Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 6:1 मत्ती 6:2 मत्ती 6:3 मत्ती 6:4 मत्ती 6:5 मत्ती 6:6 मत्ती 6:7 मत्ती 6:8 मत्ती 6:9 मत्ती 6:10 मत्ती 6:11 मत्ती 6:12 मत्ती 6:13 मत्ती 6:14 मत्ती 6:15 मत्ती 6:16 मत्ती 6:17 मत्ती 6:18 मत्ती 6:19 मत्ती 6:20 मत्ती 6:21 मत्ती 6:22 मत्ती 6:23 मत्ती 6:24 मत्ती 6:25 मत्ती 6:26 मत्ती 6:27 मत्ती 6:28 मत्ती 6:29 मत्ती 6:30 मत्ती 6:31 मत्ती 6:32 मत्ती 6:33 मत्ती 6:34



पाठ-सार और परिप्रेक्ष्य (मत्ती 6:13)
यह वचन प्रभु यीशु ने शिक्षा-प्रारम्भ के साथ दिया है, ताकि पाठक अपने प्रार्थना-जीवन में सांसारिक आवेगों से ऊपर उठकर परम पिता की योजना के अनुसार जी सके. आगे की दया, दया और विनम्रता के साथ, यह नम्रता की पहचान कराता है कि किस प्रकार संसार-संरचना में भी ईश्वर के राज्य के लिए आस्था और रक्षा आवश्यक है.
पद-वाचन में चकमक शब्द और चिह्न
“और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही है।” आमीन।
मुख्य विचार
इस एक वाक्य में तीन अनिवार्य उपहार मिलते हैं: (1) परीक्षा से बचाने की प्रार्थना, (2) बुराई से रक्षा की याचना, और (3) परम सत्ता की स्थिरता पर अटल विश्वास. यीशु शिष्य-प्रार्थना में यह दिखाते हैं कि जीवन के कठिन क्षणों में किस प्रकार परम पिता के संरक्षण और कृपा पर निर्भर रहना चाहिए. शब्द “राज्य” (राज्य) और “पराक्रम” (शक्ति) एक साथ इशारे करते हैं कि ईश्वर के राज्य की सत्ता ही सभी शक्तियों से ऊपर है; “महिमा” उसका सम्मान और महिमा है जो निरंतर उसकााधिकार है.
अन्य शास्त्रों के साथ तुलना
इन संदर्भों से समझ आता है कि यह प्रार्थना सिर्फ संकट से बचाव की मांग नहीं, बल्कि परमेश्वर की सत्ता के सामने हमारी क्रमबद्धता और विश्वास की पुष्टि है.
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
मत्ती 6:13 हमें यह आत्म-धारणा देता है कि शत्रुओं के प्रयासों से हमारी रक्षा केवल परम पिता की कृपा से होती है, और ईश्वर के राज्य-कार्य की महिमा सदा उसके ही हाथों में है. हमें परीक्षा से डरना नहीं चाहिए, बल्कि दर्शन-प्रत्यक्ष के साथ विनती करनी चाहिए—पवित्र और सुरक्षित राह पर टिके रहें.
सूक्ष्म उद्धरण—महत्वपूर्ण स्वर
ऑन-लाइन पाठ-रेखाओं से प्राप्त हल्के-फुल्के उद्धरणों में, Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट संक्षेपल उद्धरण इस पंक्ति में उपलब्ध नहीं हैं; यदि आप चाहें, मैं उनके संपूर्ण उपकरणों से आधारित संकेत दे सकता हूँ।
2-3 क्रॉस-रेफरेंसेज
याकूब 1:12 — धैर्य और पुरस्कार; परीक्षा पर विजय की आशा. रोम 8:31-39 — खतरे के बीच भी ईश्वर की सहायता और प्रेम की सुरक्षा. यशायाह 41:10 — परमेश्वर की उपस्थिति तथा साहस बखानती है.