मत्ती 14:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और वह उसे मार डालना चाहता था, पर लोगों से डरता था, क्योंकि वे उसे भविष्यद्वक्ता मानते थे।

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मत्ती 14:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 14:5 का संदर्भ और अर्थ (HINIRV)

पद में कहा गया है कि Herodus पिता के राजकुमार: ईसा के पहले के एक घटना में [यथार्थ संदर्भ: यह क्रियापद एक भिन्न प्रसंग से लिया गया है], हरदोस चाहता था उन्हें मार डालना, किन्तु समुदाय के लोग उन्हें भविष्यद्वक्ता मानते थे और इस कारण वह भय से चुप रहा। संदर्भ से संकेत मिलता है कि राजा का मन डर और राजनीतिक हितों के बीच तिरस्कृत हो रहा था; जनता की मान्यता और दबाव इस निर्णय पर प्रभाव डालते हैं कि कब और कैसे किसी को शत्रु के हाथों में जाना पड़ सकता है।

केंद्रीय अर्थ

पद दिखाता है कि एक व्यक्ति के पास हत्या करने की योजना थी, पर वह अपनी सुरक्षा के भय से रोक लिया गया। यह भय राजनीतिक दबाव और जनता की धारणाओं से प्रेरित था। यहाँ स्पष्ट है कि सौदेबाजी और सत्ता की राजनीति के बीच भविष्यद्वक्ता जैसी पहचान बदल जाती है—यानी लोगों की मान्यता और समुदाय की धारणाएं निर्णयों को संचालित कर सकती हैं।

मुख्य दो-तीन थीम

  • राजनीतिक दबाव बनाम नैतिक निर्णय: सत्ता-योजना के समय लोग कैसे विवेक से दूर रहते हैं।
  • जनता की प्रतिष्ठा और सुरक्षा की चिंता: मासूमों को बचाने की कोशिश बनाम सत्ता के हितों की चिंता।
  • भय और निर्णायक निर्णय: भय कैसे कार्रवाई को रोकता है या धक्का देता है।

संदर्भित बाइबल-पाठ/Cross-references

1) लुक 13:31-32 — प्रेरितों के समुदाय में सुरक्षा और संदेश की धारणाओं से प्रेरित कदम। छोटे-छोटे खतरे के बीच सचेत रहने की आवश्यकता दिखती है।

2) मत्ती 16:23 — प्रभु की पहचान और भय के संबंध की व्याख्या: सत्य के मार्ग में भय क्यों रोके जा सकता है, यह दिखता है कि किस प्रकार अपनी दृष्टि से सरकारें और सामाजिक दबाव प्रभु के कार्य में रुकावट डालते हैं।

3) मक्क 8:36 — जीवन के मूल्य और सत्ता के लाभ की तुलना: यदि मनुष्य सफलता के लिए सत्य से समझौता करे, तो वह क्या खो देता है।

व्यावहारिक प्रस्ताव

हमें सीख मिलती है कि भय की स्थिति में भी सत्य के प्रति निष्ठा बनाए रखना चाहिए। सामाजिक दबाव के सामने भी नैतिकता और दया की कसौटी पर खड़ा होना जरूरी है ताकि God's उद्देश्य प्रकट हो सके।

समापन सार

यह पंक्ति सत्ता, भय और जनसमूह की धारणाओं के साने एक छोटा सा दृश्य प्रस्तुत करती है: कब और कैसे एक नेता भविष्यद्वक्ता के स्थान पर खड़ा रहने का साहस खो देता है। प्रेरणा देती है कि सत्य के रास्ते पर खड़े रहने में सबसे बड़ी प्रेरणा लोगों की संख्या नहीं बल्कि ईश्वर की इच्छा होती है।

उद्धृत विचार (महत्वपूर्ण हवाला)

अगर आप मैाथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के छोटे-संदर्भ उद्धरण देखना चाहें तो वे इस तरह के नैतिक-राजनीतिक दबाव के moments में सत्य की रक्षा पर ध्यान देते हैं; किन्तु यहाँ सार यही है कि भय के कारण निर्णय कैसे प्रभावित होते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 14:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तो फिर क्यों गए थे? क्या किसी भविष्यद्वक्ता को देखने को? हाँ, मैं तुम से कहता हूँ, वरन् भविष्यद्वक्ता से भी बड़े को।

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और यदि कहें ‘मनुष्यों की ओर से’, तो हमें भीड़ का डर है, क्योंकि वे सब यूहन्ना को भविष्यद्वक्ता मानते हैं।”

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क्योंकि यूहन्ना धार्मिकता के मार्ग से तुम्हारे पास आया, और तुम ने उस पर विश्वास नहीं किया: पर चुंगी लेनेवालों और वेश्याओं ने उसका विश्वास किया: और तुम यह देखकर बाद में भी न पछताए कि उसका विश्वास कर लेते।

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