Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 1:1 1 राजाओं 1:2 1 राजाओं 1:3 1 राजाओं 1:4 1 राजाओं 1:5 1 राजाओं 1:6 1 राजाओं 1:7 1 राजाओं 1:8 1 राजाओं 1:9 1 राजाओं 1:10 1 राजाओं 1:11 1 राजाओं 1:12 1 राजाओं 1:13 1 राजाओं 1:14 1 राजाओं 1:15 1 राजाओं 1:16 1 राजाओं 1:17 1 राजाओं 1:18 1 राजाओं 1:19 1 राजाओं 1:20 1 राजाओं 1:21 1 राजाओं 1:22 1 राजाओं 1:23 1 राजाओं 1:24 1 राजाओं 1:25 1 राजाओं 1:26 1 राजाओं 1:27 1 राजाओं 1:28 1 राजाओं 1:29 1 राजाओं 1:30 1 राजाओं 1:31 1 राजाओं 1:32 1 राजाओं 1:33 1 राजाओं 1:34 1 राजाओं 1:35 1 राजाओं 1:36 1 राजाओं 1:37 1 राजाओं 1:38 1 राजाओं 1:39 1 राजाओं 1:40 1 राजाओं 1:41 1 राजाओं 1:42 1 राजाओं 1:43 1 राजाओं 1:44 1 राजाओं 1:45 1 राजाओं 1:46 1 राजाओं 1:47 1 राजाओं 1:48 1 राजाओं 1:49 1 राजाओं 1:50 1 राजाओं 1:51 1 राजाओं 1:52 1 राजाओं 1:53



सीधे अर्थ का सार
राजा ने अपने कर्मचारियों से कहा कि वे परमेश्वर के राजकुमार की ताजपोशी के लिए मेरे पुत्र सुलैमान को मेरे निज खच्चर पर चढ़ाएं; और गीहोन को ले जाएं।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह 1 राजा 1 अध्याय का वह क्षण है जब डेविड की आयु और शासन के उत्तरार्ध में यह दिखता है कि उसका उत्तराधिकारी कौन बनेगा। सुलैमान की नियुक्ति की तैयारी स्पष्ट रूप से राजसत्ता के वैध हस्तान्तरण को दर्शाती है, क्योंकि विधिवत राजसी संकेतों के अनुसार अनुभवहीन युवराज को भी राजसिंहासन पर बिठाने की योजना चल रही है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
मुख्य विचार-विंब
अनुदर्शी क्रॉस-रेफरेंसेस
— संदर्भ: अन्य स्थान जहाँ राजसत्ता के वैध हस्तांतरण और प्रतीकों के महत्व पर चर्चा मिलती है; जैसे कि दाऊद के उत्तराधिकार या अन्य राजसी संक्रमण के वर्णन। समझने के लिए देखें: राजा-पूर्वक और राजा-उत्तराधिकारी के संदर्भ; सेवा और श्रद्धा के महत्व पर दृष्टांत।
— व्याख्या संकेत: यह घटना यह दर्शाती है कि नये राजा के सामने उपलब्ध शक्ति-स्रोत और राजसी पहचान कैसे प्रकट होती है, साथ ही परमप्रधान के मन में योजना कैसे चलती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse यह दिखाता है कि उत्तराधिकारी के चयन में शारीरिक प्रतीक और राजकीय परंपराएँ एक साथ चलते हैं। सुलैमान के लिए यह सार्वजनिक तरीके से अभिषेक का संकेत है, जिससे उसका शासन समयानुसार मान्यता पाए। परमेश्वर की योजना और संस्थागत परंपराएँ एक साथ मिलकर राजनैतिक-धार्मिक एकता का संकेत देती हैं।
अनुमानित उपयोगी संदर्भ
1) वंश-सीधा राज-उद्धार की महत्ता—राजसी प्रक्रिया के भीतर ईश्वर की योजना की पुष्टि।
2) राज-संस्थापन में प्रतीकों की भूमिका—चिह्न और हरकतें, जैसे खच्चर पर चढ़ना, स्पष्ट संकेत बनते हैं।
3) भक्तिपूर्ण प्रशासन—नई सत्ता के समक्ष परमेश्वर के निर्देश और नैतिक आचार-चरण का महत्त्व।
नोट: इस पाठ के उद्धरण सीधे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलन से केवल यदि शाब्दिक रूप में हों, तो उन्हें स्पष्ट रूप से उद्धृत किया गया है। यहाँ प्रविष्टि में वे सीधे शब्द नहीं हैं; यदि चाहिए, तो ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के समान विचारों का संक्षेप रूप प्रस्तुत किया गया है।