1 कुरिन्थियों 13:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह सब बातें सह लेता है, सब बातों पर विश्वास करता है, सब बातों की आशा रखता है*, सब बातों में धीरज धरता है। (1 कुरि. 13:4)

1 कुरिन्थियों 13:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 कुरिन्थियों 13:7 — संदर्भ में समझ

इस पद का संदर्भ पूरा अध्याय 13 है, जिसे “प्रेम” के अंश के रूप में जाना जाता है। पवित्र लेखन में प्रेरित लेखक पॉल ने परमेश्वर के प्रेम को सर्वोच्च मानते हुए दिखाया है कि प्रेम शास्त्रीय औचित्य नहीं, बल्कि क्रिया है। 13:7 बताता है कि प्रेम कैसे आचरण करता है—यह सब बातें सह लेता है, विश्वास रखता है, आशा बनाये रहता है, और धीरज धारण करता है। यह चारों गुण प्रेम की परिपक्वता का संकेत हैं और बताता है कि प्रेम कठिन समय में भी सक्रिय रहता है।

मुख्य भावार्थ

यह वाक्य प्रेम की निष्ठा और मूर्त उपस्थिति को दर्शाता है। प्रेम स्वयं को सीमाओं में नहीं बाँधता; वह हर परिस्थिति में स्थिर रहता है—सहना, विश्वास, आशा, और धैर्य के साथ। यह चारों तत्त्व मिलकर दिखाते हैं कि प्रेम, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, अपने कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित रहता है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • धैर्य (धीरज): प्रेम समय के साथ भी अचल रहता है, चोटों को स्वीकृति देता है और स्थिरता बनाये रखता है।
  • विश्वास और आशा: प्रेम अंधकार में भी विश्वास नहीं खोता; यह भविष्य के विश्वास के साथ आगे बढ़ता है और उम्मीद को बनाए रखता है।
  • विचारणीय सहनशीलता: प्रेम हर स्थिति में प्रेमी के लिए सबसे अच्छा काम करने की प्रेरणा देता है, भेदभाव या अहंकार से ऊपर उठकर।

संबंधित पद

— रोमियों 12:12: प्रेम साथ हो, चिंता न हो, आशा में दृढ़ रहें और धैर्यपूर्वक प्रार्थना करें।

— यूहन्ना 16:33: जगत में संकट है, परन्तु मसीह में हमारी शांति है; वह हमारी कठिनाइयों के बीच भी साहस देता है।

— कोलुसियों 3:14: प्रेम सब चीजों से ऊपर है; यह सामंजस्य की कड़ी बांधता है।

अनुभविक सच और व्यावहारिक विवेचना

व्यावहारिक दृष्टि से, प्रेम के ये चार गुण हमारी रोज़मर्रा की रिश्तों में क्रिया-कलाप बनते हैं। जब हम घर-परिवार, मित्रों या सामुदायिक जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हैं, तब भी प्रेम के इन चार आयामों पर टिकना समस्या-समाधान की कुंजी बन जाता है। विशेषकर कठिनाइयों में, प्रेम पहले समझौते की जगह समर्पण की राह दिखाता है—सहना, विश्वास और आशा से वे बाधाएं भी धीरज के साथ पार होती हैं।

यह संदेश मार्मिक रूप से यह कहता है कि प्रेम केवल भावनात्मक अनुभूति नहीं है, बल्कि एक कर्म-प्रधान जीवन है। प्रकट प्रेम वह है जो परीक्षण में टिकता है, और दूसरों के लिए सचमुच प्रेरणा बनता है।

पवित्र लेखन से संक्षेप

कुल मिलाकर 13:7 प्रेम की पूर्णता का परिचय देता है—हर परिस्थिति में प्रेम सहनशील, विश्वासपूर्ण, आशावान और धैर्यवान रहता है। इस गुण-समूह के माध्यम से पवित्रता और बाइबल की नैतिकता जीवन के हर क्षेत्र में उजागर होती है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

प्रेम हर कठिनाई में स्थिर, आशा और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है, और धैर्य को धारण कर लचीलापन देता है। यह वही विरासत है जिसे 1 कुरिन्थियों 13:4–7 में प्रेरित पॉल ने स्पष्ट किया है—प्रेम जीवन को उच्चतम मानक देता है और सब चीजों को एक बुन्यादी उद्देश्य के साथ जोड़े रखता है।

2-3 क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ संक्षिप्त व्याख्या

रोमियों 12:12 — आशा में उत्साहपूर्वक और कष्ट के समय धीरज के साथ प्रार्थना करें; प्रेम में तत्पर रहें। इसका संबंध बताता है कि प्रेम एक सतत सक्रिय जीवनशैली है।

यूहन्ना 15:12 — यह है मेरा आदेश: एक दूसरे से प्रेम करो; जैसा मैं ने तुम्हें प्रेम किया है, वैसा करो। यह 13:7 के प्रभावित दायरे को व्यवहारिक बनता है।

केलुसियों 3:14 — प्रेम सब चीजों से ऊपर है; वह विकास और एकता के सूत्रधार के रूप में कार्य करता है।

नोट: नीचे किसी भी प्रत्यय में महत्त्वपूर्ण उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सीधे शब्दों में नहीं हैं; केवल आवश्यक संदर्भ-उद्धरण मौजूद हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 13:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है*। (नीति. 10:12)

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प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।

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1 पतरस 2:24 (HINIRV) »
वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए* क्रूस पर चढ़ गया, जिससे हम पापों के लिये मर करके धार्मिकता के लिये जीवन बिताएँ। उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। (यशा. 53:4-5,12, गला. 3:13)

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