Old Testament
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1 कुरिन्थियों 8:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु चौकस रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारी यह स्वतंत्रता कहीं निर्बलों के लिये ठोकर का कारण हो जाए।
1 कुरिन्थियों 8:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 कुरिन्थियों 8:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 5:13 (HINIRV) »
हे भाइयों, तुम स्वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो*; परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन् प्रेम से एक दूसरे के दास बनो।

रोमियों 14:20 (HINIRV) »
भोजन के लिये परमेश्वर का काम* न बिगाड़; सब कुछ शुद्ध तो है, परन्तु उस मनुष्य के लिये बुरा है, जिसको उसके भोजन करने से ठोकर लगती है।

रोमियों 14:1 (HINIRV) »
जो विश्वास में निर्बल है*, उसे अपनी संगति में ले लो, परन्तु उसकी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं।
मुख्य अर्थ: स्वतंत्रता पर नियंत्रण
1 कुरिन्थियों 8:9 में प्रेरित हाथ से कहा गया संकेत है कि क्रिस्ती भव के भीतर हमारी आत्म-स्वतंत्रता को संतुलित और निस्पंद बनाकर रखना चाहिए, ताकि वह निर्बलों के लिये ठोकर का कारण न बने। इसका तात्पर्य यह है कि हमारी liberty में सतर्कता हो—हम क्योंकिसी को उनके विश्वास के कारण ठेस न पहुँचाएं या किसी के विश्वास को कमज़ोर बनाएं।
संदर्भ-ब Hintergrund
पृष्ठभूमि: कुरिन्थ के चर्च में कुछ ऐसे प्रश्न थे जो खाद्यों, मंदिर-सेवा, और ज्ञान-गौरव से जुड़े थे। उनकी स्वतंत्रता के कारण कुछ कमज़ोर ऐसे थे जिनके लिए गैर-आवश्यक आचरण चोट पहुँचाने वाला हो सकता था। लेखक ने प्रेम और बंधुत्व की नीति को प्रमुख माना, ताकि चर्च एक समानृत आत्मा से चले।
व्याख्यात्मक बिंदु
कथ्यगत संकेत (किरदारात्मक टिप्पणियाँ)
मैथ्यू हेनरी के अनुसार, यह नहीं कहा गया कि स्वतंत्रता अवश्य ही छोड़ दी जाए, बल्कि वह चेतावनी देता है कि आत्म-स्वतंत्रता पर संयम बरता जाए ताकि कमजोर लोगों के विश्वास पर चोट न पहुँचे।
एल्बर्ट बॉर्न्स के विचार के अनुसार, वास्तविकता यह है कि प्रेमपूर्ण मोड़ से हम अपने अधिकारों को मोड़ते हैं ताकि समुदाय एकजुट रहे।
एडम क्लार्क ने इस प्रकार के विचारों को पवित्र जीवन के लिए आवश्यक माना है; यह उदाहरण देता है कि कैसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता सामाजिक एकता को नुकसान पहुँचा सकती है यदि वह प्रेम के मार्ग की सीमा को पार करे।
कृषीगत क्रॉस-रेफरंस (संक्षेप में)
इन संदर्भों में दर्शाया गया है कि व्यक्तिगत अधिकार तब सार्थक होते हैं जब वे समुदाय के प्रेम और ईश्वर की महिमा के अनुरूप समायोजित हों।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
जब भी हम कुछ स्वतंत्रता या अधिकार के बारे में सोचें, विचार करें: क्या यह प्रेम के मार्ग को आसान बनाता है या किसी कमजोर विश्वास की cesta पर चोट पहुँचाता है? यदि हाँ, तो पीछे हटना, विवेक से कार्य करना और सहयोगी बनना सबसे बेहतर मार्ग है।
संक्षेप में: हमारी स्वतंत्रता ऐसे मार्ग पर हो जो विश्वास-योग्य और प्रेमपूर्ण समुदाय को बनाए रखे; वरना उसे संयम से नियंत्रित करें ताकि किसी के लिए ठोकर न बनें।