Old Testament
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लूका 12:1 लूका 12:2 लूका 12:3 लूका 12:4 लूका 12:5 लूका 12:6 लूका 12:7 लूका 12:8 लूका 12:9 लूका 12:10 लूका 12:11 लूका 12:12 लूका 12:13 लूका 12:14 लूका 12:15 लूका 12:16 लूका 12:17 लूका 12:18 लूका 12:19 लूका 12:20 लूका 12:21 लूका 12:22 लूका 12:23 लूका 12:24 लूका 12:25 लूका 12:26 लूका 12:27 लूका 12:28 लूका 12:29 लूका 12:30 लूका 12:31 लूका 12:32 लूका 12:33 लूका 12:34 लूका 12:35 लूका 12:36 लूका 12:37 लूका 12:38 लूका 12:39 लूका 12:40 लूका 12:41 लूका 12:42 लूका 12:43 लूका 12:44 लूका 12:45 लूका 12:46 लूका 12:47 लूका 12:48 लूका 12:49 लूका 12:50 लूका 12:51 लूका 12:52 लूका 12:53 लूका 12:54 लूका 12:55 लूका 12:56 लूका 12:57 लूका 12:58 लूका 12:59



लूका 12:21 का संदेहपूर्ण धन-संग्रह: ऐसे ही वह मनुष्य
परिस्थितिक पृष्ठभूमि में, यीशु सीधे-सीधे इस बात पर ध्यान खींचते हैं कि धन का ढेर लगाना जीवन का उद्देश्य नहीं है। सत्ता-धन के पीछे भागना और अपनी आत्मा को जोखिम में डालना किस kö क्षण में एक भगोड़े की तरह बन सकता है? यीशु के वक्तव्य का केंद्र यह है कि जिनके दिल धन के पीछे धूम्र-ध्वनि करते हैं, वे परम पिता परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं माने जाते हैं।
ईश्वरीय दृष्टि और विश्वास का संदेश
वह शब्द – “ऐसा ही वह मनुष्य भी है” — हमें बताता है कि वित्तीय लाभ, सामाजिक स्थिति या व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए धन बटोरना यदि आत्म-जीवन का आधार बन जाए तो वह अकर्मण्य हो सकता है। धन के प्रति obsessive रवैया मनुष्य को ईश्वर से दूर कर सकता है, क्योंकि वास्तविक धनी वही है जो स्वयं परमेश्वर के साथ संबंध बनाये रखता है। इस पाठ के आधार पर ईश्वर की दृष्टि में धनी वही होता है जो सांसारिक संपत्ति से ऊपर परम विश्वास को प्राथमिकता देता है।
कुंजी शब्द और चित्रों की व्याख्या
संबद्ध पवित्र ग्रंथ संबंध
उद्धृत पाठ से जुड़े विचार अन्य स्तुतियों के संदर्भ में भी उठते हैं:
आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग
हम में से हर किसी के लिए यह प्रश्न है: क्या मैं धन को जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक साधन मानता हूँ? यहाँ संदेश स्पष्ट है—काम-धंधा और सुरक्षा की लालसा के बावजूद, अपने दिल को परमेश्वर की ओर मोड़ना, उसकी इच्छा के अनुसार जीवन जीना ही सच्चा धन है। जब हम निम्न बातों को अपनाते हैं, तो हम “धनी” हो जाते हैं:
इस पाठ के स्पष्ट संदेश के साथ, हम देख सकते हैं कि धन एक साधन है, एक परीक्षण नहीं—परमेश्वर के राज्य की प्राप्ति के लिए नित्या-निष्ठा और हृदय की वस्तुस्तुति आवश्यक है।
गतिशील उद्धरण (मेथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क)
जहाँ उपलब्ध पब्लिक-डॉमेन टिप्पणीकारों की सम्यक अर्थ-संजीप्तियाँ उद्धृत की जाती हैं, वहां उनसे प्रेरित विचार नीचे जोड़े गए हैं:
“धन को जोड़े रखना एक समय-पूर्वक संकट है; मनुष्य को चाहिए कि वह धन के कारण ईश्वर की दृष्टि से अपने सच को न खोए।”
“धनी वही है जो अपने हृदय को प्रभु के प्रेम से भरता है और अपने पदार्थों को दया-कार्य में लगाता है।”
उद्धृत आधिकारिक अंश (यदि उपलब्ध हो): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के विशिष्ट छोटे वाक्यों के उद्धरण यदि उपलब्ध मिले तो नीचे की पंक्तियों में दर्ज होंगे।
Cross-References: मत्ती 6:19-21; लूका 16:9; 1 तीमथियुस 6:17-19 — ये सभी एक ही धnoise को दोहराते हैं: धरती के धन से अधिक ईश्वर के राज्य का मूल्य है, और असली धनी वही है जो दया-कार्यों और विश्वास में स्थिर रहता है।