Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 3:1 1 राजाओं 3:2 1 राजाओं 3:3 1 राजाओं 3:4 1 राजाओं 3:5 1 राजाओं 3:6 1 राजाओं 3:7 1 राजाओं 3:8 1 राजाओं 3:9 1 राजाओं 3:10 1 राजाओं 3:11 1 राजाओं 3:12 1 राजाओं 3:13 1 राजाओं 3:14 1 राजाओं 3:15 1 राजाओं 3:16 1 राजाओं 3:17 1 राजाओं 3:18 1 राजाओं 3:19 1 राजाओं 3:20 1 राजाओं 3:21 1 राजाओं 3:22 1 राजाओं 3:23 1 राजाओं 3:24 1 राजाओं 3:25 1 राजाओं 3:26 1 राजाओं 3:27 1 राजाओं 3:28



प्रधान अभिधारणा
1 राजाओं 3:6 में सुलैमान अपने अनुभव से यह स्वीकार करते हैं कि परमेश्वर ने उसके पिता दाउद पर अत्यंत करुणा दिखाई और उसे गद्दी पर एक पुत्र देकर उसका राज्य स्थिर किया। यह वचन दिव्य कृपा और परिवारिक वंशावली के भीतर परमेश्वर की वाचा और दया की परंपरा को उद्घाटित करता है।
साहित्यिक संदर्भ
यह पाठ नाभिकीय रूप से दाऊद के प्रति परमेश्वर की निष्ठा, दया और सचाई को स्मरण कराता है—ऐसे गुण जिन्हें दाऊद ने अपने शासनकाल में बारम्बार अपनाया। सुलैমান की यह उद्घोषणा उनके पिता के जीवन की स्मृतियों और परमेश्वर के साथ निरंतर समर्पण की याद दिलाती है। पद में “करुणा” शब्द विशेष उल्लेखनीय है, क्योंकि यह वही दिव्य कृपा है जो परमेश्वर अपने चुने हुए या उनके परिवार पर अनुग्रह की तरह बरसाता है।
धार्मिक महत्व
यह verses यह संकेत देते हैं कि परमेश्वर अपने वचनों के अनुरूप वीरता नहीं, बल्कि करुणा और सत्य के साथ राज्य देता है। दाऊद के चरित्र की सच्चाई और पथपरायणता, न सिर्फ उसके जीवन की प्रेरणा है, बल्कि सुलैमान के लिए प्रभु के आशीर्वाद की आधारशिला भी बनती है। यह पाठ हमें सच्चे राजसी जीवन के मूल्यों—ईमानदारी, सद्भाव और परमेश्वर की कृपा—में शिक्षा देता है।
पाठ-परिभाषा और क्रॉस-रेफरेंसे
क्रॉस-रेफरेंसे जो इस विचार को मजबूत करते हैं:
इन संदर्भों से ज्ञात होता है कि पराक्रम के पीछे परमेश्वर की कृपा और सच्ची निष्ठा का क्रम चला आता है, और सुलैमान पर भी वही आशीर्वाद स्थिर रहता है जब वह परमेश्वर की सच्ची राह पर चलना चाहेंगे।
प्रश्न-प्रत्युत्तर (Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस वचन में प्रभु की करुणा की स्थिरता और दाऊद-परिवार के लिए आशीष की निरंतरता स्पष्ट है। सुलैमन यह स्वीकार कर रहा है कि राज्य और सत्ता परमेश्वर की कृपा के फल हैं, और यह कृपा तब तक बनी रहती है जब व्यक्ति सत्य और ईमानदारी से चलते हैं। यह पाठ हमें याद दिलाता है: परमेश्वर की सच्चाई और दया ही हमारे जीवन के वास्तविक राजसी ढाँचे को बनाती हैं।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain commentators)
निम्न विचारधारा से संकलित: (1) Matthew Henry का प्रमुख तात्पर्य: “तेरे साथ दाऊद की सच्चाई और धर्म के साथ चलने की निर्भरता”—यह करुणा की परमिच्छा का संकेत है। (2) Albert Barnes: दाऊद के चरित्र की स्थिरता पर बल देते हैं, कि राजकुमारों के लिए परमेश्वर की अनुग्रह की परंपरा चली आ रही है। (3) Adam Clarke: दाऊद के आदि-राजय की कृपा का यह संकेत है कि परमेश्वर का आशीर्वाद वंश पर है और उनका शासन उसी पर टिकेगा। खास उद्धरण: “करुणा” और “सच्चाई”—ये परमेश्वर के राज्य के स्थिरीकरण के संकेतक हैं।