Old Testament
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परन्तु यदि तेरी आँख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अंधियारा होगा
यह वाक्य प्रस्तुत मत्ती 6:23 में उन निर्देशों का एक भाग है जो यीशु ने चापलूसी, धुएँ वाले दिखावे और वास्तविक हृदय-नीति के बीच फर्क समझाने के लिए दिए। अंधकार और उजाला की यह वेदना सिर्फ भौतिक दृश्य नहीं, बल्कि मनुष्य के विचारों, आशाओं और कर्मों के केंद्र के भीतर गहराई से जुड़ी हुई है। नीचे एक सुसंगत प्रवाह में चर्चा है ताकि पाठक इसका आत्मिक महत्त्व समझ सके।
पद का संदर्भ और अध्याय का क्रम
यह पद मत्ती 6 में आया है, जहां यीशु पाखण्ड के विरुद्ध सचेत करते हैं—खासकर धार्मिक रीति-रिवाजों को दिखावे के लिए करने की प्रवृत्ति। अध्याय के पहले भाग में करुणामय दयालुता, प्रार्थना और उपवास की सामान्यता पर स्पष्ट मार्गदर्शन है; अब यहाँ आँख की दृष्टि और हमारे आंतरिक व्यक्ति के प्रकाश-अंधकार की चुनौती दी जाती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य आयतों के साथ तुलनात्मक दृष्टिकोण
— माथे के प्रकाश के बारे में यूँ ही नहीं कहा गया: जब मन में परिशुद्ध प्रेम और सत्य नहीं, तब कर्म पर अंधकार आकार ले सकता है (यशायाह 6:2-3 के प्रकाश-आशय से सहायता मिलती है).
— याकूब 1:8 का प्रयोग करता है जो एक मन seule-doubt की स्थिति को अलग करता है, और बताता है कि विवेकपूर्ण आस्था एकमत नहीं है।
— 2 कुरिन्थियों 4:6 में उद्धारक प्रकाश का आत्मा-प्रकाशन उल्लेख है, जो अंधकार पर विजय दिखाता है, यदिहमें वास्तविक दृष्टि दी जाए।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
पैरोकार संदेश का संक्षेप
यह पद हमें याद दिलाता है कि आंतरिक उजाला सचेत रहने पर ही स्थिर रहता है। अगर आँख बुरी है, तो प्रकाश भी एक ढांचा बनकर अंधकार का हिस्सा बन सकता है। इसलिए ईश्वर के साथ ईमानदार यथार्थता अपेक्षित है: दिल में प्रत्यक्ष प्रकाश डालना, और दिखावे के पीछे न छिपना।
cross-references और उनके संक्षेप
— मत्ती 5:14-16:真 प्रकाश का परिवार—तुम एक नगर हो जो ऊँचे पर्वत पर बना है; तुम्हारा उजाला दूसरों को निर्देशित करे।
— रोम 12:2: संसार के ढंग से ढलना नहीं, परन्तु मन से परिवर्तन होकर सत्य-अनुरूप नवीन होना।
— यिर्मयाह 17:9: मन का विचार बुरा है, परन्तु परमेश्वर दिल की चोट को भी देखता है और बदलाव का मार्ग दिखाता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस Vers के द्वारा यीशु दिखाते हैं कि वास्तविक उजाला हृदय की पवित्रता से आता है; अगर आँख बुरी रहे तो समस्त कर्म अन्धकार में डूब सकता है। हमें कृपा से अपनी प्रेरणाओं की जाँच करनी चाहिए और भीतर के प्रकाश को बढ़ाने के लिए परमेश्वर की ओर गहराई से मुड़ना चाहिए।
उद्धरण में जो सार सीधे रूप से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से लिया गया हो, उनके मूल सार को संदर्भित किया गया है; यदि किसी विशेष पंक्ति का सटीक छोटा उद्धरण इन लेखकों से मिल रहा हो, वही नीचे उद्धृत किया जा सकता है: "..."