Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 19:1 लूका 19:2 लूका 19:3 लूका 19:4 लूका 19:5 लूका 19:6 लूका 19:7 लूका 19:8 लूका 19:9 लूका 19:10 लूका 19:11 लूका 19:12 लूका 19:13 लूका 19:14 लूका 19:15 लूका 19:16 लूका 19:17 लूका 19:18 लूका 19:19 लूका 19:20 लूका 19:21 लूका 19:22 लूका 19:23 लूका 19:24 लूका 19:25 लूका 19:26 लूका 19:27 लूका 19:28 लूका 19:29 लूका 19:30 लूका 19:31 लूका 19:32 लूका 19:33 लूका 19:34 लूका 19:35 लूका 19:36 लूका 19:37 लूका 19:38 लूका 19:39 लूका 19:40 लूका 19:41 लूका 19:42 लूका 19:43 लूका 19:44 लूका 19:45 लूका 19:46 लूका 19:47 लूका 19:48



मुख्य व्याख्या बिंदु
लूका 19:42 में यीशु ने यरूशलेम के प्रति उनके अस्थिर मन की कड़ी निंदा की थी—तथा भविष्यवाणी की कि यदि वे तलाशी लेते और उनकी दृष्टि के पीछे की आत्मिक स्थिति को पहचान लेते, तो यह दिन उनके शांति के लिए मार्ग बन सकता था। किन्तु वे इस दिन को भी नहीं देख पाए, क्योंकि उनकी आँखों पर आन्तरिक अंधकार छाया हुआ था। यह वचन यह प्रकट करता है कि परमेश्वर की करुणा हर घड़ी उपलब्ध है, परन्तु कुशल की बातें समझने के लिए कुछ खुली आँखें चाहिए, और यह भी कि नीतियों के ढांचे में जीवन की सच्ची राह पथिक के दृष्टिकोण पर निर्भर करती है।
साहित्यिक संदर्भ
परिच्छेद के क्रम में लूका लेखक यरूशलेम की मंगलसूचना से लेकर मानव चित्त की निश्चयहीनता को उजागर करता है। यहाँ “कुशल की बातें जानता” का भाव दर्शाता है कि शास्त्र-वाचन, पूजा-क्रिया के बावजूद उपयोगी आत्मज्ञान तब मिलता है जब मन खुला और नम्र हो। अन्य पूर्व-निभात के अनुसार यह स्थिति परमेश्वर के समय-सार को पहचानने की विभीषिका है, जो मसीह के जन्म, पापी-प्रवृत्ति और उद्धार की दिशा में स्पष्ट संकेतों को महत्त्व देता है।
प्रश्नात्मक संदर्भ (थीम) और थियोलॉजी
खण्ड-आधार और प्राचीन टिप्पणीकारों से सार
मैथ्यू हेनरी और अॅल्बर्ट बार्न्स जैसी पवित्र-ग्रंथ-व्याख्याओं के संकलन में यह स्पष्ट होता है कि बाह्य धार्मिकता से अधिक आंतरिक दृष्टि चाहिए। किन्तु वे यह भी मानते हैं कि ज्योति तब मिलती है जब आँखे और दिल सही ढंग से परमेश्वर के समय के अनुरूप मिलते हैं। एडम क्लार्क और अन्य सत्यान्वेषी टिप्पणीकारों के अनुसार, यहाँ “यही दिन” को भौतिक दिन के रूप में नहीं बल्कि ईश्वर के कल-कार्य के अवसर के रूप में पढ़ना चाहिए। नीचे उद्धृत संक्षिप्त संकेत, जो इन विचारों को जोड़े रखते हैं, नोट करें:
“कुशल की बातें जानता” — यह अल्पवाक्य दर्शाता है कि लोगों के पास आत्मिक समझ के लिए तैयार-भाव होना चाहिए; अन्यथा वे अपने रोज़मर्रा के ढांचे में ही फंसे रहते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त अर्थ
यशयाह 6:9-10 — दिखती बाधाओं के बावजूद यह संकेत देता है कि परमेश्वर की चेतावनियाँ हर जगह नहीं पहुँचतीं जब चित्त शीत और विवेकहीन रहता है। लुका 13:34-35 के समान चेतावनी भी उसी धूसर आत्मा की ओर इशारा करती है। व्यवस्थावली लोक-प्रयोजन के भीतर से, मत्ती 23:37-39 का उदाहरण दिखाता है कि नीतियों के बावजूद लोग उद्धार के लिए खुला नहीं रहते।
सोच-विचार के लिए प्रश्न
निष्कर्ष
यह पाठ स्मरण कराता है कि ईश्वर का दिन और अवसर हर घड़ी में उपलब्ध है, यदि हम खुली आँखों और नम दिल से उसे देखते हैं। धार्मिक आचरण से ऊपर, आत्मिक जागरुकता और ईश्वर के समय-समझ की खोज महत्वपूर्ण है। जैसे Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke ने संकेत किया है, विचार-चेतना में परिवर्तन से ही भक्ति और उद्धार की वास्तविक रोशनी मिलती है।