Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 6:1 मत्ती 6:2 मत्ती 6:3 मत्ती 6:4 मत्ती 6:5 मत्ती 6:6 मत्ती 6:7 मत्ती 6:8 मत्ती 6:9 मत्ती 6:10 मत्ती 6:11 मत्ती 6:12 मत्ती 6:13 मत्ती 6:14 मत्ती 6:15 मत्ती 6:16 मत्ती 6:17 मत्ती 6:18 मत्ती 6:19 मत्ती 6:20 मत्ती 6:21 मत्ती 6:22 मत्ती 6:23 मत्ती 6:24 मत्ती 6:25 मत्ती 6:26 मत्ती 6:27 मत्ती 6:28 मत्ती 6:29 मत्ती 6:30 मत्ती 6:31 मत्ती 6:32 मत्ती 6:33 मत्ती 6:34



यूहन्ना-जीवित नहीं, बल्कि प्रार्थना का प्रारम्भिक उद्देश्य
सीधी भाषा में अर्थ: मत्ती 6:9 में यीशु हमें कहता है कि आरती-रीति के अनुसार प्रार्थना करनी चाहिए—पहचानिये कि परम पिता स्वर्ग में हैं, और उनके नाम की पवित्रता पहली प्राथमिकता है। यह प्रार्थना परमेश्वर के साथ एक समीप संबंध की शुरुआत है, न कि शब्दों का जंजाल या दिखावा।
संदर्भ-विवेचना
यह श Igreja Sermon on the Mount का आरम्भिक प्रार्थना-खंड है। प्रार्थना के लिए यह एक मॉडल है, जिसमें पूर्वकथित व्यवस्था के भीतर हर प्रकार की आत्म-प्रशंसा-आधारित प्रार्थना से बचने की चेतावनी भी शामिल है। लूका के गाथा अनुसार यह वही बात है जो प्रत्यक्ष रूप से छः क्षेत्रों में दिखाती है: निष्ठा, प्रभुता, और पवित्रता।
interpretive observations
संघर्षपूर्ण कहानियाँ और पुरालेखीय संदर्भ
यह मानक प्रार्थना-प्रारंभ है जिसे यीशु ने अपने अनुयायियों को सिखाया। मैथ्यू हेनरी आदि का संकेत देता है कि Pray to the Father with reverence, seeking God’s glory before personal needs. उदाहरण के तौर पर, अन्य प्राचीन टिप्पणीकारों ने यह समझाया है कि यहाँ प्रार्थना के ढांचे में God’s name, Kingdom, और will की प्राथमिकताएं प्रमुख हैं।
संलग्न विचार-स्तंभ
Cross-references (संक्षिप्त व्याख्या)
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
हम प्रार्थना में पहले परमेश्वर की महिमा और स्वर्गीय सत्ता को याद करें, फिर अपने आवश्यकताओं को तटस्थ और विनम्र ढंग से रखें। हृदय में यह संगति बनी रहे कि हमारा लक्ष्य वही हो जो परमेश्वर की इच्छा है, न कि केवल अपनी मांगों की पूरा करना।
संक्षेप में: प्रभु के नाम की पवित्रता को प्रार्थना का आरम्भ बनाते हुए, हमारा संबंध पिता के साथ मजबूत हो, और परम सत्ता के साथ सभी योजनाओं की क्रमिकी बनी रहे।
सूच्य उद्धरण: हेनरी, Barnes और Clarke के स्पष्ट वाक्यों की संक्षिप्त व्याख्या नीचे दी गई है, यदि उपलब्ध हों तो:
मैथ्यू हेनरी से निष्कर्ष: “Pray to the Father with reverence, seeking God’s glory before personal needs.”