Old Testament
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1 कुरिन्थियों 13:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यदि मैं मनुष्यों, और स्वर्गदूतों की बोलियां बोलूँ, और प्रेम न रखूँ, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झाँझ हूँ।
1 कुरिन्थियों 13:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 कुरिन्थियों 13:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 1:5 (HINIRV) »
आज्ञा का सारांश यह है कि शुद्ध मन और अच्छे विवेक, और निष्कपट विश्वास से प्रेम उत्पन्न हो।

1 पतरस 4:8 (HINIRV) »
सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है*। (नीति. 10:12)

प्रमुख व्याख्या बिंदु
1 कुरिन्थियों 13:1 में प्रेरित पॉल हमें उन शब्दों के महत्त्व से अवगत कराते हैं: चाहे किसी के पास आध्यात्मिक उपहार कितने ही उच्च हों, अगर प्रेम नहीं है तो वह सब कुछ खोखला है। इस मर्मस्पर्शी संदेश को समझने के लिए पहले साहित्यिक संदर्भ समझना आवश्यक है—यह अध्याय प्रेम के गहरे गुणों पर केन्द्रित है और समाज-जीवन में ईश्वर को मान्यता देने के लिए प्रेम के वास्तविक स्वरूप की जरूरत बताता है।
साहित्यिक संदर्भ/संदर्भ-आधार
यह पाठ 13वें अध्याय का आरम्भ है, जहाँ पॉल ने चर्च में विभाजन, अति-प्रतीक-उपहारों, और प्रेम की सर्वोच्चता को स्पष्ट किया है। पॉल का उद्देश्य है कि आध्यात्मिक उपहारों के प्रदर्शन से अधिक आवश्यक है उनका सही उपयोग—जो प्रेम में विनम्रता, सहनशीलता, और आत्म-नियमन से जुड़ा हो।
धार्मिक महत्व
यह वाक्य बताता है कि उच्च-स्तरीयभाषा या प्रभावशाली आवाज़ें भी अगर प्रेम के बिना हों, तो वे एक निरर्थक चमक बन जाती हैं—ठनठनाती पीतल या झंझनाती झाँझ की भांति। प्रेम ही वह गुण है जो सत्युत्तव और धैर्य को लोगों के बीच स्थापित करता है। इसलिए, चर्च के लिए प्रेरित जीवन का मर्म प्रेम बनना चाहिए, न कि दिखावे या शक्तिप्रदर्शन।
क्रॉस-रेफरेंसेस
इन संदर्भों में यह दिखता है कि प्रेम, न कि दिखावा या शक्ति, वास्तविक परिवर्तन की प्रेरक है।
रहस्यमय/आस्था से जुड़ी विचार-प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
केवल आवाज़ों की भड़क या उच्च-उच्च उपहार व्यक्तिगत पथ-प्रदर्शन नहीं बनते। सच पवित्रता और चर्च की जीवन-शैली वही है जिसमें प्रेम सर्वोपरि होता है—हर क्रिया में, हर बात-चीत में, और हर समाज-संबंध में। इस प्रकार 1 कुरिन्थियों 13:1 दर्शाता है कि प्रेम के बिना सभी दिव्य उपहार केवल एक अवरोधचिह्न के समान हैं, जो जीवन की वास्तविक मिठास को खो देते हैं।
ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से संकलित दृश्य
हार्नेस, बार्न्स और क्लार्क के प्रकाशकों के अनुसार, प्रेम किसी भी वस्तुगत लाभ से बढ़कर है; यह क्रिया-शीलता, समानता, और सहनशीलता की आत्मा है। यदि प्रेम नहीं है, तो भाषण, ज्ञान, और विश्वास भी मानव-निर्मित ध्वनियाँ बनकर रह जाते हैं—जो आत्मा के वास्तविक निर्माण को नहीं छुतीं।
उद्धरण संकेत: “यदि मैं मनुष्यों, और स्वर्गदूतों की बोलियां बोलूँ, और प्रेम न रखूँ, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झाँझ हूँ।” — यह वाक्य कुरिन्थियों के प्रेम-गुण के बिना उपहारों के व्यर्थ होने की कठोर चेतावनी देता है।
प्रश्न-आधारित संदर्भ
1 कुरिन्थियों 13 के संदर्भ में विचार करें कि प्रेम कैसे चर्च के बीच एकता बनाता है; यह व्यक्तिगत दूसरों के लिए सम्मान, करुणा, और परोपकार का आधार है।
नोट: उपर्युक्त उद्धरण को सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों से समेकित किया गया है; विशिष्ट पंक्तियों के शाब्दिक पूर्ण-वाक्यों के संपूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं, परन्तु मूल विचार का सार उद्धृत किया गया है।