Old Testament
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1 कुरिन्थियों 13:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1 कुरिन्थियों 13:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 कुरिन्थियों 13:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इफिसियों 3:18 (HINIRV) »
सब पवित्र लोगों के साथ भली-भाँति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊँचाई, और गहराई कितनी है।

1 कुरिन्थियों 2:9 (HINIRV) »
परन्तु जैसा लिखा है, “जो आँख ने नहीं देखी*, और कान ने नहीं सुनी, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ी वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखनेवालों के लिये तैयार की हैं।” (यशा. 64:4)

1 कुरिन्थियों 13:12 (HINIRV) »
अब हमें दर्पण में धुँधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने-सामने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहचानूँगा, जैसा मैं पहचाना गया हूँ।
पassage के तत्काल संदर्भ में स्थिति (1 कुरिन्थियों 13:9)
पवित्र ग्रंथ की इस पंक्ति में पौलुस कुरिन्थियों से ईसाई समुदाय के बीच प्रेम की महिमा को स्थापित करने के क्रम में चाप्टर 13 के पूर्वगामी भाग की दृष्टि को संक्षेप में प्रस्तुत करते हैं। यहाँ प्रेम सबसे ऊँचे सिद्धांत के रूप में पहचाना गया है, जबकि उसके सामने अस्थाई और आंशिक ज्ञान-प्राप्तियाँ एक सीमित परिप्रेक्ष्य बनाती हैं। 13वें अध्याय में प्रेम की स्थिरता, धीर-धैर्य और अनित्यता के विरुद्ध प्रतिफल—यही संदेश इस वाक्यांश के पीछे की आंतरिक धार है कि हमारी विद्या और भविष्यवाणी, दोनों ही अभी अधूरी हैं।
क्यों यह लेखन ঈश्वर के बारे में स्पष्ट संकेत देता है
यह वाक्य बताता है कि मनुष्य के ज्ञान और भविष्यद्वाणी की सीमा का होना, हमारी सीमा-स्वीकृति है—परन्तु ईश्वर के प्रकाश में यह सीमित ज्ञान भी कार्य-व्यापी है। परमेश्वर की योजना में अभी अगले चरणों का उजाला है; हमारा अनुभव और प्रतीति अभी पूर्ण नहीं है, पर प्रेम के साथ हम उसी दिशा में प्रयास करते रहते हैं।
मुख्य शब्दों की व्याख्या
संबद्ध अनुच्छेद (Cross-references)
– रोमियों 8:24-25: आशा के पूर्णता के तुलनात्मक विचार—हम आशा से आगे बढ़ते हैं, क्योंकि अभी पक्का नहीं दिख रहा।
– परमेश्वर के दर्शन 1:7: भविष्य की बातें अभी पूर्ण नहीं, पर प्रेम में स्थिरता है।
– हिमालयियों 11:1-2: विश्वास से देखना कि वर्तमान नहीं, भविष्य का सच कितना बड़ा है—पर प्रेम मार्गदर्शक बना रहता है।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ज्ञान की सीमाओं के बावजूद, विश्वास और प्रेम का समन्वय हमें परमेश्वर की पूर्णता के आशीर्वाद के मार्ग पर रखता है।
आज के संदर्भ में Practical Application
- निराशा से उभरकर प्रेम पर टिके रहें: यह बताता है कि जब ज्ञान कम पड़ता है, तब प्रेम ही स्थिर और निर्णायक रहता है।
-िक्षण्य और निर्णय: अपने विचारों को उच्चतम नैतिक मानकों के अनुरूप रखने के लिए प्रेम को प्रधान बनाएं, ताकि अधूरा ज्ञान भी ईश्वर के प्रकाश के साथ प्रभावी बने।
- समुदाय में विनय और सहयोग: अधूरी जानकारी के बावजूद एक-दूसरे के साथ धैर्य और विनम्रता से व्यवहार करें; भविष्य के ज्ञान की प्रतीक्षा करते हुए एक दूसरे के साथ मिलकर चलें।
सार संकल्पना
1 कुरिन्थियों 13:9 बताता है कि हमारे ज्ञान और भविष्यद्वाणी वर्तमान स्थितियों में अधूरे हैं, पर प्रेम के साथ हम मानवीय सीमाओं के पार जाकर ईश्वर की योजना को आगे बढ़ाते हैं। यह वाक्यांश हमें स्मरण कराता है कि पूर्णता अभी रोक-थाम के भीतर है, और विश्वासी के लिए प्रेरित रहने का आधार प्रेम ही है।
नोट: मूल संदेश में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों के संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हो सकने पर, नीचे दिए गए स्रोतों से जुड़े वाक्यों को उद्धृत किया गया है।