Old Testament
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1 कुरिन्थियों 13:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु जब सर्वसिद्ध* आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1 कुरिन्थियों 13:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 कुरिन्थियों 13:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 13:12 (HINIRV) »
अब हमें दर्पण में धुँधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने-सामने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहचानूँगा, जैसा मैं पहचाना गया हूँ।

यशायाह 60:19 (HINIRV) »
फिर दिन को सूर्य तेरा उजियाला न होगा, न चाँदनी के लिये चन्द्रमा परन्तु यहोवा तेरे लिये सदा का उजियाला और तेरा परमेश्वर तेरी शोभा ठहरेगा। (प्रका. 21:123, प्रका. 22:5)

यशायाह 24:23 (HINIRV) »
तब चन्द्रमा संकुचित हो जाएगा और सूर्य लज्जित होगा; क्योंकि सेनाओं का यहोवा सिय्योन पर्वत पर और यरूशलेम में अपनी प्रजा के पुरनियों के सामने प्रताप के साथ राज्य करेगा।
1 कुरिन्थियों 13:10 का पाठ और उसकी दृष्टि
यह पंक्ति पवित्र प्रेम के महत्व को समझाते हुए बताती है कि जब पूर्णता सामने आ जाएगी, तभी अधूरापन दूर हो जाएगा। यहां पवित्र लेखक प्रेरित पौलुस बताते हैं कि प्रेम का उद्देश्य व्यवहार और अनुभव की वर्तमान मर्यादाओं को पूर्णता के साथ परिष्कृत करना है। गोस्वामी यीशु के प्रतिनिधित्व में, परमेश्वर के राज्य में ज्ञान और अनुभव—सब कुछ एक दिन आत्म-सम्पूर्णता पाएंगे।
कथन के भीतर का संदर्भ
पौलुस ने कुरिन्थियों को प्रेम के उच्च मानदंड की शिक्षा दी। 13:8-12 के क्रम में भक्तिमय प्रेम स्थाई है, जबकि सांसारिक योग्यता और ज्ञान अस्थिर है। 13:10 में कहा गया है कि जब पूर्णता आ जाएगी, तब अधूरापन मिट जाएगा। यह बताने का संकेत है कि वर्तमान जीवन में जो कुछ भी अधूरा है, वह भविष्य के पूर्णत्व के आगमन से पूरा हो जाएगा।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल संदर्भ और उनके जुड़ाव
- यूहन्ना 13:34-35: नये आदेश में प्रेम को भाइयों के बीच स्थिरता और एकता का चिन्ह माना गया है; यह 13:10 के पूर्णत्व के अर्थ को सम्बन्धित करता है कि प्रेम ही परम सत्य को बाँधकर रखता है।
- रोमियों 12:2: सदैव नया मन बनाकर और ईश्वर की इच्छा के अनुसार परिवर्तन से अधूरापन घटता है; पूर्णता की ओर बढ़ना प्रेम के साथ जुड़ा रहता है।
- फिलिप्पियों 3:12-14: लक्ष्य की दिशा, ईसा मसीह को जानना, इस जीवन के सभी अधूरापन से ऊपर उठना है; यह 13:10 के पूर्णत्व के लक्ष्य का मार्गदर्शन करता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- अपने व्यक्तिगत जीवन में आप प्रेम के मानदंड को ऊँचा रखें—भाइयों के साथ नम्रता, सहिष्णुता, और सच बोलना।
- कठिन परिस्थितियों में भी प्रेम से प्रतिक्रिया दें; अधूरापन महसूस होने पर भी धैर्य और विश्वास बनाए रखें।
- समुदाय में एकता और सहयोग को बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाएं, जैसे क्षमा करना और हितैषी सहायता देना।
समरी
13:10 यह बताता है कि अधूरापन तब मिटेगा जब परम पूर्णता आ जाएगी। इस समय संसार में हमें प्रेम के बढ़ते स्वरूप की शिक्षा मिलती है, ताकि हम अपने जीवन, समुदाय और विश्वास के लक्ष्य के प्रति पूर्णता की ओर अग्रसर हों। प्रेम ही वह शक्ति है जो सभी अदूरियाँ दूर कर देती है और अंततः ईश्वर के राज्य की सत्यता में हमें एक समान कर देती है।
हिंदी-उद्धृत टिप्पणी-आइडिया
Ὁ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन समालोचनाओं में से वे विषय-रेखा जहाँ-जहाँ प्रेम संपूर्णता के प्रति मार्गदर्शित करता है, वहाँ तत्काल प्रस्थान के मार्गदर्शक संकेत मिलते हैं। उनके शब्दों से प्रेरित, यहाँ यह निष्कर्ष निकलता है कि अधूरापन प्रेम के उच्च मानदंड के प्रकाश में धीरे-धीरे गायब हो जाता है, और भविष्य की पूर्णता के स्वागत के लिए हमारे आचरण और विश्वास को तैयार करता है। (यदि आप चाहें तो मैं उनके उद्धृत विचारों के छोटे कथन-दिशानिर्देश संकलित कर सकता/सकती हूँ।)