Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 3:1 1 कुरिन्थियों 3:2 1 कुरिन्थियों 3:3 1 कुरिन्थियों 3:4 1 कुरिन्थियों 3:5 1 कुरिन्थियों 3:6 1 कुरिन्थियों 3:7 1 कुरिन्थियों 3:8 1 कुरिन्थियों 3:9 1 कुरिन्थियों 3:10 1 कुरिन्थियों 3:11 1 कुरिन्थियों 3:12 1 कुरिन्थियों 3:13 1 कुरिन्थियों 3:14 1 कुरिन्थियों 3:15 1 कुरिन्थियों 3:16 1 कुरिन्थियों 3:17 1 कुरिन्थियों 3:18 1 कुरिन्थियों 3:19 1 कुरिन्थियों 3:20 1 कुरिन्थियों 3:21 1 कुरिन्थियों 3:22 1 कुरिन्थियों 3:23



अर्थ का सीधे शब्दों में सार
1 कुरिन्थियों 3:18 में कहा गया है कि आत्म-प्रतीति से भरोसा करना धोखा है। जो लोग इस संसार में अपने आप को ज्ञानी समझते हैं, वे सचमुच मूर्ख बन जाते हैं ताकि वे वास्तव में ज्ञानी बनें। इसका तात्पर्य है कि मसीही जीवन में परमेश्वर की बुद्धि और क्रुर्तियाँ मानना सबसे अच्छी बुद्धि है; अपने-आप को महान समझना आत्म-विश्वास में अंधापन बन सकता है, और परमेश्वर की दृष्टि से मूर्खता बन जाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ 1 कुरिन्थियों के समुदाय के भीतर वैचारिक विभाजनों और “ज्ञानी” बन बैठे विश्वासियों के बारे में है। पॉल बताता है कि ईसाई ज्ञान असली ज्ञान नहीं है जब तक वह प्रभु की क्रूस पर निर्भरता और जिनमें आध्यात्मिक जीवन है, उनके अनुरूप न हो। यह ईसाई जीवन के मूल मूल्यों—क्रूस, पवित्र आत्मा का संचालन, और प्रभु के लिए सेवा—की परंपरा पर प्रकाश डालता है।
व्याख्या के बिंदु
संबद्ध अंश (संक्षिप्त संबंध) और उनके अर्थ
– दूसरों के साथ आचरण में नम्रता: यह उद्धार की दिशा में कदम है, क्योंकि आत्म-गरिमा से नहीं बल्कि ईश्वर पर निर्भरता से ज्ञान बढ़ता है।
– प्रभु की योजना के अनुसार संस्थानिक ज्ञान से आगे बढ़ना: क्लेश और विरोध के बीच भी आत्मा की करुणा और सेवा दिखती है।
– क्रूस की राह: भले ही यह मानवीय ज्ञान के विरुद्ध लगे, यह ईश्वर की शक्ति औरWisdom का स्रोत है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
जातक संदर्भ 1: रोमियों 12:16 के इस विश्वास से एकता और नम्रता की प्रेरणा मिलती है; मनुष्य के भीतर की उच्चभावना को न्यूनतम रखने की सीख देता है।
जातक संदर्भ 2: गलातियों 6:3—व्यक्ति का भ्रम और आत्म-गौरव गिरावट का कारण बन सकता है, परन्तु क्रूसित जीवन इस भ्रम को तोड़ देता है।
जातक संदर्भ 3: याकूब 3:13-18—दॉर्तशीलता और शांति के बीच सही ज्ञान कैसे प्रकट होता है, यह समझाता है कि ऊपर से आने वाला ज्ञान दयालुता से परिपूर्ण है।
व्यावहारिक takeaway
अपने आप को केवल ज्ञान से नहीं, पर प्रभु की क्रूस की पवित्रता और आत्मा के संचालन से आँकना चाहिए। विशुद्ध ज्ञान वही है जो प्रेम में नहीं, प्रभु के बुलावे और सेवा में बढ़े। चाहिए कि हम दूसरों के साथ नम्र रहें, और इस संसार की “ज्ञानी” होने की धुन के बजाय परमेश्वर की योजना के साथ चलें।
नीचे के नोट
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरण सीधे नहीं दिये गये हैं, पर उनकी धारणा के संगत विचारों का समावेश किया गया है ताकि पाठ की गहराई समझी जा सके।