लूका 12:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्तुएँ भी तुम्हें मिल जाएँगी।

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लूका 12:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य interpretive बिंदु

लूका 12:31 का केंद्रभाव यह है कि परमेश्वर के राज्य की खोज और उनकी इच्छा के अनुसार जीवन जीना, सांसारिक चिंता और असुरक्षा से आगे बढ़ने का मार्ग देता है। यीशु अपने शिष्यों को बताता है कि पहले परमेश्वर के राज और उसकी righteousness पर ध्यान दें, क्योंकि इन चीज़ों (आवश्यक दैनिक आवश्यकताएं) का प्रबंध स्वयं परमेश्वर करेगा। यह कथन हमारे भीतर आत्म-आश्रितता से मुक्त होकर परमेश्वर के निर्भरता-आधारित जीवन की अनुमति देता है।

साहित्यिक संदर्भ

सूचना देता है कि लूका का प्रेरित-पाठ, जीवन की वास्तविक चिंता बनाम ईश्वर की राज्य-योजना के बीच संतुलन दिखाता है। यह एक नैतिक-आह्वान है, न कि धन-निषेध का चरम। भिन्न-भिन्न अवसरों पर यूं ही नहीं कहा गया कि “परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो,” बल्कि यह संदेश है कि भौतिक सुरक्षा की चिंता, अगर आध्यात्मिक जागरूकता से दूरी बनाती है, तो वह वास्तविक चिंता को बढ़ाती है।

तत्त्वज– theological significance

राज्य की खोज में रहना, यहाँ परमेश्वर का राजा-प्रत्यय है। जीवन के प्राथमिक उद्देश्य स्वर्ग के राज्य के लिए सहभागिता बनना है, न कि केवल वर्तमान जीवन की संपत्ति-सुरक्षा। यह विश्वास, आशा, और प्रेम के मेल को प्रोत्साहित करता है—कि परमेश्वर के मार्ग पर चलने से आवश्यकताएँ भी पूरी होंगी, जबकि हम ईश्वर-लाभ के लिए जीते हैं।

अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकारों के संकेत

Matthew Henry कहते हैं कि बाहरी डरी-भय से मुक्त होना और परमेश्वर की राज-योजना के प्रति विश्वास की गहराई बढ़ाना, जीवन की वास्तविक संपन्नता है। Albert Barnes आपके भीतर के डर को इधर-उधर नहीं खेलने देता और बताता है कि परमेश्वर का राज्य पहले आए, तो जीवन-चीजें अपने आप सही क्रम में आ जाएँगी। Adam Clarke इस वचन को सांसारिक चिंता से मोक्ष पाने की एक प्रेरक इच्छा के रूप में देखते हैं, जो विश्वास के साथ जुड़ी हुई है।

कथा-योग्य cross-references

1) मत्ती 6:33 – “परन्तु पहले राज्य्‍य और उसकी धर्म-सत्ता” से मिलता-जुलता संदेश देता है कि ईश्वर के राज्य के लिए क्रम सबसे पहले हो। छोटे-छोटे जीवन-चिंताएं तब स्वतः व्यवस्थित होती हैं।

2) रोम 14:17 – “क्योंकि परमेश्वर के राज्य में खुशी, शांति और विश्वास की आत्मा है”—राज्य की खोज आंतरिक शांति से जुड़ती है।

3) फिलिप्पियों 4:6-7 – "चिंता न करो" का अभ्यास भी परमेश्वर-राज के जीवन-आदेश के अनुरूप है, जहां शांति मन को गश्त देती है।

चिंतन के लिए प्रश्न

  • क्या मेरी दैनिक चिंताएँ परमेश्वर के राज्य की खोज के रास्ते में बाधक बन रही हैं?
  • कैसे मैं अपनी प्राथमिकताओं को परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार पुनः क्रमबद्ध कर सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं अपने भरोसे को धन-संपत्ति से ज्यादा परमेश्वर पर बढ़ाने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम उठा सकता/सकती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस वचन का उद्देश्य है—खुद की सुरक्षा के लिए चिंता करते समय भी परमेश्वर के राज्य-कार्य की ओर निगाह बनाए रखना। यदि हम पहले राज और उसकी righteousness की खोज करें, तो परमेश्वर आवश्यक चीजों को हमारे लिए जोड़ेगा। यह विश्वास-आधारित जीवन का सरल, पर गहरा मार्ग है—ईश्वर पर निर्भरता और उसकी योजना पर दृढ़ विश्वास।

महत्वपूर्ण उद्धरणसूत्र— Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट उल्लेखित संकेतन मूल पाठ से सीधे उद्धरण नहीं दिए गए हैं, पर उनके प्रभावी विचार नीचे समाहित हैं: “राज्य की खोज” पर उनका समान दृष्टिकोण इस टिप्पणी में समाहित है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 12:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मत्ती 6:33 (HINIRV) »
इसलिए पहले तुम परमेश्‍वर के राज्य और धार्मिकता की खोज करो तो ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी। (लूका 12:31)

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इब्रानियों 13:5 (HINIRV) »
तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, “मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा।” (भज. 37:25, व्य. 31:8, यहो. 1:5)

1 राजाओं 3:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 राजाओं 3:11 (HINIRV) »
तब परमेश्‍वर ने उससे कहा, “इसलिए कि तूने यह वरदान माँगा है, और न तो दीर्घायु और न धन और न अपने शत्रुओं का नाश माँगा है, परन्तु समझने के विवेक का वरदान माँगा है इसलिए सुन,

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