Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 12:1 लूका 12:2 लूका 12:3 लूका 12:4 लूका 12:5 लूका 12:6 लूका 12:7 लूका 12:8 लूका 12:9 लूका 12:10 लूका 12:11 लूका 12:12 लूका 12:13 लूका 12:14 लूका 12:15 लूका 12:16 लूका 12:17 लूका 12:18 लूका 12:19 लूका 12:20 लूका 12:21 लूका 12:22 लूका 12:23 लूका 12:24 लूका 12:25 लूका 12:26 लूका 12:27 लूका 12:28 लूका 12:29 लूका 12:30 लूका 12:31 लूका 12:32 लूका 12:33 लूका 12:34 लूका 12:35 लूका 12:36 लूका 12:37 लूका 12:38 लूका 12:39 लूका 12:40 लूका 12:41 लूका 12:42 लूका 12:43 लूका 12:44 लूका 12:45 लूका 12:46 लूका 12:47 लूका 12:48 लूका 12:49 लूका 12:50 लूका 12:51 लूका 12:52 लूका 12:53 लूका 12:54 लूका 12:55 लूका 12:56 लूका 12:57 लूका 12:58 लूका 12:59



कथ्य का सीधा अर्थ
लूका 12:56 में यीशुथर ने कहा: कपटी लोगों से यह प्रश्न उठता है — तुम धरती-आकाश के भेद जानते हो, पर इस युग के बारे में भेद क्यों नहीं सीखते? सरल शब्दों में, आंतरिक आत्मिक दृष्टि और समय-चिन्ता के बीच संतुलन की कमी की ओर इशारा है; वे बाहरी घटनाओं को पहचानते हैं, लेकिन उनके दिल इस युग के धार्मिक और नैतिक मूल्यांकन को समझ नहीं पाते.
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह उद्धरण लूका के Gospel में Jesus के teaching के क्रम से terkait है, जहाँ वह शास्त्रीय भेदभाव के खिलाफ चेतावनी देता है: योग्य अवसरों को पहचाने पर भी वे भविष्य के क्रिया-कलापों की समझ से चूक जाते हैं। यीशु अक्सर परिस्थितियों से संकेत लेकर लोगों के हृदय की स्थिति पर प्रकाश डालते थे, न कि केवल घटनाओं के पीछे के कारणों पर।
व्याख्यात्मक बिंदु
थीमैटिक नज़रिए के संकेत
यह दृष्य बताता है कि धार्मिक दृष्टि में स्पष्टता और समय-प्रबंधन का संगम आवश्यक है। ज्ञान के भौतिक आभास होने से परे, आत्मिक-नियंत्रण और प्रार्थना-धारणा में प्रगति होनी चाहिए।
संदर्भ-उद्धरण और उनके अर्थ
महत्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंसेस:
छोटी-सी व्यावहारिक निष्कर्ष
1) अपने दिल की सच्चाई पर नजर रखें—क्या आप बाहरी धार्मिक-कार्य से ज्यादा आंतरिक परिवर्तन को महत्व देते हैं? 2) समय-चिन्ता बनाम आत्मिक discernment: हर दिन की स्थितियों में परमेश्वर की योजनाओं को देखने की कोशिश करें। 3) खोज-यात्रा में नम्र रहें: गलतियों से सीखें, परन्तु नये पथ पर डटे रहें।
अनुशीलनात्मक पाठ
ईश्वर के प्रति सच्ची जागरूकता केवल घटनाओं के भेद से नहीं, बल्कि उनके पीछे की आस्था और नैतिक जवाबदेही से बनती है। धर्म-धारणाओं के साथ आत्मिक विवेक और प्रेम का जीवन जोड़े रखना आवश्यक है।
संक्षिप्त संदर्भ-विवेचन
यह पाठ भविष्य के धार्मिक-प्रवृत्ति के बारे में जागरूक रहने की जोर देता है: योग्यता के साथ समय की जिम्मेदारी समझना।
नोट: नीचे उद्धृत पुरुष-सम्पादन जो Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों से प्रेरित हैं, वे सीधे पाठ में संक्षेप रूप से समाहित हैं; वास्तविक शब्दों का संक्षेप और संकेत-उद्धरण नीचे नहीं दिया गया है ताकि मूल संदर्भ का सम्मान बना रहे।