मत्ती 14:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उससे कहा, “हे अल्प विश्वासी, तूने क्यों सन्देह किया?”

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मत्ती 14:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 14:31 पर टिप्पणी

पद का संदर्भ तत्काल घटनाक्रम—पेत्रुस को डूबते समय Jesus ने पकड़ लिया, और फिर उसे उसकी कमज़ोरी की जाँच करते हुए निर्देश दिया—के बीच एक शिक्षाप्रद मोड़ प्रस्तुत करता है। इस प्रसंग में यीशु नाव में चढ़े रहते हैं, पर पेत्रुस बादल पर विश्वास रखकर पानी पर चलने की कोशिश करता है; अवसर पर वह डगमगा कर डूबता है और यीशु उसकी मदद करते हैं। यह वचन उस समय की संदेहजनक स्थिति को उघाड़ता है जब शिष्य विश्वास के नन्हे अंश के कारण सफल हो पाते हैं, पर बिना दृढ़ विश्वास के वे ढह जाते हैं।

मुख्य अर्थ

यह वचन यीशु की दयालुता और शिष्य की आस्था में एक बार फिर鈥事ारीक” पुनरुत्थान दर्शाता है। अल्प विश्वासी से शिक्षा मिलती है कि भरोसा निर्मल रहे तो ही रास्तें खुलते हैं; संदेह आने पर यीशु तुरंत सहायता देते हैं। यहाँ “तूने क्यों सन्देह किया” से संकेत मिलता है कि धर्मयति में सतत विश्वास ही अस्थायी कठिनाइयों पर विजय देता है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • विश्वास बनाम संदेह: शिष्य ने घटती परिस्थितियों में टूटकर असंतोष व्यक्त किया; यीशु ने संकेत दिया कि सीमित आस्था भी चल अचल नहीं बन सकती—पर वह सहायता कर देते हैं।
  • यीशु की सक्रिय सहायता: संकट के समय यीशु का हाथ हमेशा सामने रहता है, जो विश्वास के साथ पुकारने पर ही सक्रिय होता है।
  • आस्था की नैतिकता: अनुभव से सीखना कि ईश्वर पर कुल निर्भरता ही जीवन के रास्ते खोलती है, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।

सम्बद्ध अंश (Cross-references)

1) मत्ती 8:26–27: भय और अशांति के समय यीशु कैसे कहकर चमत्कार दिखाते हैं—“तुम्हारे बीच विश्वास क्यों नहीं?” यह समान चित्रण है कि डर के बावजूद यीशु सहायता देते हैं।

2) मत्ती 14:28–31 (पूर्व दृश्य): पेत्रुस की पहली नाव-यात्रा और पानी पर चलना, जो विश्वास की हदें समझाने में सहायक है।

3) मरकुस 5:36 के परिवार-सम्बन्धी प्रसंग: यीशु के शब्द और विश्वास का नया आयाम, जो मौलिक आश्वासन देता है कि यीशु में समर्थ है भागना नहीं।

व्यावहारिक विचार

हमारे जीवन में बार-बार ऐसे अवसर आते हैं जब हमें डरावनी परिस्थितियाँ मिलती हैं—आर्थिक परेशानी, स्वास्थ्य परीक्षण, या व्यक्तिगत असुरक्षा। इस वचन से प्रेरणा मिलती है कि डर के क्षणों में भी प्रभु की सहायता हमारी ही है। अपने विश्वास के स्रोत को मजबूत बनाएं—पठना, प्रार्थना, और समुदाय के साथ चर्चा—ताकि संदेह के समय वह कमज़ोरी न बने, बल्कि एक मजबूत अंश बने।

संक्षिप्त निष्कर्ष

मत्ती 14:31 में यीशु के हाथ का स्पर्श बताता है कि ईश्वर की सहायता संदेह के बावजूद निकट है। अल्प विश्वास भी उद्धार का मार्ग खो सकता है, पर प्रभु की दया उसे संभाल लेती है। यह वचन विश्वास-यात्रा में निरंतर आग्रह और आश्वासन देता है कि हमारे संदेह के बीच भी यीशु हमारा हाथ थामते हैं और हमें स्थिर रखते हैं।

सम्बंधित टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संकेत:

मध्याह्न टिप्पणीकों के विचारों के अनुसार—Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रेरक अवतरणों का उपयोग संदर्भानुसार किया गया है; जहाँ उपयुक्त संकेत हैं, वहाँ उनके छोटे उद्धरण स्पष्ट रूप से बताये गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 14:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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पर विश्वास से माँगे, और कुछ सन्देह न करे; क्योंकि सन्देह करनेवाला समुद्र की लहर के समान है* जो हवा से बहती और उछलती है।

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चाहे मैं संकट के बीच में चलूँ तो भी तू मुझे सुरक्षित रखेगा, तू मेरे क्रोधित शत्रुओं के विरुद्ध हाथ बढ़ाएगा, और अपने दाहिने हाथ से मेरा उद्धार करेगा।

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उसने उनसे कहा, “हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो?” तब उसने उठकर आँधी और पानी को डाँटा, और सब शान्त हो गया।

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