Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 14:1 मत्ती 14:2 मत्ती 14:3 मत्ती 14:4 मत्ती 14:5 मत्ती 14:6 मत्ती 14:7 मत्ती 14:8 मत्ती 14:9 मत्ती 14:10 मत्ती 14:11 मत्ती 14:12 मत्ती 14:13 मत्ती 14:14 मत्ती 14:15 मत्ती 14:16 मत्ती 14:17 मत्ती 14:18 मत्ती 14:19 मत्ती 14:20 मत्ती 14:21 मत्ती 14:22 मत्ती 14:23 मत्ती 14:24 मत्ती 14:25 मत्ती 14:26 मत्ती 14:27 मत्ती 14:28 मत्ती 14:29 मत्ती 14:30 मत्ती 14:31 मत्ती 14:32 मत्ती 14:33 मत्ती 14:34 मत्ती 14:35 मत्ती 14:36



मत्ती 14:4 — संदर्भ संगत टिप्पणी
यह पाठ यूहन्ना the Baptist के साथ जुड़ी घटनाओं के बीच आता है। मसीह के वरिष्ठ प्रचारक, यूहन्ना बपतिशाला, रोम और यहूदिया की राजनीति से दूर एक साफ-सुथरे दबाव में अपना संदेश दे रहा था। किन्तु राजा हरोदेस के शासनकाल में यूहन्ना ने हरोदेस की एक अन्यायपूर्ण प्रथा पर चोट की थी—उसने कहा कि हरोदेस ने अपनी भाई की पत्नी के बारे में गलत रास्ता अपनाया है। इसी कारण यूहन्ना को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया गया। इस पंक्ति के सामने यह तथ्य है कि यूहन्ना ने कहा था, “इसको रखना तुझे उचित नहीं है” (यानी हरोदेस को यह बात समझाने के लिए कि उन दोनों के विवाह-सम्बन्ध के कारण परमेश्वर की इच्छा नहीं पूरी हो रही है)।
पाठ से निकलती गहरी सीख
यह छोटा पण स्पष्ट संकेत देता है कि परमेश्वर की हानि-भावना का उद्देश्य, सत्य के लिए कड़ी चेतावनी, और नैतिक प्रकटन एक साथ चलते हैं। भगवान सत्य के साथ खड़े रहते हैं—even जब समाज या राजकीय दबाव व्यापक हो। यदि प्रभु का संदेश चुनौतीपूर्ण हो, तो विश्वासियों के लिए भी सच के साथ खड़े होना महत्त्वपूर्ण बन जाता है।
महत्वपूर्ण शब्द एवं चिह्न
अन्य सम्बन्धित पाठ
- यशायाह और प्रेरितों के घंटों में भी धर्म-न्याय के लिए साहस दिखाने की मांग है; - מריה/यूहन्ना के अतीत के बारे में चलती परंपरा बताती है कि परमेश्वर सत्य और पवित्रता को सबसे ऊपर रखता है; - मत्ती 14:3-5 के संदर्भ में प्रभु-शासन के भीतर सत्य के विरुद्ध दबावों के विरुद्ध दृढ़ रहने का प्रमाण मिलता है।
आज के संदर्भ में प्रभाव
ईसाई जीवन में सत्य के लिए साहस जरूरी है—जब सामाजिक दबाव या लोकप्रिय भावना गलत मार्ग पर ले जाए तो व्यक्ति को सच बोलना और नीयत साफ रखना चाहिए। यह पाठ यह सिखाता है कि धार्मिक-आचार-विचार और नैतिकता राज-प्रशासन से ऊपर है; परंपरा और स्थिति के बावजूद परमेश्वर के सम्मुख Upright रहने की महत्ता बनी रहती है।
पड़ताल और क्रॉस-रेफरेंसे
- तुलना: मरकुस 6:18 में यूहन्ना के निष्कासन के कारण की चर्चा—यही नैतिकता के लिए खतरे को पहचानना।
- प्रेरितों 5:29 में परमेश्वर की योजना के विरुद्ध समाजिक दबाव में सच बोलने की प्रेरणा मिलती है।
- यूहन्ना 3:19-21 के प्रकाश में सत्यान्वेषण और आत्म-प्रकाशन की महत्ता समझ में आती है।
संक्षेप में: यह वाक्य यूहन्ना के बारे में एक नैतिक मोड़ का संकेत देता है—धर्मपथ पर सत्य और नैतिकता से समझौता न करते हुए, परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप जीवन बिताने की आवश्यकता।