Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 3:1 1 कुरिन्थियों 3:2 1 कुरिन्थियों 3:3 1 कुरिन्थियों 3:4 1 कुरिन्थियों 3:5 1 कुरिन्थियों 3:6 1 कुरिन्थियों 3:7 1 कुरिन्थियों 3:8 1 कुरिन्थियों 3:9 1 कुरिन्थियों 3:10 1 कुरिन्थियों 3:11 1 कुरिन्थियों 3:12 1 कुरिन्थियों 3:13 1 कुरिन्थियों 3:14 1 कुरिन्थियों 3:15 1 कुरिन्थियों 3:16 1 कुरिन्थियों 3:17 1 कुरिन्थियों 3:18 1 कुरिन्थियों 3:19 1 कुरिन्थियों 3:20 1 कुरिन्थियों 3:21 1 कुरिन्थियों 3:22 1 कुरिन्थियों 3:23



सीधे अर्थ का उल्लेख: मैंने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया
1 कुरिन्थियों 3:6 का मूल संदेश यह है कि साथी सेवक कार्यों के परिणाम हमारे नियंत्रण में नहीं हैं; परमेश्वर ही बनावट और वृद्धि का स्रोत है। मिशनार्जन में हमारे योगदान सीमित होते हैं, और परमेश्वर के कार्य से ही प्रभाव प्रमाणित होते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस पंक्ति को पवित्र लेखन में पौलुस अपने परमधर्मकार्य के संदर्भ में लिखते हैं, जहाँ उन्होंने गैर-ठहरने वाले पृथ्वीय किसान-पालन जैसे चित्रों के माध्यम से चर्च के विभाजन के मुद्दे की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा: मैं ने बोया, अपुल्लोस ने सींचा; परन्तु परमेश्वर बढ़ाता है। यह बताता है कि शिक्षण, प्रेरणा, और सामूहिक उत्साह—ये सब मिलकर एक फल देते हैं, पर फल का अधिकार परमेश्वर के हाथ में है।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
अनुसंधान से जुड़े विचार
यहां तीन उल्लेखनीय cross-references हैं जो इस विचार को मजबूत करते हैं:
व्याख्यात्मक नोट: ऊपर बताए गए पदों के संयोग से यह स्पष्ट होता है कि प्रेरितों के कार्यों की मान्यता, और चर्च के भीतर एकता, दोनों परमेश्वर की इच्छा के अनुसार गठित होते हैं।
संक्षेपित प्रतीकात्मक थीम
व्यावहारिक निष्कर्ष
चर्च के सेवक अपने हिस्से के अनुसार काम करें—बोएं, सींचें—पर परिणाम के जिम्मेदार परमेश्वर हैं। एकता और नम्रता बनाए रखें ताकि विकास का स्रोत स्पष्ट रहे।
कथा-सार और उद्धरण संकेत
यद्यपि यह पंक्ति स्पष्ट रूप से “मैं ने बोया, अपुल्लोस ने सींचा” कहती है, पवित्र ग्रंथों के पारंपरिक टिप्पणीकारों के अनुसार, उनका उद्देश्य यह दर्शाना है कि मानव प्रयासों के बराबर-बराबर नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा आवश्यक है ताकि विश्वास का पौधा बढ़े।
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की चर्चित टिप्पणियों से संक्षेप यह है: सेवकत्व के विविध भागों के बावजूद, सफलता का स्रोत परमेश्वर है; परिश्रम और प्रभु-यज्ञ के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। विस्तृत उद्धरण नीचे नहीं दिया गया है, पर उनके विचारों से यह निष्कर्ष उभरता है कि प्रभु की बढ़ोतरी सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम है।
टिप्पणी का निष्कर्ष
हमारे सेवकत्व के परिणाम हमारी काबिलियत का प्रमाण नहीं हैं; यह परमेश्वर की कृपा से बढ़ता है। इसलिए हम एकता से सेवा करें, अपने-अपने योगदान को प्रभु के हाथों में छोड़ दें, और आत्म-गर्व से दूर रहें ताकि उसकी महिमा पूरी तरह उजागर हो सके।