Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 12:1 लूका 12:2 लूका 12:3 लूका 12:4 लूका 12:5 लूका 12:6 लूका 12:7 लूका 12:8 लूका 12:9 लूका 12:10 लूका 12:11 लूका 12:12 लूका 12:13 लूका 12:14 लूका 12:15 लूका 12:16 लूका 12:17 लूका 12:18 लूका 12:19 लूका 12:20 लूका 12:21 लूका 12:22 लूका 12:23 लूका 12:24 लूका 12:25 लूका 12:26 लूका 12:27 लूका 12:28 लूका 12:29 लूका 12:30 लूका 12:31 लूका 12:32 लूका 12:33 लूका 12:34 लूका 12:35 लूका 12:36 लूका 12:37 लूका 12:38 लूका 12:39 लूका 12:40 लूका 12:41 लूका 12:42 लूका 12:43 लूका 12:44 लूका 12:45 लूका 12:46 लूका 12:47 लूका 12:48 लूका 12:49 लूका 12:50 लूका 12:51 लूका 12:52 लूका 12:53 लूका 12:54 लूका 12:55 लूका 12:56 लूका 12:57 लूका 12:58 लूका 12:59



लूका 12:28 पर टिप्पणी: संदर्भ में एक दृष्टि
यूहन्नी चेतावनियों के बीच यीशु अपने चेलों को दैनिक ज़रूरतों के बारे में भरोसा दिखाने की शिक्षा दे रहे हैं। इस verse में वह मैदान की घास से तुलना करते हैं और बताते हैं कि परमेश्वर पिता उन चीजों का भी ध्यान रखते हैं जो अभी दिखती हैं और जो कल दिखाई नहीं देतीं। इसका संदेश उसी समय के संदर्भ के साथ जुड़ा है जब लोग चिन्ता और ग़रीबी के कारण अपने जीवन की चिंता से घिरे रहते थे। यीशु यह स्थापित करते हैं कि परमेश्वर का राज्य और उसकी पवित्र आशा अधिक स्थिर और भरोसेमंद हैं, और हमें उसी पर निर्भर रहने की शिक्षा मिलती है।
मूल अर्थ और केंद्रीय संदेश
यूहन्नी दर्शाते हैं कि परमेश्वर घास को कैसे पहनाता है—आज है, कल वह भट्ठी में फेंकी जाएगी, फिर भी वह इसे कैसे धारण कराता है, यह उसकी योजना का हिस्सा है। उसी क्रम से यह कहा गया है कि अल्पविश्वासियों को क्यों चिंता है—क्योंकि पिता ने पहले से ही आदर्श और आवश्यक वस्तुएँ निर्धारित कर दी हैं। विभेद यह है कि परमेश्वर के साथ शरीर-भर की सुरक्षा नहीं, बल्कि आवश्यकताएँ पूरी करने की उसकी नित्यता और प्रेम है।
मुख्य विषय (2–3)
अनुदेशक विचार और पंछी-ओर पाठ
इस पाठ को पढ़ते समय 18वीं शताब्दी के टिप्पणीकारों की एक संयुक्त धारा यह है कि प्रभु का प्रेम दैनिक तथ्यों से ऊपर है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने दिखाया है कि शारीरिक चिंता के बजाय आत्मिक भरोसा बढ़ाना चाहिए, क्योंकि ईश्वर की देखभाल जीवन के हर चरण में है। उनके विचार इस बात को स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की देखरेख सिर्फ भौतिक स्तर पर नहीं, बल्कि हमारी आस्था और जीवन के उद्देश्य में भी है।
डायग्नोस्टिक टिप्पणी: “यहुक्त कहा गया है—यदि परमेश्वर मैदान की घास को ऐसा पहनाता है, तो अल्पविश्वासियों पर क्यों आशंकाएँ?” निजी सुरक्षा से अधिक वह हमें सोच-समझ के साथ जीवन के प्राथमिकताओं को समझने के लिए बुलाते हैं।
संबद्ध ग्रंथ – क्रॉस-रेफरेंसेस
1) मत्ती 6:25–34 — जीवन की चिन्ता से परमेश्वर की व्यवस्था की ओर दृष्टि मोड़ना; परमेश्वर के राज्य की खोज पहले, फिर बाकी सब दूँगा।
2) मarka 10:27 — मानव की क्षमता से परे, ईश्वर के काम के लिए विश्वास जरूरी है; वही परिप्रेक्ष्य यहाँ से मिलता है।
3) योहन 14:27 — शांति की गवाही: मेरे पास छोड़कर गया शांति नहीं, परन्तु जो दे रहा है, वह “शांति” है; चिंता के स्थान पर मैं आपको दे रहा हूँ।
व्यावहारिक विचार
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 12:28 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर हमारे हर आवश्यक को देखता है, और अल्पविश्वास के कारण अनावश्यक चिंता में पड़ना अनुचित है। यदि परमेश्वर मैदान की घास को पहनाता है, तो वह तुम्हें भी कैसे नहीं देगा? सत्य यह है कि ईश्वर की व्यवस्था हमारी भाग-दौड़ से ऊपर है, और हमारा उत्तर इस भरोसे में विकसित होना चाहिए कि वह हमारा पालन-पोषण करता है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से संदर्भ संक्षेप में सम्मिलित हैं; इनमें से कुछ बिंदु सीधे उद्धृत नहीं हैं, पर विचार उनकी स्पष्ट धारा से समाहित हैं।