Old Testament
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1 कुरिन्थियों 8:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अब मूरतों के सामने बलि की हुई* वस्तुओं के विषय में हम जानते हैं, कि हम सब को ज्ञान है: ज्ञान घमण्ड उत्पन्न करता है, परन्तु प्रेम से उन्नति होती है।
1 कुरिन्थियों 8:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 कुरिन्थियों 8:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 8:7 (HINIRV) »
परन्तु सब को यह ज्ञान नहीं; परन्तु कितने तो अब तक मूरत को कुछ समझने के कारण मूरतों के सामने बलि की हुई को कुछ वस्तु समझकर खाते हैं, और उनका विवेक निर्बल होकर अशुद्ध होता है।

1 कुरिन्थियों 8:4 (HINIRV) »
अतः मूरतों के सामने बलि की हुई वस्तुओं के खाने के विषय में हम जानते हैं, कि मूरत जगत में कोई वस्तु नहीं*, और एक को छोड़ और कोई परमेश्वर नहीं। (व्य. 4:39)

रोमियों 14:3 (HINIRV) »
और खानेवाला न-खानेवाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खानेवाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।
1 कुरिन्थियों 8:1 — तत्काल संदर्भ और संदेश
पद का पूर्वसंदर्भ: कुरिन्थ में चर्च के कुछ सदस्यों ने मूरत-पूजा से जुड़ी चीजों के pertaining विषय पर चर्चा की। प्रेरित पौलुस इस पत्र में मूरतों के वे वस्तु-भोजन के विषय में बात करते हुए यह स्पष्ट करते हैं कि ज्ञान और प्रेम के सही रिश्ते कैसे व्यवहार में आते हैं।
पद का अर्थ और संदेश
यह वचन बतलाता है कि हमें ज्ञान है या हो सकता है कि हो, पर ज्ञान अकेला हमें धार्मिक ऊँचाई तक नहीं पहुंचाता; प्रेम से जुड़कर वह उन्नति करता है।iency: ज्ञान घमण्ड पैदा कर सकता है, जबकि प्रेम दूसरों की भलाई और एकात्मता के लिए उन्नति करता है। इसलिए মूरत-पूजा के विषय में विवेकपूर्ण व्यवहार के साथ प्रेम की मिसाल बनाए रखना आवश्यक है।
पद के शब्द-चित्र और उनकी व्याख्या
सम्बन्धी आयतें और संदर्भ
• रोम 14:17-19 — मर्यादित आचरण और प्रेम के मार्ग पर सुसंगत जीवन।
• मत्ती 22:37-40 — प्रेम पर आधारित उच्चतम नियम; प्रेम ही कानून का सार है।
• गल 5:22-23 — आत्मा के फल प्रेम को जीवन में फलित करते हैं, न कि घमण्ड को।
महत्वपूर्ण शब्दों के अनुवाद/व्याख्या
यह वचन उन परिस्थितियों में भी लागू हो सकता है जहाँ ज्ञान तेज़-तेज़ आगे बढ़ता है, परन्तु प्रेम की निष्ठा से अविचल रहना पड़ता है। ज्ञान का उद्देश्य दूसरों की सहायता और समाज की उन्नति होनी चाहिए, न कि अपनी श्रेष्ठता दिखाना।
आज के दिन के लिए विश्लेषणात्मक अनुप्रयोग
सूत्रधार उद्देश्य और संक्षेप
पौलुस हमें यह सिखाते हैं कि ज्ञान की महिमा है, पर वह तभी पूर्ण होता है जब प्रेम से संचालित हो। मूरत-पूजा जैसी सामाजिक-धार्मिक जड़ें होने पर भी एक दूसरे के प्रति सम्मान और संयम बनाए रखना चाहिए। यह संदेश आज के चर्चाओं में भी लागू रहता है — ज्ञान ठोस हो सकता है, पर प्रेम से बनता रिश्ता ही समुदाय को जीवित रखता है।
कृपया उद्धृत सन्निवेशन (exact quotes) से ज्ञात Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे उद्धरण उपलब्ध हैं: “ज्ञान घमण्ड उत्पन्न करता है, परन्तु प्रेम से उन्नति होती है।” (पंक्ति से संदर्भित)—उल्लेख नीचे है:
Matthew Henry से संक्षिप्त उद्धरण: “Knowledge puffeth up, but charity buildeth up.” (संक्षित रूप)
Albert Barnes का विचार: ज्ञान के साथ प्रेम का अभाव घमण्ड को जन्म देता है और सामाजिक एकता को कमजोर कर देता है।
Adam Clarke के शब्द: प्रेम से प्रेरित निर्णय ही ठोस रूप से समाज को उन्नति देता है।
Cross-references के सारांश के साथ प्रयोग: रोम 14:17-19, मत्ती 22:37-40, गल 5:22-23