मत्ती 6:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर और दूसरे से प्रेम रखेगा, या एक से निष्ठावान रहेगा और दूसरे का तिरस्कार करेगा। तुम परमेश्‍वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।

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मत्ती 6:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्थाय 6:24 का स्पष्ट सार: एक ही समय में दो स्वामियों की सेवा नहीं संभव

इस वचन का सीधा अर्थ है: ईश्वर और धन—दो विरोधी स्वामियों—की सेवा एक साथ नहीं की जा सकती। एक का प्रियतम होने पर दूसरा विरोधी बन जाता है; जहाँ एक पर भरोसा होगा, वहाँ दूसरा आकर्षण पीछे छोड़ देता है। यीशु का यह उपदेश हमारे दिल की आसक्ति के एक निर्णायक परीक्षण को दर्शाता है: कौन हमारा प्रमुख स्वामी है?

संदर्भ-परिसर और पृष्ठभूमि

यह शिक्षण प्रत्यक्ष रूप से पहाड़ के उपदेशों का भाग है, जहाँ यीशु अपने शिष्यों को आंतरिक जीवन की वास्तविकताएँ सिखाते हैं। उस समय समाज में धन की महत्ता और भय-भरा भय था कि धन सुरक्षित भविष्य की कुंजी है; इसलिए यह चेतावनी अत्यंत प्रासंगिक है कि धन के साथ ईश्वर के साथ हमारी निष्ठा कैसे बनी रहे।

व्याख्या के प्रमुख बिंदु

  • धन से निष्ठा तनाव बन सकता है: समृद्धि से मिलने वाले अधिकार और सुरक्षा के मोह से दिल divided हो जाते हैं—हम परमेश्वर के साथ एकता नहीं रख पाते।
  • ध्येय-संयम का परीक्षण: हर दिन के निर्णयों में यह देखना पड़ता है कि किस स्वामी के नियम हमारे व्यवहार के पीछे हैं—इसी से हमारा चरित्र प्रकाशित होता है।
  • व्यावहारिक नीतian: परमेश्वर को सर्वोपरि मानना और धन को उसके नीचे रखना ही वास्तविक भक्तिक स्वस्थाता है।

गंभीर लेकिन संपूर्ण संदर्भ: संदर्भित विचार

यह शिक्षा Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के टिप्पणी-पत्रों के सामान्य निष्कर्षों से संगति रखती है: धन के लिए अत्यधिक लालसा स्वर्गीय शासक के साथ भिन्न दायित्व बनाती है; इसलिए आस्था का एकत्रीकरण और ईश्वर-उपासना प्राथमिकता चाहिए।

क्रॉस-रेफरेंस (संकेत-भरपूर संकाय):

• लूकस 16:13—जो कहता है कि कोई दूसरा स्वामी नहीं, क्योंकि एक को υπηρεना चाहिए; स्वार्थी ప్రేమ ईश्वर-परायणता से टकराती है।

• 1 तिमथियो 6:10—लालच के कारण मार्ग का पथ भ्रष्ट होता है; धन का प्रेम ही सब बुराइयों का मूल है।

• याकूब 5:1-3—अत्यधिक धन-संग्रह के अस्थायित्व और अंततः दीन-हीन लोगों के लिए निष्काम सेवा की कमी पर चिंता बताता है।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

हमारे दिल की प्राथमिकता निर्धारित करें: परमेश्वर के राज्य की नैतिकता और प्रेम को अपनी आय-व्यय, समय-समाज, और प्राथमिकताओं में सर्वोच्च बनाएं। धन के लाभ के बजाय ईश्वर के राज के लक्ष्य को उठाने का प्रयास करें; ताकि दैनिक निर्णयों में विश्वास, ईमानदारी और दया का संतुलन बना रहे।

संक्षेपित टिप्पणी-नोट्स

यदि आप किसी दार्शनिक-धर्मशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य से उद्धृत संकेत खोजेंगे, तो ये विचार मिलते-जुलते दिखेंगे: धन से प्रेरित निर्णयों में ईश्वर के निर्देशों से विचलन हो सकता है; अतः आध्यात्मिकता की गहराई के लिए हमें दृढ़ता और संतुलन की आवश्यकता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 6:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“कोई दास दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता क्योंकि वह तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम रखेगा; या एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा: तुम परमेश्‍वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।”

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तुम न तो संसार से और न संसार की वस्तुओं से प्रेम रखो यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।

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हे व्यभिचारिणियों*, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्‍वर से बैर करना है? इसलिए जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्‍वर का बैरी बनाता है। (1 यूह. 2:15-16)

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