लूका 12:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“परन्तु मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूँ, कि जो शरीर को मार सकते हैं और उससे ज्यादा और कुछ नहीं कर सकते, उनसे मत डरो।

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लूका 12:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य विचार

लूका 12:4 में यीशु शिष्यों के सामने ऐसी दृढ़ वचन रखते हैं कि भयजनक परिस्थितियों के बावजूद सांसारिक प्रतिशोध या शरीर की धमकी से परमपिता के पुत्र के विश्वास को न डगमगाने दें। वह कहते हैं कि जो शरीर को मार सकते हैं और उससे अधिक कुछ नहीं कर सकते, उनसे भय क्यों? हमारे जीवन का सार परमेश्वर के हाथ में है; उसकी गरिमा के कारण हमें ईश्वर के भय और दया के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहिए।

पाठ-संदर्भ का साहित्यिक संदर्भ

यह वाक्य लूका के गॉस्पेल की परिस्थितिजन्य बातें हैं—यानी यीशु ने अपने शिष्यों को उन स्थितियों के लिए तैयार किया जब वे बहुविध विरोध और डर से घिरे हों। लूका गॉस्पेल में यह शिक्षा बहुधा भय-परिहार, न्याय और विश्वसनीयता पर केंद्रित है। इस संदर्भ में Jesus एक व्यक्तिगत, मित्रवत संबोधन में कहते हैं—“परन्तु मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूँ”—जो उनका संबंध न केवल कौमार्य-धारण से है, बल्कि एक परिवारिक, आत्मीय बंधन से है।

तेल अविश्वास और भय पर theological significance

मुख्य विचार यह है कि जीवित परमेश्वर के सामने भय का स्थान कम होना चाहिए। मनुष्य की सुरक्षा सापेक्ष है, पर परमेश्वर की सुरक्षा अनंत है। यीशु का उद्देश्य यह है कि शत्रुओं के भय, शोर-शराबे, या शरीर के नुकसान से हमारे आंतरिक विश्वास कमजोर न पड़े। यह संदेश 1) दासता-भय से मुक्ति का आह्वान है, 2) विश्वास की स्थिरता की पुष्टि है, और 3) परमेश्वर की सत्ता व प्रेम की गहराई का आश्वासन है। ऐसी स्थिति में भी निष्ठा बनाए रखना ईश्वर के धर्म के अनुरूप है।

पवित्र शास्त्रों के बीच संबंध

- अस्थाई जीवन की चिंता बनाम अनंत जीवन: अन्यत्र लिखा गया है कि सांसारिक चोटों से भी अधिक महत्वपूर्ण वे चीज़ें हैं जो आत्मा के लिए जीवन देती हैं।

- विश्वास-प्रेरणा: शत्रुओं के भय पर जीत परमेश्वर के प्रेम से मिलती है और मसीह में विश्राम पाती है।

- दया और प्रेम के साथ अनुशासन: शत्रुओं के लिए दया, पर भय के समय में भी सावधानी और आत्म-विश्वास बनाए रखने की सीख मिलती है।

आत्म-संवर्धन के लिए प्रश्न

  • ऐसी कौन-सी परिस्थितियाँ हैं जहां मुझे डर लग रहा है, और मैं उन्हें कैसे ईश्वर के आशीर्वाद के प्रकाश में देख सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं अपने दिल में ईश्वर के प्रेम को इतनी गहराई से मानता/मानती हूँ कि किसी व्यक्ति 또는 परिस्थिति के कारण मेरा आस्था-विश्वास डगमगा न जाए?
  • मेरे आचार-व्यवहार में क्या ऐसे संकेत हैं जो कहें कि मैं सांसारिक सुरक्षा से अधिक परमेश्वर की सुरक्षा पर टिके हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह वचन हमें बताता है कि मसीह के मित्र होने के नाते भय के समय भी साहस, विश्वास और नम्रता के साथ जीना चाहिए। संसार की धमकियाँ क्षणिक हैं; परमेश्वर की दृष्टि में हमारा जीवन वह अमूल्य है जिसे वह अपने प्रेम से सम्हालते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षिप्त उल्लेख)

- मत्ती 10:28: शरीर और आत्मा दोनों की सुरक्षा के महत्त्व पर विचार।

- युवा ईशावस्था 4:18: अंधकार में भी प्रकाश की आहट, विश्वास की ज्योति बनी रहे।

इन संदर्भों में भय पर विजय और परमेश्वर की सुरक्षा के गुणों को एक साथ देखना संभव है:

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 12:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जो शरीर को मार सकते है, पर आत्मा को मार नहीं सकते, उनसे मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है।

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तू उनसे भयभीत न होना, क्योंकि तुझे छुड़ाने के लिये मैं तेरे साथ हूँ, यहोवा की यही वाणी है।” (प्रेरि. 26:17, प्रेरि. 18:9,10)

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जो दुःख तुझको झेलने होंगे, उनसे मत डर: क्योंकि, शैतान तुम में से कुछ को जेलखाने में डालने पर है ताकि तुम परखे जाओ; और तुम्हें दस दिन तक क्लेश उठाना होगा। प्राण देने तक विश्वासयोग्य रह; तो मैं तुझे जीवन का मुकुट दूँगा। (याकू. 1:12)

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