Old Testament
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लूका 19:1 लूका 19:2 लूका 19:3 लूका 19:4 लूका 19:5 लूका 19:6 लूका 19:7 लूका 19:8 लूका 19:9 लूका 19:10 लूका 19:11 लूका 19:12 लूका 19:13 लूका 19:14 लूका 19:15 लूका 19:16 लूका 19:17 लूका 19:18 लूका 19:19 लूका 19:20 लूका 19:21 लूका 19:22 लूका 19:23 लूका 19:24 लूका 19:25 लूका 19:26 लूका 19:27 लूका 19:28 लूका 19:29 लूका 19:30 लूका 19:31 लूका 19:32 लूका 19:33 लूका 19:34 लूका 19:35 लूका 19:36 लूका 19:37 लूका 19:38 लूका 19:39 लूका 19:40 लूका 19:41 लूका 19:42 लूका 19:43 लूका 19:44 लूका 19:45 लूका 19:46 लूका 19:47 लूका 19:48



सीधा अर्थ: जिसके पास है उसे और दिया जाएगा
लूका 19:26 का सार यह है: अवसर और प्रतिभा जो हमारे पास है, उसे और बढ़ना चाहिए; जो अपने पास है उसे खो सकता है। यीशु ने यह कहावत तब कही जब उसने दानवों के विरुद्ध हुए लोगों का एकाधिकार खो दिया था—बिलकुल वही परिदृश्य जिसे पहचाना गया: जो विश्वास और निर्भरता के साथ पालन करते हैं, वे बढ़ते हैं; जो नहीं करते, उनके पास जो है उसे भी छीना जाएगा। यह शिक्षण न केवल संपत्ति या शक्ति पर लागू होता है, बल्कि आत्मिक उपलब्धियों, विश्वास, और सेवा के अवसरों पर भी लागू है।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
ईसा मसीह ने इस कथा में एक गाँव के एक आदमी के धनुषीय अधिकार के साथ व्यवहार किया। वे भीड़ के सामने सत्यापित करते हैं कि दाऊदी, कृपा और जिम्मेदारी एक-दूसरे से जुड़े हैं। जो कुछ दिया गया है, उसे मौक़े पर चलकर देवत्व के अनुसार उपयोग करना होगा; अन्यथा, क्षय और नुकसान हो सकता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमैटिक सूची
अनुदेशात्मक cross-references
- मत्ती 25:14-30: दासों के किरदार और उन्नति/नुकसान के सिद्धांत को जोड़कर देखा गया है कि किस प्रकार परमेश्वर के साथ जिम्मेदारी का व्यवहार किया जाता है। यह कथा भी एक समान सिद्धांत प्रस्तुत करती है: मिलने वाले अवसरों का सही प्रयोग ही फल देता है।
- लूका 8:18: आंखें खुली रहें, ताकि हम सुनें, समझें और अभ्यास करें; जो कुछ हमारे पास है उसका प्रभावी उपयोग आवश्यक है।
- 2 कुरिन्थियों 9:6-7: उदारता और जिम्मेदारी के साथ दी गई चीज़ें आगे बढ़ती हैं; ये धन्यता और विश्वास की वृद्धि का कारण बनती हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे पास जो दिया गया है—आत्मिक आस्था, समय, अवसर, और योग्यताओं—उन्हें विकसित करने और सेवा के मार्ग में लगाते रहने से ही इनमें वृद्धि होती है। असफलता तब होती है जब हम अवसरों को तुच्छ समझते हैं या डर से निष्क्रिय रहते हैं। प्रभु के राज्य के लिए तत्परता और निष्ठा ही वास्तविक सफलता है।
नज़दीकी पाठ के संकेत
यह पाठ प्रेरणा देता है कि ईश्वर की कृपा के प्रति हमारी प्रतिक्रिया मायने रखती है: वह हमें अधिक देगा यदि हम अपेक्षित जिम्मेदारियों को निभाते हैं; और जो नहीं करेगा, वह खो सकता है। यह हमारे दैनिक चरित्र, सेवा-उद्धार और समुदाय के लिए हमारी सहभागिता पर भी लागू होता है।
नोट: इस पाठ पर चर्चित पुराने टिप्पणीकारों के सार: मथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क से प्राप्त बिंदु संकेतित हैं—यहॉं उद्धृत वाक्यों के संक्षेप संस्करण थे: “जो जो दे रखा है, वही बढ़ेगा; जो कम करे, उसे भी घट जाएगा।”