Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 3:1 1 कुरिन्थियों 3:2 1 कुरिन्थियों 3:3 1 कुरिन्थियों 3:4 1 कुरिन्थियों 3:5 1 कुरिन्थियों 3:6 1 कुरिन्थियों 3:7 1 कुरिन्थियों 3:8 1 कुरिन्थियों 3:9 1 कुरिन्थियों 3:10 1 कुरिन्थियों 3:11 1 कुरिन्थियों 3:12 1 कुरिन्थियों 3:13 1 कुरिन्थियों 3:14 1 कुरिन्थियों 3:15 1 कुरिन्थियों 3:16 1 कुरिन्थियों 3:17 1 कुरिन्थियों 3:18 1 कुरिन्थियों 3:19 1 कुरिन्थियों 3:20 1 कुरिन्थियों 3:21 1 कुरिन्थियों 3:22 1 कुरिन्थियों 3:23



कुरिन्थियों 3:5 का अर्थ
सीधे शब्दों में कहा जाए तो इस पाठ में प्रेरित पौलुस और अपुल्लोस के व्यक्तिगत नामों के बजाय उनकी भूमिका और परमेश्वर के कार्य के नियम का उद्घाटन है: वे दोनों सेवक हैं, और विश्वास उसका कर्म है जो परमेश्वर के द्वारा दिया गया है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
1 कुरिन्थियों के लेखक पौलुस ने कोरिंथ की चर्च की अस्थिरता के बीच विश्वासी समुदाय को एक सतर्क और एकरूप संदेश देने का प्रयास किया। चर्च में नेतृत्व के विषय में विभाजन पनप रहे थे, और कुछ लोग अन्य नेता—जैसे अपुल्लोस—की प्रशंसा को बढ़ा-चढ़ा कर दर्शाते थे। पर पौलुस स्पष्ट करते हैं कि प्रभु के काम में प्राथमिकता क्रमानुसार व्यक्तियों के गौरव से नहीं, बल्कि ईश्वर के द्वारा दिए गए विश्वास के वास्तविक स्रोत से है।
मुख्य व्याख्या के बिंदु
टेक्स्ट के साथ संकल्पनात्मक टिप्पणी
अपुल्लोस कौन है? और पौलुस कौन है? सरल-सी गहराई में यह प्रश्न बताता है कि चर्च के भीतर प्रभावशाली चुने हुए व्यक्ति भी केवल सेवक हैं; उनके कार्य का मूल्य उनके प्रभु-प्रदत्त मिशन में है, न कि उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा में। यह शिक्षण प्रेरित लोगों को नम्रता और सहयोग के लिए बुलाता है; ताकि विश्वास एकजुट रहे, धन-केवळ प्रभु के योजना से संचालित हो।
संकेत एक(short) थीम-वाक्य
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप explanations)
माथ्यू Henry, Barnes, Adam Clarke के विचारों के साथ समन्वय में: उन्हें यह याद दिलाते हैं कि चर्च के भीतर नेता केवल साधन हैं, न कि स्रोत। एक प्रेरित की भूमिका में humility और reliance on God's grace प्रमुख है; और हर सेवक के द्वारा दिया गया विश्वास सामूहिक जिम्मेदारी बन जाता है।
관련 पद: 1 कुरिन्थियों 1:12—कथन की एंकरिंग कि चर्च विभाजित क्यों है; कुल व्यक्तित्व नहीं, बल्कि प्रभु के साथ एकता पर बल। गलत नेता-उद्धार की धारणा से अलग, विश्वास का स्रोत परमेश्वर है। 2 कुरिन्थियों 4:7—हम सभी तो मिट्टी के मटके, ताकि परमेश्वर की महान शक्ति हम में दिखे; यह स्वरूप इस पद की दिशा को सारगर्भित करता है। योहन्ना 6:29—प्रभु के काम में क्या है? विश्वास उसी में है जो परमेश्वर के पुत्र पर निर्भर हो।
छोटा-सा practical takeaway
चर्च के सदस्य के रूप में हमें यकीन हो कि—कौन से नेता हों—हमारा आधार और प्रेरणा प्रभु की कृपा और विश्वास से आता है; हमें न तो व्यक्तिगत गौरव की चाहत है और न ही दूसरों के पीछे मुँह मोड़ना। एकता और सेवकत्व के साथ सहयोग करें ताकि प्रभु के उद्देश्य पूरे हों।
निष्कर्ष
1 कुरिन्थियों 3:5 स्पष्ट करता है कि चर्च के बहुमुखी कार्य प्रभु के द्वारा दिए गए विश्वास के माध्यम से ही संभव होते हैं। सेवादारों की विविधता के बीच एकता बनी रहे—क्योंकि वे सभी परमेश्वर के हाथों में एक ही योजना के हिस्से हैं।
cross-references with brief explanations
1) 1 कुरिन्थियों 1:12—विभिन्न नेताओं के ऊपर एकता का आग्रह; 2) 2 कुरिन्थियों 4:7—हमारा मटकी होना ताकि प्रभु की महिमामय शक्ति दिखाई दे; 3) योहन्ना 6:29—यीशु के कर्म का वास्तविक उद्देश्य विश्वास है।
नोट: इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों से बनी शब्द-योजना का उद्देश्य है—नीतिगत स्पष्टता, नम्र नेतृत्व, और ईश्वर की कृपा पर आधारित विश्वास की स्थिरता।