Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 1:1 1 राजाओं 1:2 1 राजाओं 1:3 1 राजाओं 1:4 1 राजाओं 1:5 1 राजाओं 1:6 1 राजाओं 1:7 1 राजाओं 1:8 1 राजाओं 1:9 1 राजाओं 1:10 1 राजाओं 1:11 1 राजाओं 1:12 1 राजाओं 1:13 1 राजाओं 1:14 1 राजाओं 1:15 1 राजाओं 1:16 1 राजाओं 1:17 1 राजाओं 1:18 1 राजाओं 1:19 1 राजाओं 1:20 1 राजाओं 1:21 1 राजाओं 1:22 1 राजाओं 1:23 1 राजाओं 1:24 1 राजाओं 1:25 1 राजाओं 1:26 1 राजाओं 1:27 1 राजाओं 1:28 1 राजाओं 1:29 1 राजाओं 1:30 1 राजाओं 1:31 1 राजाओं 1:32 1 राजाओं 1:33 1 राजाओं 1:34 1 राजाओं 1:35 1 राजाओं 1:36 1 राजाओं 1:37 1 राजाओं 1:38 1 राजाओं 1:39 1 राजाओं 1:40 1 राजाओं 1:41 1 राजाओं 1:42 1 राजाओं 1:43 1 राजाओं 1:44 1 राजाओं 1:45 1 राजाओं 1:46 1 राजाओं 1:47 1 राजाओं 1:48 1 राजाओं 1:49 1 राजाओं 1:50 1 राजाओं 1:51 1 राजाओं 1:52 1 राजाओं 1:53



अर्थ का प्राथमिक संकेत
यह संदर्भ एक महत्त्वपूर्ण अभिषेक और आशीष का क्षण है: राजा ने घोषित किया कि यहोवा ही इस्राएल का परमेश्वर है, जिसने उसे अपनी गद्दी पर विराजमान किया है। यह उद्घोष संकेत देता है कि राजनीतिक सत्ता और धार्मिक मान्यता एक साथ हैं, और नेतृत्व की वैधता सीधे परमेश्वर की कृपा से जुड़ी है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह विवरण 1 राजाओं के पुस्तक में राजा की दीन-हृदय योजना के समय का है। इस किताब में बाइबल इतिहास के उत्तर-प्राचीन राजा, उनके शासन और परमेश्वर के चुनिंदा नबी-प्रवचन का वर्णन मिलता है। यहाँ अभिषेक के बाद का उत्सव है, जब राज्याभिषेक के सत्यार्थी शब्दों में यहोवा की महिमा की घोषणा होती है।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
व्याख्या सूत्र
ऋषियों के नज़रिए से यह अभिषेक एक ऐसी घटनात्मक पुष्टि है जिसमें सत्ता की अभिव्यक्ति में परमेश्वर की सत्ता और कृपा दोनों एक साथ मानी जाती हैं। मैथ्यू हेनरी, अलेक्ट बॉर्न्स और एडम क्लार्क जैसे पवित्र-कथा-कोट्स से सम्मिलित सामान्य विवेचन यह संकेत करते हैं कि राजा का धन्यवाद और दुआएँ परमेश्वर के संदर्भ में हों और उसे ही महिमा मिले।
सार-परिचय (संक्षेप)
1) शासन के वैधता का परमेश्वरीय प्रमाण; 2) राजा के प्रति आस्था-आचरण की आवश्यकता; 3) समुदाय के लिए नम्रता और उत्तरदायित्व का संकेत।
संदर्भ-गु़ण
1) संदर्भ: 1 राजे 1–2 अध्यायों में अभिषेक, विपक्ष और कर्तव्य की चर्चा।
2) क्रॉस-रेफरेंसेज़: (i) दाऊद के जयघोष में परमेश्वर के दायित्वों की स्मृति; (ii) राजा की नीति-निर्णयों में परमेश्वर की योजना का संकेत; (iii) यशायाह/नीतियों के समय धर्म-निष्ठा का मानक।
संछेपित अनुप्रयोग
आज भी हमारे लिए यह सन्देश है कि नेतृत्व में परमेश्वर की कृपा और सत्य के साथ चलना आवश्यक है। अधिकारी और समुदाय एक साथ परमेश्वर के मार्गदर्शन की खोज करें, ताकि शासन-प्रक्रिया में नैतिकता और न्याय बना रहे।
अनुशंसित क्रॉस-रेफ़रेंसेज़ (संक्षेप)
• परमेश्वर की कृपा से नियुक्ति का सिद्धांत; • नेतृत्व की नैतिक ज़िम्मेदारियाँ; • परमेश्वर के नाम पर आशीष और विनम्रता।
मुख्य उद्धरण: किसी भी स्पष्ट पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण को यहाँ नहीं दिया गया, केवल आवश्यक सारांश है।
कठोर निष्कर्ष
यह verse बताता है कि सही शासन वह है जिसमें प्रभु का नाम उच्चारण हो, और राजा-प्रजा, दोनों परमेश्वर के वचन के अनुरूप चलते हैं।