लूका 12:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं तुम्हें चेतावनी देता हूँ कि तुम्हें किस से डरना चाहिए, मारने के बाद जिसको नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो; वरन् मैं तुम से कहता हूँ उसी से डरो।

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लूका 12:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 12:5 — तत्काल परिप्रेक्ष्य और आध्यात्मिक संदेश

स्थिति का संक्षेप: यीशु के शिष्य आने और उन पर होने वाले युद्ध या खतरे की संभावना के बीच, वे उनसे यह सीख देते हैं कि सही डर किस बात का होना चाहिए। पाठ दृढ़ चेतावनी देता है कि जो भय परमेश्वर के वचन और अधिकार के पक्ष में नहीं है, वह विनाशकारी परिणाम दे सकता है।

पवित्र प्रभु से डरा जाना: परमेश्वर का डर बनाम भय का भटकाव

यह वाक्य कहता है कि हमें “जिसको मारने के बाद नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो” और फिर स्पष्ट करता है: “वरन् मैं तुमसे कहता हूँ उसी से डरो।” यहाँ भय का केंद्र स्पष्ट है—भय परमेश्वर के न्याय और वास्तविक परिणाम से होना चाहिए, न कि मनुष्यों के साहस या संसार के दबावों से। यह डर केवल भय नहीं, बल्कि श्रद्धा, सम्मान और उन्नत नैतिकता की प्रेरणा है। यह पवित्र राज्य की वास्तविकता को याद दिलाता है कि परमेश्वर की अदालत अवश्य है और उसका निर्णय चिरस्थायित्वपूर्ण है।

आवश्यक शब्द और इमेजरी की स्पष्टीकरण

- नरक का अधिकार: यहाँ एक चेतावनी का चित्र है—ऐसा दंड जिसे केवल परमेश्वर ही लागू कर सकता है। यह उद्देश्य है कि मनुष्य अपनी सच्ची स्थिति और उत्तरदायित्व को समझे।
- डरने योग्य वही है जो योग्य दंड दे सकता है: यह अर्थ नहीं कि परमेश्वर हमें भय से दबाने की इच्छा रखते हैं, बल्कि यह कि उसकी पवित्रता और न्याय असमान्य रूप से शक्तिशाली है—हमारी जीवन-चयनाओं के लिए अंतिम मानदंड।

संदर्भ-नज़ाकत और क्रॉस-रेफरेंस

1) मत्ती 10:28: मानवों के शरीर से अधिक परमेश्वर के दण्ड और जीवन-मृत्यु के निर्णय की वास्तविकता पर बल देता है—पृथ्वी के नुकसान से भी अधिक परमेश्वर के न्याय का डर चाहिए।
2) फरीसियों के डर से शांति नहीं मिलती: कृपा और न्याय दोनों में संतुलन दिखाने वाला यह पाठ यह चयन देता है कि दुनिया के दबाव से नहीं, परमेश्वर के सत्य और आशीर्वाद से डरना चाहिए।
3) योहना 3:36 प्रकार के उद्धरण में स्पष्ट है कि परमेश्वर के पुत्र के प्रति विश्वास-प्रधान व्यवहार ही वास्तविक जीवन का मार्ग है।

विश्व-परिवर्तन के लिए आज का अनुप्रयोग

- हमारे भय का केंद्र निर्णय करें: क्या हम लोग-जनमत, सुरक्षा-यंत्र, या धन के भय से अधिक परमेश्वर के स्वर को सुनते हैं?
- नैतिक प्रतिज्ञा: अपने आचरण में सत्य, नैतिकता और दयाभाव को बनाए रखें, क्योंकि परमेश्वर का भय नियमों के भीतर जीवन देता है।
- आन्तरिक जीवन से बाह्य आत्म-नियमन: जब समाज और सांसारिक दबाव मजबूत हों, तब भी परमेश्वर की आवाज़ सुनना और उसी के अनुसार जीवन बनाना चाहिए।

इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke जैसे पुरातन ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के सिद्धांत मिलते-जुलते संकेत देते हैं कि भय परमेश्वर के न्याय और उसकी महिमा के अनुपात में होना चाहिए, न कि सांसारिक भय में। Henry कहते हैं कि डरना तभी उचित है जब डरना परमेश्वर के आदर्शों और न्याय से हो; Clarke और Barnes ने भी इसी दिशा में विस्तार किए हैं—परमेश्वर के प्रेम और न्याय का संतुलन बनाए रखना होता है।

सूक्ष्म उद्धरण (जहाँ उपलब्ध हो): यदि आप Henry, Barnes, या Clarke के ठोस वाक्यों के छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो नीचे के शब्दों पर देखें: “जो नरक का अधिकार रखता है, उसे डरो”—यह भाव Clarke के न्याय-बोध के अनुरूप है; Barnes और Henry भी एक ही धुरी पर कहते हैं कि परमेश्वर के डर का अर्थ निष्ठा और श्रद्धा से है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 12:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 पतरस 2:4 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 पतरस 2:4 (HINIRV) »
क्योंकि जब परमेश्‍वर ने उन दूतों को जिन्होंने पाप किया नहीं छोड़ा*, पर नरक में भेजकर अंधेरे कुण्डों में डाल दिया, ताकि न्याय के दिन तक बन्दी रहें।

मत्ती 10:28 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 10:28 (HINIRV) »
जो शरीर को मार सकते है, पर आत्मा को मार नहीं सकते, उनसे मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है।

प्रकाशितवाक्य 14:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 14:7 (HINIRV) »
और उसने बड़े शब्द से कहा, “परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसकी आराधना करो, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जल के सोते बनाए।” (नहे. 9:6, प्रका. 4:11)

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