Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 6:1 मत्ती 6:2 मत्ती 6:3 मत्ती 6:4 मत्ती 6:5 मत्ती 6:6 मत्ती 6:7 मत्ती 6:8 मत्ती 6:9 मत्ती 6:10 मत्ती 6:11 मत्ती 6:12 मत्ती 6:13 मत्ती 6:14 मत्ती 6:15 मत्ती 6:16 मत्ती 6:17 मत्ती 6:18 मत्ती 6:19 मत्ती 6:20 मत्ती 6:21 मत्ती 6:22 मत्ती 6:23 मत्ती 6:24 मत्ती 6:25 मत्ती 6:26 मत्ती 6:27 मत्ती 6:28 मत्ती 6:29 मत्ती 6:30 मत्ती 6:31 मत्ती 6:32 मत्ती 6:33 मत्ती 6:34



मत्ती 6:33 पर केंद्रित interpretive बिंदु
यूहन्नीय सुरक्षा और दैनिक चिंताओं के बीच यह वचन ईश्वरीय राज्य को प्राथमिकता देने की स्पष्ट सलाह देता है: यदि हम परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करें, तो बाकी सब चीजें—रोज़मर्रा के जरूरतें भी—अपने आप सम्मिलित हो जाएँगी। इस वचन में संबंध है धैर्य, विश्वास और पूर्ण समर्पण का।
पाठ्य-विधेयक संदर्भ (साहित्यिक संदर्भ)
यह पद সমस्तथ कहा गया है जब यीशु अपने अनुयायियों को स्त्री-पुरुष की चिंताओं से मुक्त होकर ईश्वर के राज के लिए भावी जीवन की दृष्टि से जीने की प्रेरणा दे रहे थे। यह संदर्भ लूका 12:31 के समान विचार देता है—परमेश्वर के राज्य की खोज पहले हो, फिर इन सब चीजों की प्राप्ति का क्रम सहज रूप से अपनाया जाएगा।
पाठ की गहराई: संरचना और विषयगत तत्व
पुस्तक-समष्टि से theological संकेत
यह उद्धरण हमें यह याद दिलाता है कि विश्वास-जीवन में प्राथमिकता किस दिशा में हो: पहले ईश्वर के राज्य की मान्यताएँ और धार्मिकता—तब बाकी हर चीज अपने उचित स्थान पर आती है। इससे यह भी निकलता है कि ईश्वर-आराधना और आजीविका के बीच संतुलन संभव है, बशर्ते हम परमेश्वर के प्रभुत्व को पहली जगह दें।
पवित्र शास्त्र में क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप
1) लूका 12:31 — वही विचार, राज्य की खोज को पहले रखने का आग्रह दोहराते हैं।
2) मत्ती 22:37-38 — परमेश्वर के प्रेम और परमेश्वर-स्वामित्व के क्रम में जीवन बिताने की महत्ता।
3) फिलिप्पियों 4:11-13 — संतोष की शिक्षा: परिस्थितियों के बावजूद संतोषी जीवन जीना सीखना।
पाठ पर विचार के प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
यह वचन प्रेरणा देता है कि परमेश्वर के राज्य की खोज वास्तविक जीवन में हर प्रकार के भय, चिंता और आवश्यकताओं के ऊपर हो। यदि हम भगवान के आदेश के अनुसार आगे बढ़ते हैं, तो उनके प्रभुत्व के वितरण से हमारी आवश्यकताएं भी हितकारी ढंग से पूरी होती हैं। यह विश्वासयोग्य जीवन की ओर सरल, परन्तु गहरा मार्ग है।
आवेदनात्मक सुझाव
उद्धरण-नोट
यह लेख Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के विचारों को समेकित करता है। इनमें से किन्हीं एक से सटीक उद्धरण अगर उपलब्ध हों तो नीचे संकेत दिए गए हैं:
• एबर्ट बार्न्स के अनुसार: "..."
• एडम क्लार्क के अनुसार: "..."
• मैथ्यू हेनरी के अनुसार: "..."