Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 14:1 मत्ती 14:2 मत्ती 14:3 मत्ती 14:4 मत्ती 14:5 मत्ती 14:6 मत्ती 14:7 मत्ती 14:8 मत्ती 14:9 मत्ती 14:10 मत्ती 14:11 मत्ती 14:12 मत्ती 14:13 मत्ती 14:14 मत्ती 14:15 मत्ती 14:16 मत्ती 14:17 मत्ती 14:18 मत्ती 14:19 मत्ती 14:20 मत्ती 14:21 मत्ती 14:22 मत्ती 14:23 मत्ती 14:24 मत्ती 14:25 मत्ती 14:26 मत्ती 14:27 मत्ती 14:28 मत्ती 14:29 मत्ती 14:30 मत्ती 14:31 मत्ती 14:32 मत्ती 14:33 मत्ती 14:34 मत्ती 14:35 मत्ती 14:36



सीधे अर्थ का स्पष्टीकरण
मत्ती 14:9 में कहा गया है कि राजा दुःखित हुआ, पर अपनी शपथ के कारण और साथ बैठने वालों के अनुरोध के कारण, वह आदेश दे देता है कि जो वचन उसने दिया था वह पूरा किया जाए। इसका मतलब है कि राजा की सत्ता और सम्मान के सामने एक शपथ और सार्वजनिक वचन का पालन अनिवार्य माना गया, भले ही इसके परिणाम दुःखद हों।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वाक्य उस समय के दृश्य से जुड़ा है जब हरोड के राजा ने जॉन बपतिस्मा के सिर के बदले एक आवश्यक मांग की थी—यद्यपि यह अनुरोध पवित्रता के प्रतीक और न्याय के साथ मेल नहीं खाता था, फिर भी राजशाही की साख और शपथ की विश्वसनीयता को बनाए रखने हेतु उसने आदेश दिया। इस प्रसंग में यह दिखता है कि सत्ता के सामने एक सार्वजनिक वचन कितना मजबूत रहता है, भले ही वह विवेक या न्याय के विरुद्ध हो।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त थीमेटिक सूची
अनुक्रमित क्रॉस-रेफरेंसेज
1) राजाओं के वचन और उनकी महत्ता — देखें जोश 2:4; ये परिप्रेक्ष्य दिखाते हैं कि सार्वजनिक दायित्व कैसे व्यक्तिगत विवेक पर असर डालते हैं।
2) नैतिकता बनाम कानूनी दायित्व — देखें इब्रानियों 6:16; यह दिखाता है कि एक शपथ की पवित्रता कैसे उच्च मानवीय आचरण को निर्देशित करती है।
3) न्याय और दया की संतुलन— देखें मत्त 23:23; शपथ के दायित्व के साथ न्याय की आवश्यकता भी उभरती है।
प्रायोगिक takeaway
जहाँ भी लोग सार्वजनिक वचन देते हैं, वहाँ अनुशासन और जवाबदेही जरूरी है, पर साथ ही यह भी सुधार करता है कि कैसे नैतिक विवेक और सत्यनिष्ठा वास्तविक न्याय के साथ चलता है। व्यवहार में इसका अर्थ है—हम अपने शब्दों और अनुबंधों को गम्भीरता से लें, किन्तु कठिन समय में भी दया और न्याय के कारणों पर विचार करें, ताकि परिणाम कष्टदायक होते हुए भी सत्य और मर्यादा बनी रहे।
सूक्ष्म उद्धरण संकेत
यदि उपलब्ध हो, नीचेMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त, शाब्दिक प्रवचन से सीधे शब्द उद्धृत हो सकते हैं:
“King’s oath must stand, even when mercy would.” (उद्धृत-सीमा के भीतर संकेतिक सार)
नोट: ऊपर के संदर्भ में पात्र-उद्धरणों का संक्षेप का उल्लेख दिया गया है; वास्तविक पूर्ण उद्धरण केवल सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के भीतरी वाक्यों के अनुरूप प्रयुक्त हो सकते हैं।