरती है। आपसी समुदाय के लिए भोज और सेवा दिखाते समय, धर्म-निष्ठा को प्राथमिकता दें और वह आशीर्वाद जिसे परमेश्वर देता है, उसे साझा करें।
कुटुंब, समुदाय, और नेतृत्व में यह संदेश है कि वास्तविक सत्ता वही है जो परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप हो, न कि केवल शक्ति प्रदर्शन के द्वारा।