Old Testament
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1 कुरिन्थियों 8:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यद्यपि आकाश में और पृथ्वी पर बहुत से ईश्वर कहलाते हैं, (जैसा कि बहुत से ईश्वर और बहुत से प्रभु हैं)।
1 कुरिन्थियों 8:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 कुरिन्थियों 8:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 थिस्सलुनीकियों 2:4 (HINIRV) »
जो विरोध करता है, और हर एक से जो परमेश्वर, या पूज्य कहलाता है, अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में बैठकर अपने आप को परमेश्वर प्रगट करता है। (यहे. 28:2, दानि. 11:36-37)

व्यवस्थाविवरण 10:17 (HINIRV) »
क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य परमेश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है। (प्रेरि. 10:34, रोम. 2:11, गला. 2:6, इफि. 6:9, कुलु. 3:25, 1 तीमु. 6:15, प्रका. 17:14, प्रका. 19:16)

गलातियों 4:8 (HINIRV) »
फिर पहले, तो तुम परमेश्वर को न जानकर उनके दास थे जो स्वभाव में देवता नहीं। (यशा. 37:19, यिर्म. 2:11)
1 कुरिन्थियों 8:5 (HINIRV) — तत्त्वतः एक ही ईश्वर के बारे में साक्ष्य
इस पासेज का तत्काल परिवेश: पॉल ने कुरिन्थ के चर्च में खाए-पीए गए अन्न के विषय में अपनी बहस शुरू की। यह अध्याय ईश्वर के ‘एक से अधिक ईश्वर’ और मूक प्रतीकों के पीछे के सही दृष्टिकोण पर केंद्रित है। पॉल स्पष्ट करते हैं कि पृथ्वी पर जो आक्स (प्रतिमा) और जो तमाम देव-देवताओं के नाम हैं, वे सचमुच आकाश के एकष्टतम ईश्वर के विरुद्ध नहीं, बल्कि धारणाओं की विविधता के कारण परिचित हैं।
यह पाठ देवता के बारे में क्या बताता है?
पॉल की मूल धारणा यह है कि दिखावे में अनेक ईश्वर और अनेक प्रभु हो सकते हैं, किन्तु वास्तविक ईश्वर एक है। ये भाषा-चित्र यह बताती है कि हमारी स्मृति और समाज में विभिन्न पवित्रता के नाम हो सकते हैं, पर उनके पीछे एक ईश्वर ही जिम्मेदार है—जो सृजनकर्ता और उद्धारकर्ता के रूप में प्रकट होता है। इस विचार से विश्व-प्रेम और पहचान में एक स्पष्टता बनती है: ईश्वर एक है, और मसीह के ऊपर का अधिकार उसी की योजना का केंद्र है।
महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ
अन्य प्रत्यक्ष शास्त्र-सम्बन्ध
- रोम 9:5; याकूब 2:19: ये दिखाते हैं कि विविध देवताओं की मान्यता के बावजूद परमेश्वर एक ही है।
- 1 कुरिन्थियों 12:4-6: आत्माओं के विविध कार्य, पर प्रभु, आत्मा, और परमेश्वर के एक ही स्रोत से आते हैं—हम यह समझ सकें कि विविधता होने पर भी परमेश्वर का एकत्व बना रहता है।
19वीं शताब्दी के प्रवाद-उद्धरणों का संक्षेप
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के टिप्पणियों के छोटे-छोटे सार इस विचार को पुष्ट करते हैं कि भिन्न-भिन्न देवत्व के दावे दिखावटी हैं; पर वास्तविक परमेश्वर की एकता अटल है। वे कहते हैं कि पहचान में विविधता होने के बाद भी उद्धारकर्ता के सामने एक ही अधिकारी का वास्तविक महत्व है।
Cross-reference note: नीचे दिये गए संकेतगाथा-शब्द केवल संदर्भ हेतु हैं, पूर्ण पद नहीं उद्धृत किये गए:
आज के समय में व्यावहारिक आवेदन
- व्यक्तिगत जीवन में: ज्ञात मान्यताओं के बावजूद, हमें यह याद रखना चाहिए कि ईश्वर एक हैं और उनके प्रेम की ठोस मान्यता से नैतिक निर्णय लेने चाहिए।
- चर्च-समुदाय के लिए: विविध धार्मिक अनुभवों के बावजूद, यीशु मसीह में एकत्व को केन्द्र में रखें ताकि विभेदित मान्यताओं से उत्पन्न भ्रम कम हो।
- जीवन-नैतिकता: प्रतिमा-उपासना या दावे से परे, कृपा और सेवा के आधार पर एक मार्ग चुनें जो ईश्वर के एकत्व को सम्मान दे।
संक्षिप्त रूपरेखा
• तत्काल सेटिंग: आकाश-पृथ्वी में विभिन्न देवताओं के नाम।
• सार: ईश्वर एक हैं; बहु-देवताओं का दृश्य केवल भक्ति-आडम्बर है।
• शब्दार्थ: ईश्वर, प्रभु का एकत्व और सत्तारूढ़ सत्ता।
• संबंध: रोम 9:5; 1 कोर 12:4-6; याकूब 2:19।
• आज: एकत्व को केंद्र बनाकर विश्वास और व्यवहार का संयम बनाए रखें।